सहारा की आंख: रिचैट संरचना का रहस्य, नासा ने किया खुलासा
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नई दिल्ली, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सहारा रेगिस्तान में स्थित एक रहस्यमय गोलाकार संरचना ने वर्षों से वैज्ञानिकों को चकित कर रखा है। हाल ही में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा की अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने उन्नत उपग्रह तकनीक से इस अद्वितीय भूवैज्ञानिक आकृति को स्पष्ट रूप से कैद किया है।
इसे रिचैट संरचना या 'सहारा की आंख' के रूप में जाना जाता है। यह उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के मॉरिटानिया में स्थित है। यह आकृति लगभग 40 किलोमीटर व्यास में फैली हुई है और ऊपर से देखने पर यह विशाल बैल की आंख या बटनहोल जैसी दिखाई देती है। पहले इसे उल्कापिंड के टकराने से बने गड्ढे समझा जाता था, लेकिन शोधों ने बताया कि यह एक प्राकृतिक भूवैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम है।
हाल ही में नासा के लैंडसैट 8 और 9 उपग्रहों ने मार्च 2026 में ली गई तस्वीरों में इस संरचना को और स्पष्टता से दिखाया है। इसके चारों ओर रंग-बिरंगे रेत के टीले, गहरी घाटियां और सूखी नदी धाराएं भी नजर आती हैं। यह संरचना पृथ्वी की सतह को आकार देने वाली भूवैज्ञानिक शक्तियों—जैसे उठाव, कटाव और आग्नेय गतिविधि—का बेहतरीन उदाहरण है। नासा की यह तस्वीर न केवल वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आम लोगों को भी पृथ्वी के अद्भुत इतिहास से जोड़ती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि रिचैट संरचना एक उठे हुए भूवैज्ञानिक गुंबद के रूप में बनी है। लाखों साल पहले, जमीन के नीचे से आग्नेय पदार्थ ऊपर आया, जिससे चट्टानी परतें ऊपर उठ गईं। समय के साथ, हवा, पानी और कटाव की प्रक्रिया ने इन परतों को अलग-अलग दर से घिसा। इससे केंद्र से बाहर की ओर फैलने वाली संकेंद्रित लकीरें बनीं, जिन्हें 'क्यूस्टा' कहा जाता है। नारंगी, भूरा और अन्य रंग विभिन्न प्रकार की तलछटी और आग्नेय चट्टानों का प्रतिनिधित्व करते हैं। केंद्र में पुरानी चट्टानें हैं, जबकि बाहरी छोर पर नई परतें देखी जाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया लाखों वर्षों में विकसित हुई। आज यह संरचना सहारा के विशाल रेगिस्तान में एक अनोखा दृश्य प्रस्तुत करती है।
रिचैट संरचना उत्तरी मॉरिटानिया के अद्रार पठार पर स्थित है। यह क्षेत्र प्राचीन पाषाण काल के औजारों, नवपाषाण काल की गुफा चित्रकारी और प्राचीन कारवां मार्गों के अवशेषों से भरा हुआ है। जमीन से देखने पर यह संरचना अधिक स्पष्ट नहीं होती, लेकिन अंतरिक्ष से यह साफ दिखाई देती है।
1930 के दशक में फ्रांसीसी भूगोलवेत्ताओं ने इसे पहली बार 'रिचैट बटनहोल' नाम दिया। नासा के एस्ट्रोनॉट्स एड व्हाइट और जेम्स मैकडिविट ने 1965 के जेमिनी IV मिशन के दौरान इसकी तस्वीरें लीं, जिसके बाद इसे 'सहारा की आंख' के नाम से विश्व स्तर पर जाना जाने लगा।