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आरबीआई की बैलेंस शीट वित्त वर्ष 2026 में 20.6% बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़, सोने की होल्डिंग में 63.8% उछाल

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आरबीआई की बैलेंस शीट वित्त वर्ष 2026 में 20.6% बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़, सोने की होल्डिंग में 63.8% उछाल

सारांश

RBI की बैलेंस शीट वित्त वर्ष 2026 में एक साल में ₹15.72 लाख करोड़ बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़ पर पहुँची — वृद्धि दर पिछले साल की 8.2% से उछलकर 20.6% हुई। सोने की होल्डिंग 63.8% बढ़ी और सरकार को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ डिविडेंड मिलेगा।

मुख्य बातें

RBI की बैलेंस शीट 31 मार्च 2026 तक 20.6% बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़ पर पहुँची, जो वित्त वर्ष 2025 की 8.2% वृद्धि से कहीं अधिक है।
बैलेंस शीट अब भारत की GDP के 26.4 प्रतिशत के बराबर।
सोने की होल्डिंग 63.8% , घरेलू निवेश 44.9% और विदेशी निवेश 7.9% बढ़ा।
₹1,09,379.64 करोड़ कंटिजेंसी फंड में स्थानांतरित; एसेट डेवलपमेंट फंड में इस वर्ष कोई राशि नहीं।
केंद्र सरकार को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ डिविडेंड देने की घोषणा।
घरेलू परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 25.7% से बढ़कर 29.1% हुई।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की बैलेंस शीट 31 मार्च 2026 तक 20.6 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी के साथ ₹91.97 लाख करोड़ पर पहुँच गई — जो एक वर्ष पूर्व ₹76.25 लाख करोड़ थी। RBI की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, घरेलू निवेश, सोने की होल्डिंग और विदेशी निवेश में एक साथ आई तेज़ वृद्धि इस विस्तार की मुख्य वजह रही। यह रिपोर्ट 29 मई 2026 को जारी की गई।

मुख्य आँकड़े एक नज़र में

वित्त वर्ष 2026 में RBI की बैलेंस शीट में कुल ₹15.72 लाख करोड़ की निरपेक्ष बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025 की 8.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी से दोगुने से भी अधिक है, जो केंद्रीय बैंक की परिसंपत्तियों के तेज़ विस्तार का संकेत देती है।

वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, बैलेंस शीट अब देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 26.4 प्रतिशत के बराबर है। यह अनुपात केंद्रीय बैंक की अर्थव्यवस्था में बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित करता है।

परिसंपत्तियों की संरचना में बदलाव

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में घरेलू निवेश 44.9 प्रतिशत बढ़ा — तीनों प्रमुख श्रेणियों में सबसे तेज़ वृद्धि। सोने की होल्डिंग में 63.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जबकि विदेशी निवेश 7.9 प्रतिशत बढ़ा।

31 मार्च 2026 तक कुल परिसंपत्तियों में घरेलू परिसंपत्तियों की हिस्सेदारी 29.1 प्रतिशत हो गई, जो एक वर्ष पहले 25.7 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ, गोल्ड होल्डिंग और विदेशी संस्थानों को दिए गए ऋण मिलकर कुल परिसंपत्तियों का 70.9 प्रतिशत रहे, जो पिछले वर्ष 74.3 प्रतिशत था। गौरतलब है कि यह बदलाव दर्शाता है कि वित्त वर्ष 2026 में घरेलू परिसंपत्तियों की वृद्धि विदेशी परिसंपत्तियों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ रही।

देनदारियों का विस्तार

देनदारियों के मोर्चे पर, पुनर्मूल्यांकन खाते 63.4 प्रतिशत बढ़े — जो सोने और विदेशी परिसंपत्तियों के बाज़ार मूल्य में हुई वृद्धि को दर्शाता है। जारी नोटों में 11.8 प्रतिशत, जमा राशि में 11.6 प्रतिशत और अन्य देनदारियों में 21.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कंटिजेंसी फंड और रिकॉर्ड डिविडेंड

