हर 6 साल में पृथ्वी के निकट आता है 'बेन्नू', एस्टेरॉयड के रहस्यों की खोज में वैज्ञानिक जुटे हैं
सारांश
Key Takeaways
- एस्टेरॉयड बेन्नू हर छह साल में पृथ्वी के निकट आता है।
- यह लगभग 500 मीटर चौड़ा है और कार्बन से भरपूर है।
- नासा ने 2023 में इसके नमूने पृथ्वी पर लाए।
- इसमें जीवन के लिए आवश्यक रसायन पाए गए हैं।
- बेन्नू का तापमान बहुत चरम है, जो जीवन के लिए उपयुक्त नहीं है।
नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। एस्टेरॉयड बेन्नू एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरिक्ष पिंड है, जो पृथ्वी के करीब से गुजरता है। हर छह साल में यह हमारे ग्रह से लगभग 3 लाख किलोमीटर यानी चंद्रमा से भी कम दूरी पर पहुँचता है।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स मिशन बेन्नू से नमूने इकट्ठा कर 2023 में पृथ्वी पर लाया था, जो वैज्ञानिकों को सौर मंडल के निर्माण और जीवन की उत्पत्ति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर रहा है। बेन्नू का व्यास लगभग 500 मीटर है और यह कार्बन से समृद्ध एक प्राचीन अवशेष है, जो लगभग 4.5 अरब साल पहले अस्तित्व में आया।
वैज्ञानिकों का मानना है कि सौर मंडल बनने के पहले 10 मिलियन साल में इसकी संरचना स्थापित हो चुकी थी। इसका पूर्व नाम 1999 आरक्यू36 था, लेकिन 2013 में उत्तरी कैरोलिना के एक 9 साल के बच्चे माइकल पुजियो ने नासा की प्रतियोगिता जीतकर इसे बेन्नू नाम दिया, जो प्राचीन मिस्र के एक देवता से प्रेरित है। बेन्नू सूरज के चारों ओर 1.2 साल में एक चक्कर लगाता है और खुद 4.3 घंटे में एक बार घूमता है। इसकी धुरी 175 डिग्री झुकी हुई है। यह मुख्य एस्टेरॉयड बेल्ट (मंगल और बृहस्पति के बीच) में बना था, लेकिन गुरुत्वाकर्षण और यार्कोव्स्की प्रभाव (सूर्य की रोशनी से लगने वाला हल्का बल) के कारण यह पृथ्वी के पास आ गया।
नासा से मिली जानकारी के अनुसार, इसकी सतह चट्टानों और बड़े पत्थरों से भरी हुई है। नासा का ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स यान जब 2018 में यहाँ पहुँचा, तो वैज्ञानिक चकित रह गए, क्योंकि दूर से यह चिकना दिखाई देता था। यह लट्टू के समान घूमता है और इसकी सतह पर उभरी लकीरें हैं। यान ने 2020 में बेन्नू से 121.6 ग्राम नमूना लिया, जो 24 सितंबर 2023 को पृथ्वी पर लाया गया।
इस नमूने की जांच से कई महत्वपूर्ण खोजों में मदद मिली, जैसे कि कार्बन, नाइट्रोजन और कई ऑर्गेनिक कंपाउंड जो जीवन के लिए आवश्यक रसायन हैं। इसमें 14 अमीनो एसिड, सभी 5 न्यूक्लियोबेस, राइबोज और ग्लूकोज जैसे शुगर, तथा फॉस्फेट जैसे पदार्थ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मैग्नीशियम-सोडियम फॉस्फेट और नमक वाले खनिज भी पाए गए हैं, जो संकेत करते हैं कि बेन्नू किसी पुराने महासागरीय ग्रह से टूटा हुआ है, जहाँ पानी था और वाष्पीकरण के कारण यहाँ नमक इकट्ठा हो गया। वैज्ञानिकों को नमूने में सुपरनोवा से आए धूल के कण और एक अनोखा गम जैसा पदार्थ भी मिला।
ये सब जीवन के निर्माण खंड हैं, जो यह दर्शाते हैं कि सौर मंडल के प्रारंभिक समय में जीवन की सामग्री हर जगह फैली हुई थी, संभवतः उल्कापिंडों के माध्यम से पृथ्वी पर आई। हालाँकि, बेन्नू पर स्वयं जीवन नहीं है, क्योंकि वहाँ का तापमान -100 से +116 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है और वहाँ कोई हवा या पानी नहीं है। हाल की खोजों से यह भी पता चला है कि बेन्नू के पत्थरों में दरारें हैं।