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रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा 'आप' में शामिल, बोले — भगवंत मान के विजन से प्रभावित, कोई डील नहीं

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रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा 'आप' में शामिल, बोले — भगवंत मान के विजन से प्रभावित, कोई डील नहीं

सारांश

शिरोमणि अकाली दल से निष्कासित पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने 22 सितंबर को AAP की सदस्यता ली। CM भगवंत मान ने स्वयं उन्हें पार्टी में शामिल कराया। ब्रह्मपुरा ने किसी डील से इनकार किया और मान के विजन को अपने फैसले की वजह बताया।

मुख्य बातें

पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने 22 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में AAP की सदस्यता ग्रहण की।
शिरोमणि अकाली दल से निष्कासन के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया।
ब्रह्मपुरा ने किसी राजनीतिक डील से इनकार किया; कहा — यह 'व्यक्तिगत विश्वास' पर आधारित फैसला।
उनके पिता ने 70 साल तक SAD की सेवा की — 5 बार विधायक, 2 बार मंत्री, 1 बार सांसद रहे।
ब्रह्मपुरा ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता पर पास हुए विधानसभा बिल को AAP में आने की प्रमुख वजह बताया।
पिछली सरकारों पर ड्रग्स के मुद्दे पर निष्क्रियता का आरोप लगाया; मान सरकार के अभियान की सराहना की।

पूर्व विधायक रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा ने 22 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) की सदस्यता ग्रहण की। शिरोमणि अकाली दल (SAD) से निष्कासन के बाद ब्रह्मपुरा को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्वयं पार्टी में शामिल कराया। पार्टी में प्रवेश के तुरंत बाद ब्रह्मपुरा ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी राजनीतिक सौदेबाजी का नतीजा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित निर्णय है।

पारिवारिक इतिहास और अकाली दल से विदाई

ब्रह्मपुरा ने अपने परिवार की SAD से गहरी जड़ों का उल्लेख करते हुए कहा, 'मेरे पिता ने 70 साल तक शिरोमणि अकाली दल की सेवा की। वे पाँच बार विधायक, दो बार मंत्री और एक बार सांसद रहे। मैं भी विधायक बना। हमारे परिवार का एक शानदार इतिहास रहा है, लेकिन जो हो गया, सो हो गया।'

उन्होंने कहा कि अकाली दल के नेतृत्व ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया, जिसके बाद उन्होंने AAP में शामिल होने का निर्णय ले लिया था। उनके अनुसार, 'जब मैंने अकाली दल छोड़ा, तभी मैंने आप में शामिल होने का फैसला कर लिया था। मैं एक पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर शामिल हुआ हूँ।'

अकाली नेतृत्व पर आरोप

ब्रह्मपुरा ने शिरोमणि अकाली दल के मौजूदा नेतृत्व पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में सच बोलने वाले नेताओं को किनारे कर दिया जाता है। उनके शब्दों में, 'बात सिर्फ ब्रह्मपुरा परिवार या मेरे साथ किए गए व्यवहार की नहीं है। ऐसे कई परिवार हैं, जिन्हें उन्होंने बाहर का रास्ता दिखाया है। इस तरह के व्यवहार से परिवार का विकास नहीं होता।' उन्होंने कहा कि अकाली दल के नेतृत्व ने अपनी ही पार्टी को भारी नुकसान पहुँचाया है।

भगवंत मान के विजन से प्रभावित

AAP में शामिल होने की वजह स्पष्ट करते हुए ब्रह्मपुरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा, 'उनका विजन बहुत अच्छा है। उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता बहाल करने के लिए विधानसभा में एक बिल पास किया। मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इस बिल के बारे में फेसबुक पर पोस्ट किया था, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने पसंद किया।

ड्रग्स और गैंगस्टर समस्या पर रुख

पंजाब में ड्रग्स और गैंगस्टर की समस्या पर बात करते हुए ब्रह्मपुरा ने पिछली सरकारों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा, 'पिछली सरकारों ने ड्रग्स की समस्या खत्म करने का वादा तो किया, लेकिन कोई ठोस काम नहीं किया।' उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि AAP ने ड्रग्स के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है और उसमें बड़ी सफलता हासिल की है।

आगे का राजनीतिक समीकरण

यह ऐसे समय में आया है जब शिरोमणि अकाली दल पंजाब में अपनी राजनीतिक ज़मीन पुनः पाने के प्रयास में है। ब्रह्मपुरा जैसे अनुभवी नेताओं का पार्टी छोड़ना SAD के लिए झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि ब्रह्मपुरा परिवार का पंजाब की सिख राजनीति में लंबा और प्रभावशाली इतिहास रहा है, जिससे इस घटनाक्रम का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ जाता है। आने वाले समय में AAP इस राजनीतिक प्रवेश का किस प्रकार उपयोग करती है, यह देखना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शिरोमणि अकाली दल की उस आंतरिक टूट का प्रतीक है जो पिछले कुछ वर्षों में लगातार गहरी होती जा रही है। जिस परिवार ने सात दशक तक SAD की सेवा की, उसका इस तरह बाहर जाना पार्टी नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। AAP के लिए यह प्रवेश प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या ब्रह्मपुरा जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी को ग्रामीण सिख मतदाताओं तक पहुँचाने में ठोस योगदान देते हैं — या यह केवल एक राजनीतिक संकेत बनकर रह जाता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा कौन हैं और वे AAP में क्यों शामिल हुए?
रविंदर सिंह ब्रह्मपुरा पंजाब के पूर्व विधायक हैं, जिनके पिता 70 साल तक शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख नेता रहे। शिरोमणि अकाली दल से निष्कासन के बाद उन्होंने CM भगवंत मान के विजन से प्रभावित होकर AAP की सदस्यता ली।
क्या ब्रह्मपुरा का AAP में शामिल होना किसी डील का हिस्सा था?
ब्रह्मपुरा ने स्वयं किसी भी राजनीतिक डील से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित है और वे एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता के रूप में AAP में शामिल हुए हैं।
ब्रह्मपुरा को शिरोमणि अकाली दल से क्यों निकाला गया?
स्रोत में निष्कासन की विशिष्ट वजह का उल्लेख नहीं है। हालाँकि ब्रह्मपुरा ने आरोप लगाया कि SAD में 'सच बोलने वालों को किनारे कर दिया जाता है' और कई परिवारों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
भगवंत मान के किस काम से ब्रह्मपुरा प्रभावित हुए?
ब्रह्मपुरा ने विशेष रूप से श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता बहाल करने के लिए पंजाब विधानसभा में पास किए गए बिल का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ मान सरकार के अभियान की भी सराहना की।
ब्रह्मपुरा के AAP में शामिल होने से पंजाब की राजनीति पर क्या असर होगा?
एक प्रतिष्ठित सिख परिवार के नेता का SAD छोड़कर AAP में जाना अकाली दल के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह AAP की पंजाब में सिख राजनीतिक आधार को विस्तार देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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