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डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया हुआ मजबूत, आरबीआई की डेडलाइन के नजदीक

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डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया हुआ मजबूत, आरबीआई की डेडलाइन के नजदीक

सारांश

आज भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की मजबूती के साथ खुला। यह प्रगति आरबीआई की डेडलाइन के कारण है, जबकि व्यापारी कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान सीजफायर की अनिश्चितता पर नजर रखे हुए हैं।

मुख्य बातें

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है।
आरबीआई की डेडलाइन 10 अप्रैल है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
आरबीआई के निर्देशों का पालन आवश्यक है।

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 10 पैसे की वृद्धि के साथ खुला। यह मजबूती भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों को अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन समाप्त (अनवाइंड) करने की डेडलाइन के नजदीक आने के कारण देखी गई। इसके साथ, व्यापारी अमेरिका-ईरान सीजफायर के संबंध में अनिश्चितता और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

आरंभिक कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.57 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि इसका पिछला बंद स्तर 92.66 था।

10 अप्रैल बैंकों के लिए ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) मार्केट में अपनी अतिरिक्त पोजीशन समाप्त करने की अंतिम तारीख है।

इससे पहले मार्च में, आरबीआई ने निर्देश दिया था कि बैंकों की रुपए में नेट ओपन पोजीशन हर कारोबारी दिन के अंत में 100 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि, कई बैंकों ने समय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय बैंक ने अपना रुख बरकरार रखा, जिसके चलते बैंकों को आर्बिट्रेज पोजीशन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

विश्लेषकों का कहना है कि जब तक आरबीआई के ओवरनाइट पोजीशन लिमिट पर स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि डेडलाइन के बाद रुपया में तेज गिरावट की आशंका शायद बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही है

इस बीच, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों और ट्रेडर्स के रडार पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.13 प्रतिशत अधिक है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड 1 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 99.24 डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, इससे पहले कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से करीब 20 प्रतिशत तक नीचे आ गई थीं।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कच्चे तेल के वायदा (20 अप्रैल) ने इंट्रा-डे में 9,222 रुपए का उच्च स्तर छुआ, जो 3.23 प्रतिशत या 289 रुपए की वृद्धि दर्शाता है।

इस हफ्ते की शुरुआत में, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि बैंकों के विदेशी मुद्रा पोजीशन पर लगाए गए प्रतिबंध और क्लाइंट्स को नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड देने पर रोक अस्थायी कदम हैं, जिनका उद्देश्य बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करना है।

उन्होंने यह भी बताया कि हाल के हफ्तों में विदेशी मुद्रा बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसका एक कारण बैंकों द्वारा किए गए आर्बिट्रेज ट्रेड्स भी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई की डेडलाइन क्या है?
आरबीआई ने बैंकों के लिए अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन समाप्त करने की डेडलाइन 10 अप्रैल तय की है।
रुपया डॉलर के मुकाबले कितना मजबूत हुआ?
रुपया लगभग 10 पैसे की बढ़त के साथ खुला है।
कच्चे तेल की कीमतों का क्या असर है?
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
क्या डॉलर के मुकाबले रुपया गिर सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि डेडलाइन के बाद रुपये में गिरावट की संभावना है।
आरबीआई के निर्देशों का क्या महत्व है?
आरबीआई के निर्देश बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को नियंत्रित करते हैं, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहे।
राष्ट्र प्रेस
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