23 सितंबर 2026
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राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती: योगी, धामी, भजनलाल समेत कई CM और J&K LG ने किया नमन

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राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती: योगी, धामी, भजनलाल समेत कई CM और J&K LG ने किया नमन

सारांश

राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती पर देश के कोने-कोने से श्रद्धांजलि का सैलाब उमड़ा — सात राज्यों के मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने उनकी ओजस्वी लेखनी को याद किया। यह एकजुटता बताती है कि 'रश्मिरथी' और 'कुरुक्षेत्र' के रचयिता आज भी राजनीतिक सीमाओं से परे राष्ट्रचेतना के प्रतीक बने हुए हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती 23 सितंबर 2026 को मनाई गई।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट कर दिनकर को 'हिंदी साहित्य जगत के सशक्त हस्ताक्षर' बताया।
उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ , दिल्ली की CM रेखा गुप्ता , उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी , राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा , MP के CM मोहन यादव , हरियाणा के CM नायब सैनी और बिहार के CM सम्राट चौधरी ने श्रद्धांजलि दी।
दिनकर को पद्म भूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया था; प्रमुख कृतियों में 'रश्मिरथी' , 'कुरुक्षेत्र' और 'उर्वशी' शामिल हैं।
दिनकर का जन्म बिहार के बेगूसराय में हुआ था और वे हिंदी साहित्य में 'वीर रस' के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर 23 सितंबर 2026 को देशभर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हुआ, जब उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और बिहार के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने उन्हें विनम्र नमन किया। हिंदी साहित्य के इस युगपुरुष की रचनाएँ आज भी करोड़ों भारतीयों को राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यबोध की प्रेरणा देती हैं।

उपराज्यपाल और मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'अपनी ओजस्वी लेखनी से जनमानस में राष्ट्रप्रेम, वीरता और स्वाभिमान का संचार करने वाले हिंदी साहित्य जगत के सशक्त हस्ताक्षर, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्म जयंती पर शत्-शत् नमन। उनकी रचनाएं युगों-युगों तक जन-जन को देशभक्ति और कर्तव्यबोध के पथ पर प्रेरित करती रहेंगी।'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिनकर को 'हिंदी साहित्य के शलाका पुरुष' बताते हुए कहा कि उनकी 'निष्पक्ष एवं निर्भीक लेखनी ने राष्ट्रीय स्वाभिमान को जागृत कर जन-जन की चेतना में नई ऊर्जा का संचार किया।' उन्होंने यह भी कहा कि दिनकर का 'ओजपूर्ण कृतित्व भारत की संस्कृति एवं संस्कारों को सतत प्रगाढ़ और प्रखर करता रहेगा।'

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा कि 'पराधीन भारत के संघर्ष से लेकर स्वतंत्र भारत की आकांक्षाओं तक, दिनकर जी की लेखनी ने राष्ट्र के स्वाभिमान, सामर्थ्य और चेतना को प्रखर स्वर दिया।' उन्होंने यह भी कहा कि दिनकर की रचनाओं में 'भारत के इतिहास का तेज भी है और भविष्य का विश्वास भी।'

अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों का नमन

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिनकर की 'वीर रस, राष्ट्रचेतना, सामाजिक सरोकार और भारतीय संस्कृति के विविध आयामों' को समेटने वाली साहित्य-साधना को 'अद्वितीय' बताया और कहा कि उनकी 'प्रखर लेखनी और कालजयी विचार सदैव युवा पीढ़ी को राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति दायित्वों की प्रेरणा देते रहेंगे।'

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लिखा कि दिनकर की 'कालजयी रचनाएं आज भी हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्वों के प्रति सजग और समर्पित रहने की प्रेरणा देती हैं।'

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 'रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र' और 'उर्वशी' जैसी कृतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से दिनकर ने 'साहित्य में राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान, शौर्य और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त स्वर दिया।'

हरियाणा और बिहार की श्रद्धांजलि

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने दिनकर को 'कालजयी कवि, निबंधकार और वीर रस के प्रखर स्वर' बताते हुए कहा कि उन्होंने 'हिंदी साहित्य को अपनी ओजस्वी और राष्ट्रवादी रचनाओं से समृद्ध किया।'

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 'राष्ट्रकवि' और 'पद्म भूषण' से सम्मानित दिनकर को नमन करते हुए कहा कि 'वीर रस, राष्ट्रप्रेम और जनचेतना से ओतप्रोत उनकी कालजयी रचनाएं आज भी देशवासियों को प्रेरणा देती हैं।' गौरतलब है कि दिनकर का जन्म बिहार के बेगूसराय ज़िले में हुआ था, इसलिए बिहार के नेताओं के लिए यह जयंती विशेष महत्त्व रखती है।

दिनकर की साहित्यिक विरासत

रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य में 'वीर रस' के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिने जाते हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र', 'उर्वशी' और 'हुंकार' शामिल हैं। 'उर्वशी' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और बाद में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना पर सार्वजनिक विमर्श जारी है — दिनकर की कविताएँ उस बहस में बार-बार उद्धृत होती हैं।

देशभर के नेताओं की एकजुट श्रद्धांजलि यह दर्शाती है कि दिनकर का साहित्य राजनीतिक सीमाओं से परे आज भी प्रासंगिक बना हुआ है। आने वाली पीढ़ियाँ उनकी रचनाओं से राष्ट्रचेतना की प्रेरणा लेती रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि दिनकर की सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदना वाली रचनाएँ प्रायः पीछे छूट जाती हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि क्या दिनकर के साहित्य की पूरी गहराई — न सिर्फ 'हुंकार' बल्कि 'उर्वशी' की मानवीय कोमलता — को भी उतनी ही प्रमुखता मिल रही है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर कौन थे?
रामधारी सिंह दिनकर हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि और 'वीर रस' के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधियों में से एक थे। उनका जन्म बिहार के बेगूसराय ज़िले में हुआ था और उन्हें 'पद्म भूषण' तथा 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।
दिनकर की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
'रश्मिरथी', 'कुरुक्षेत्र' और 'उर्वशी' उनकी सबसे चर्चित कृतियाँ हैं। 'उर्वशी' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था और 'हुंकार' ने स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
2026 में दिनकर जयंती पर किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
23 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की CM रेखा गुप्ता, उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी, राजस्थान के CM भजनलाल शर्मा, MP के CM मोहन यादव, हरियाणा के CM नायब सैनी और बिहार के CM सम्राट चौधरी ने दिनकर को श्रद्धांजलि दी।
दिनकर को 'राष्ट्रकवि' क्यों कहा जाता है?
दिनकर की रचनाओं ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और उसके बाद भी राष्ट्रीय स्वाभिमान, वीरता और सामाजिक चेतना को काव्य में ढाला। उनकी ओजस्वी लेखनी ने जन-जन को प्रेरित किया, इसीलिए उन्हें 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी गई।
दिनकर का साहित्य आज क्यों प्रासंगिक है?
उनकी कविताएँ राष्ट्रप्रेम, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित हैं, जो आज भी समकालीन विमर्श में उद्धृत होती हैं। राजनीतिक नेताओं से लेकर साहित्यप्रेमियों तक, सभी उनकी रचनाओं में आज के सवालों के जवाब तलाशते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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