राष्ट्रीय आम दिवस 22 जुलाई: 1987 से मनाया जा रहा यह पर्व, भारत में 1,000+ किस्में, कई को मिला जीआई टैग
सारांश
मुख्य बातें
हर वर्ष 22 जुलाई को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय आम दिवस की शुरुआत 1987 में भारत के राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने की थी — ताकि फलों के राजा आम के स्वाद, स्वास्थ्य लाभ और उसके सांस्कृतिक, सामाजिक एवं आर्थिक महत्व को सम्मान दिया जा सके। यह दिवस न केवल किसानों और जैव विविधता का उत्सव है, बल्कि भारत की कृषि-अर्थव्यवस्था की रीढ़ को भी रेखांकित करता है।
आम और भारतीय सभ्यता का अटूट नाता
आम केवल एक फल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति पूर्वोत्तर भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के क्षेत्रों में हुई। वेदों, पुराणों और महाकवि कालिदास की रचनाओं में 'आम्र' का उल्लेख मिलता है, जहाँ इसे जीवन, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक बताया गया है।
बौद्ध परंपरा में भी आम के उपवनों का विशेष स्थान है — किंवदंतियों के अनुसार भगवान बुद्ध ने एक आम के पेड़ के नीचे ध्यान लगाया था। 19वीं सदी के मध्य में जब अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर और मशहूर शायर मिर्ज़ा गालिब एक बाग में टहल रहे थे, तब गालिब की नज़र पके आमों से लदे एक पेड़ पर पड़ी। कहा जाता है कि बादशाह ने अगले ही दिन उन्हें बेहतरीन आमों की एक टोकरी भिजवाई। गालिब ने अपने जीवन में 63 प्रकार के आमों का स्वाद चखने का दावा किया था और अपनी रचनाओं में आम की भरपूर प्रशंसा की।
मुगलकाल से पुर्तगालियों तक: आम का वैश्विक सफर
मुगल सम्राट बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' में आम का उल्लेख किया है। उनके पोते सम्राट अकबर के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने बिहार के दरभंगा क्षेत्र में करीब एक लाख आम के पेड़ लगवाए, जो 'लाखी बाग' के नाम से जाना गया।
16वीं शताब्दी में भारत आए पुर्तगालियों ने गोवा में आम की ग्राफ्टिंग तकनीक को व्यापक रूप से अपनाया और विकसित किया, जिससे कई प्रसिद्ध किस्मों का विकास हुआ। बाद में पुर्तगाली और अरब व्यापारियों के माध्यम से आम अफ्रीका, ब्राज़ील और कैरेबियाई देशों तक पहुँचा।
1,000 से अधिक किस्में और जीआई टैग की पहचान
वर्तमान में भारत में आम की 1,000 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं। इनमें से कई किस्मों को उनके विशिष्ट स्वाद, गुणवत्ता और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त है।
देश की प्रमुख किस्मों में उत्तर प्रदेश का मलिहाबादी दशहरी, गुजरात का गिर केसर, वाराणसी का लंगड़ा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश का चौसा, महाराष्ट्र का अल्फोंसो और बागपत का रतौल शामिल हैं। बिहार के भागलपुर का जर्दालू आम दुनिया भर में प्रसिद्ध है और उसे भी जीआई टैग मिला हुआ है।
भारत: दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक
कृषि और अर्थव्यवस्था के लिहाज से भारत वैश्विक आम उत्पादन में 45 से 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में शामिल हैं।
पोषण की दृष्टि से आम फाइबर, विटामिन-सी, विटामिन-ए और एंटीऑक्सीडेंट का उत्कृष्ट स्रोत माना जाता है। एक मध्यम आकार का आम दैनिक फाइबर आवश्यकता का महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा कर सकता है, और इसमें संतरे की तुलना में अधिक मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है।
राष्ट्रीय आम दिवस हर वर्ष इस बात की याद दिलाता है कि आम भारत की मिट्टी, संस्कृति और अर्थव्यवस्था — तीनों से गहरे जुड़ा है, और इसकी विविधता को संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों की साझा जिम्मेदारी है।