महिला आरक्षण बिल के गिरने पर आरएलएम का महागठबंधन के खिलाफ बिहार में विरोध प्रदर्शन
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पटना, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) ने रविवार को यह जानकारी दी कि वह 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध मार्च का आयोजन करेगा।
यह विरोध महागठबंधन पार्टियों के उस कदम के खिलाफ होगा, जिसे आरएलएम ने 'निंदनीय कृत्य' करार दिया है। इन पार्टियों ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था।
यह स्थिति उस समय उत्पन्न हुई जब शुक्रवार को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 के लिए आवश्यक वोट नहीं मिलने के कारण गिर गया।
एनडीए की सहयोगी पार्टी आरएलएम ने एक बयान में कहा, "22 अप्रैल को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के कार्यकर्ता बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर उन पार्टियों के खिलाफ विरोध मार्च निकालेंगे, जिन्होंने संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध किया।"
आरएलएम ने कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के खिलाफ वोट देकर, कांग्रेस और महागठबंधन में उसके सहयोगियों ने 'देश की आधी आबादी यानी महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में प्रवेश पाने से प्रभावी रूप से रोक दिया है।' उन्होंने महिलाओं को उनके हक और अधिकारों से वंचित कर दिया है।
आरएलएम के प्रदेश प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने संवैधानिक अधिकारों और परिसीमन सुधारों का 'लगातार समर्थन' किया है।
सिन्हा ने कहा, "इससे पहले कि यह अभियान अपना लक्ष्य हासिल कर पाता, विपक्षी पार्टियों ने संसद में इसका विरोध करके इसे रोक दिया। अगर यह बिल कानून बन जाता तो बिहार में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ गई होती।"
उन्होंने आगे कहा कि यदि विपक्ष ने संसद में अपना सहयोग दिया होता तो महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटें मिल जातीं और वे सांसद तथा विधायक बन पातीं।
आरएलएम के प्रवक्ता ने कहा, "महागठबंधन के सांसदों ने ऐसा नहीं होने दिया। संसद में विपक्ष के इस रवैये के विरोध में राष्ट्रीय लोक मोर्चा 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध मार्च निकालेगा।"
इस बिल का उद्देश्य संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा। इससे सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी इंडिया गठबंधन के बीच तीखी राजनीतिक तकरार शुरू हो गई।
यह प्रस्तावित कानून, जिसका उद्देश्य सदन में सदस्यों की संख्या बढ़ाना भी था, पूरे दिन चली बहस के बावजूद संविधान के अनुसार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं प्राप्त कर सका।