RBI ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान ₹1,09,379.64 करोड़ कंटिजेंसी फंड (आकस्मिक निधि) में स्थानांतरित किए। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान उसके इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के अंतर्गत किया गया है, जो कंटिजेंट रिस्क बफर को बैलेंस शीट के 4.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के बीच बनाए रखने की अनुमति देता है। हालाँकि, इस वर्ष एसेट डेवलपमेंट फंड में कोई राशि स्थानांतरित नहीं की गई।

इसी के साथ RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड देने की घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार, इस राशि से सरकार को पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न आर्थिक दबावों से निपटने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

RBI की बैलेंस शीट पिछले कुछ वर्षों में लगातार विस्तारित होती रही है। वित्त वर्ष 2023 के अंत में यह ₹63.45 लाख करोड़ थी, वित्त वर्ष 2024 में ₹70.47 लाख करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹76.25 लाख करोड़ हो गई। तीन वर्षों में यह ₹28.52 लाख करोड़ से अधिक बढ़ी है — और वित्त वर्ष 2026 की वृद्धि इस पूरी अवधि में सबसे तेज़ रही। यह विस्तार लिक्विडिटी ऑपरेशंस, रिज़र्व प्रबंधन और परिसंपत्ति संरचना में हुए बदलावों का संयुक्त परिणाम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ घरेलू परिसंपत्तियों और सोने की हिस्सेदारी में तेज़ वृद्धि विदेशी निर्भरता को संतुलित करने की कोशिश दर्शाती है। ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड डिविडेंड सरकार की राजकोषीय स्थिति के लिए राहत है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि क्या केंद्रीय बैंक के रिज़र्व पर बार-बार निर्भरता दीर्घकालिक राजकोषीय अनुशासन को कमज़ोर करती है। सोने की होल्डिंग में 63.8% की असाधारण वृद्धि वैश्विक अनिश्चितता के बीच RBI की 'हार्ड एसेट' रणनीति को उजागर करती है — एक रुझान जो अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंकों में भी देखा जा रहा है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026 में आरबीआई की बैलेंस शीट कितनी बढ़ी?
RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में बैलेंस शीट 20.6 प्रतिशत बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़ हो गई, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹76.25 लाख करोड़ थी। यह एक वर्ष में ₹15.72 लाख करोड़ की निरपेक्ष वृद्धि है।
आरबीआई की बैलेंस शीट इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ी?
घरेलू निवेश में 44.9%, सोने की होल्डिंग में 63.8% और विदेशी निवेश में 7.9% की वृद्धि इस विस्तार के मुख्य कारण रहे। इसके अलावा लिक्विडिटी ऑपरेशंस और रिज़र्व प्रबंधन ने भी योगदान दिया।
केंद्र सरकार को आरबीआई से कितना डिविडेंड मिलेगा?
RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड देने की घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार, यह राशि पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सरकार की मदद करेगी।
आरबीआई का कंटिजेंसी फंड क्या है और इसमें कितनी राशि डाली गई?
कंटिजेंसी फंड RBI का आकस्मिक निधि कोष है, जिसे इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क के तहत बैलेंस शीट के 4.5% से 7.5% के बीच बनाए रखा जाता है। वित्त वर्ष 2026 में इसमें ₹1,09,379.64 करोड़ स्थानांतरित किए गए।
आरबीआई की बैलेंस शीट पिछले चार वर्षों में कैसे बदली है?
वित्त वर्ष 2023 में ₹63.45 लाख करोड़ से शुरू होकर यह वित्त वर्ष 2024 में ₹70.47 लाख करोड़, वित्त वर्ष 2025 में ₹76.25 लाख करोड़ और वित्त वर्ष 2026 में ₹91.97 लाख करोड़ पर पहुँची। वित्त वर्ष 2026 की 20.6% वृद्धि इस पूरी अवधि में सबसे तेज़ रही।
राष्ट्र प्रेस
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