स्वतंत्रता दिवस पूर्व संध्या: राष्ट्रपति मुर्मु ने खिलाड़ियों सहित सभी राष्ट्र-निर्माताओं को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 14 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की प्रगति में खिलाड़ियों सहित समाज के हर वर्ग के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में वर्णित मौलिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करने वाला प्रत्येक नागरिक राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार है।
राष्ट्रपति के संबोधन के मुख्य बिंदु
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने भाषण में छात्रों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, किसानों, श्रमिकों, कारीगरों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों, निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों, चुने हुए जनप्रतिनिधियों, न्यायपालिका के सदस्यों और खिलाड़ियों — सभी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन सभी की कोशिशों और उपलब्धियों ने देश के विकास और राष्ट्रीय गौरव में सीधा योगदान दिया है।
राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों — थलसेना, वायुसेना और नौसेना — के साथ-साथ सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिस संगठनों में सेवारत जवानों के प्रति विशेष सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ये बल देश की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।
आज़ादी के असली अर्थ पर ज़ोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने 15 अगस्त, 1947 के ऐतिहासिक क्षण को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के अवसरों का लाभ उठा सके। उन्होंने कहा, '15 अगस्त, 1947 को भारत माता गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुईं। हर नागरिक स्वतंत्र भारत के भाग्य का निर्माता बन गया। आज़ादी का असली मतलब यह सुनिश्चित करना है कि सभी नागरिक अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के अवसरों का लाभ उठा सकें और भारत को दुनिया का अग्रणी राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर सकें।'
उन्होंने स्वतंत्रता दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि 1947 से अब तक की यात्रा पर मनन करने और आगे की जिम्मेदारियों को नए सिरे से स्वीकार करने का अवसर बताया।
प्रवासी भारतीयों और राजनयिकों को श्रेय
राष्ट्रपति ने विदेशों में बसे भारतीयों और दुनियाभर के भारतीय राजनयिक मिशनों में कार्यरत अधिकारियों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन सभी के प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति और प्रतिष्ठा निरंतर सुदृढ़ हो रही है।
राष्ट्रपति ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, 'स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर मैं आप सभी को इस राष्ट्रीय त्योहार की हार्दिक बधाई देती हूं। कुछ ही घंटों में हमारा देश अपनी आज़ादी के 80वें वर्ष की शुभ शुरुआत का साक्षी बनेगा।'
राष्ट्र-निर्माण में सामूहिक भागीदारी का संदेश
राष्ट्रपति मुर्मु का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे कर रहा है — एक ऐसा पड़ाव जो राष्ट्रीय उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों पर विमर्श का भी अवसर है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति के संबोधन में किसी एक क्षेत्र को प्राथमिकता न देकर समाज के हर तबके को समान महत्व दिया गया — यह समावेशी राष्ट्र-निर्माण के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
उनका यह कथन कि 'हर वह नागरिक जो मौलिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है, वह देश-निर्माण में सक्रिय भागीदार है' — नागरिक उत्तरदायित्व की उस भावना को पुनर्जीवित करता है जो संविधान निर्माताओं ने परिकल्पित की थी। आने वाले दिनों में 80वें स्वतंत्रता दिवस के समारोह राष्ट्रीय राजधानी सहित पूरे देश में आयोजित होंगे।