यूरेनस: धुंधले छल्लों और चांदों का रहस्य, 10 मार्च को मिली थी महत्वपूर्ण जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सौरमंडल का सातवां ग्रह यूरेनस अपने झुकाव के लिए जाना जाता है, जो लगभग 98 डिग्री के कोण पर है। यह सूर्य की परिक्रमा को एक गेंद की तरह लुढ़कते हुए करता हुआ नजर आता है। खगोलीय दृष्टि से, 10 मार्च का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज ही के दिन, 1977 में, वैज्ञानिकों ने यूरेनस के चारों ओर धुंधले छल्लों की खोज की थी। इस उपलब्धि ने इस ग्रह के रहस्यों को समझने में नया अध्याय जोड़ा।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा यूरेनस के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। यूरेनस सौर मंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है, जिसका इक्वेटोरियल व्यास 51,118 किलोमीटर है, जो पृथ्वी से लगभग चार गुना बड़ा है। यह सूर्य से लगभग 2.9 अरब किलोमीटर दूर है, जहाँ सूरज की रोशनी यहाँ पहुँचने में 2 घंटे 40 मिनट लगते हैं। इस ग्रह का एक दिन लगभग 17 घंटे का होता है, जबकि एक साल (सूरज का चक्कर) पूरा करने में 84 पृथ्वी वर्ष लगते हैं।
यूरेनस के अनोखे झुकाव के कारण यहाँ का मौसम भी अजीब है। हर 21 साल तक एक ध्रुव पर लगातार सूरज चमकता है, जबकि दूसरा ध्रुव 21 साल की अंधेरी सर्दी में रहता है। यूरेनस और वीनस, ये दोनों ग्रह ज्यादातर ग्रहों की उल्टी दिशा में घूमते हैं। यूरेनस के चारों ओर कुल 13 धुंधले छल्ले हैं, जिनमें से अधिकांश पतले और गहरे भूरे रंग के हैं। इनमें से कुछ छल्ले बारीक धूल की पट्टियों से घिरे हैं, जबकि दो बाहरी छल्ले लाल और नीले रंग के हैं।
इस ग्रह के 28 ज्ञात चांद हैं, जिनके नाम विलियम शेक्सपियर और अलेक्जेंडर पोप की कृतियों के किरदारों पर रखे गए हैं, जैसे टाइटेनिया, ओबेरॉन, और मिरांडा। अधिकांश चांद आधे पानी की बर्फ और आधे चट्टान से बने हैं। यूरेनस एक 'आइस जायंट' ग्रह है, जिसका अधिकांश हिस्सा पानी, मीथेन और अमोनिया के गर्म तरल रूप से बना है। यह सोलर सिस्टम का दूसरा सबसे कम घना ग्रह है, और मीथेन गैस के कारण यह नीला-हरा दिखाई देता है।
ग्रह का तापमान -224 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जो नेपच्यून से भी ठंडा है। यहाँ की हवाएँ 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुँच सकती हैं। इस ग्रह की कोई ठोस सतह नहीं है, यह ज्यादातर तरल रूप में घूमता है। इसलिए, स्पेसक्राफ्ट यहाँ उतर नहीं सकता और न ही सुरक्षित उड़ान भर सकता है।
1986 में वॉयेजर-2 ने यूरेनस का फ्लाईबाई किया था, जिससे इसकी छल्लों, चांदों और मौसम की जानकारी मिली। हाल के अवलोकनों में बादलों में तेज बदलाव देखे गए हैं। यूरेनस का चुंबकीय क्षेत्र भी अनोखा है, जो घूमने के अक्ष से 60 डिग्री झुका हुआ और केंद्र से ऑफसेट है। इस वजह से ऑरोरा भी ध्रुवों पर सीधे नहीं बनते। यहाँ जीवन की संभावना बहुत कम है, क्योंकि तापमान, दबाव और रसायन बहुत कठोर हैं।