25 अगस्त 2026
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महाकुंभ खर्च विवाद: साध्वी ऋतंभरा बोलीं — 'कुंभ देश की आध्यात्मिक एकता का प्रतीक, आर्थिक नजरिए से न आँकें'

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महाकुंभ खर्च विवाद: साध्वी ऋतंभरा बोलीं — 'कुंभ देश की आध्यात्मिक एकता का प्रतीक, आर्थिक नजरिए से न आँकें'

सारांश

साध्वी ऋतंभरा ने महाकुंभ के खर्च को 'आध्यात्मिक एकता की कीमत' बताते हुए आलोचकों को जवाब दिया — साथ ही भ्रष्टाचार को असली समस्या करार दिया और रक्षाबंधन पर ढाई लाख राखियाँ सीमा के जवानों तक पहुँचाने के अभियान की जानकारी दी।

मुख्य बातें

साध्वी ऋतंभरा ने 25 अगस्त को वृंदावन में महाकुंभ के खर्च का बचाव करते हुए कहा कि इसे केवल आर्थिक व्यय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने महाकुंभ को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक बताया, जहाँ विभिन्न संप्रदायों के लोग एकसाथ गंगा स्नान करते हैं।
साध्वी ने शिक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देने की बात कही और भ्रष्टाचार को देश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताया।
मुंबई गणपति उत्सव विवाद पर उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का आह्वान किया और असहमत लोगों को कड़ी चेतावनी दी।
रक्षाबंधन अभियान के तहत देशभर से ढाई लाख राखियाँ प्राप्त हुईं — प्रारंभिक लक्ष्य सवा लाख था — जो सीमा के जवानों तक पहुँचाई जाएँगी।

वृंदावन में 25 अगस्त को साध्वी ऋतंभरा ने महाकुंभ के आयोजन पर हुए भारी खर्च को लेकर उठ रहे सवालों का सीधा जवाब दिया और कहा कि कुंभ को केवल आर्थिक व्यय के चश्मे से देखना उचित नहीं है — यह भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का सबसे बड़ा प्रतीक है। उनके अनुसार, इस आयोजन में देश के विभिन्न संप्रदायों और वर्गों के लोग एकसाथ आते हैं, जिससे सामाजिक भेदभाव की दीवारें कमज़ोर होती हैं।

महाकुंभ के खर्च पर साध्वी का पक्ष

साध्वी ऋतंभरा ने स्पष्ट किया कि महाकुंभ में पूरे भारत की आध्यात्मिक शक्ति एक स्थान पर एकत्रित होती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एकसाथ गंगा स्नान करते हैं और स्वयं को एक विशाल सांस्कृतिक समुदाय का हिस्सा अनुभव करते हैं। उनके शब्दों में, 'ऐसे आयोजनों पर अगर अरबों रुपये भी खर्च होते हैं, तो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के संदर्भ में इसे केवल खर्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।'

उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग महाकुंभ पर खर्च किए गए धन को अन्यत्र लगाने की वकालत करते हैं, उन्हें पहले देश में भ्रष्टाचार और घोटालों को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी दिया ज़ोर

साध्वी ऋतंभरा ने एक संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए यह भी स्वीकार किया कि देश में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करना उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक विद्यार्थी को विद्यालय मिले, बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हों और बच्चों को उत्तम संस्कार दिए जाएँ — यह सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

भ्रष्टाचार पर साध्वी का निशाना

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि यदि सरकारी और सार्वजनिक धन के साथ किसी प्रकार की बेईमानी न हो और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगे, तो देश के विकास एवं जनकल्याण के लिए पर्याप्त संसाधन स्वतः उपलब्ध हो सकते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार को देश की खुशहाली के मार्ग में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बताया।

सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का आह्वान

मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान हुई घटना पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में साध्वी ऋतंभरा ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गणपति उत्सव, दुर्गा उत्सव, नवरात्रि, रामनवमी और दीपावली जैसे पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाते रहेंगे। उनके अनुसार, देश की सांस्कृतिक परंपराएँ भारत की पहचान का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्हें इन परंपराओं से आपत्ति हो, उन्हें देश में रहने को लेकर पुनर्विचार करना चाहिए — और इस संदर्भ में उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश का उल्लेख किया।

रक्षाबंधन अभियान: ढाई लाख राखियाँ सीमाओं तक पहुँचेंगी

साध्वी ऋतंभरा ने रक्षाबंधन से जुड़े अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार देशभर से करीब ढाई लाख राखियाँ प्राप्त हुई हैं, जबकि शुरुआत में केवल सवा लाख राखियों का संकल्प लिया गया था। उन्होंने कहा कि ये राखियाँ देश के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचाई जाएँगी, जहाँ बेटियाँ जाकर जवानों को राखी बाँधेंगी। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना समाज की ज़िम्मेदारी है — यह उनका स्पष्ट संदेश था।

गौरतलब है कि महाकुंभ के खर्च को लेकर विभिन्न तबकों में बहस जारी है और साध्वी ऋतंभरा का यह बयान उस बहस में एक महत्वपूर्ण धार्मिक-सामाजिक दृष्टिकोण जोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल प्रश्न का उत्तर नहीं देता कि खर्च की प्राथमिकताएँ क्या हों। उनका शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज़ोर सराहनीय है, परंतु इसे महाकुंभ खर्च के औचित्य के साथ एकसाथ रखना एक अंतर्विरोध उत्पन्न करता है जिसे वे स्वयं स्वीकार नहीं करतीं। सांस्कृतिक असहमति रखने वालों को देश छोड़ने की नसीहत देना लोकतांत्रिक विमर्श की सीमाओं को चुनौती देता है — यह वह कोण है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साध्वी ऋतंभरा ने महाकुंभ के खर्च के बारे में क्या कहा?
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि महाकुंभ को केवल आर्थिक खर्च के नज़रिए से नहीं आँका जाना चाहिए — यह भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उनके अनुसार, इस आयोजन में विभिन्न संप्रदायों के लोग एकसाथ आते हैं और सामाजिक भेदभाव की दीवारें टूटती हैं।
साध्वी ऋतंभरा ने भ्रष्टाचार को महाकुंभ विवाद से कैसे जोड़ा?
उन्होंने कहा कि जो लोग महाकुंभ के खर्च पर सवाल उठाते हैं, उन्हें पहले देश में भ्रष्टाचार और घोटालों को समाप्त करने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, यदि सरकारी धन की बेईमानी रुके तो विकास के लिए पर्याप्त संसाधन स्वतः उपलब्ध हो सकते हैं।
रक्षाबंधन अभियान में ढाई लाख राखियाँ कहाँ भेजी जाएँगी?
साध्वी ऋतंभरा के अनुसार, देशभर से प्राप्त करीब ढाई लाख राखियाँ देश के विभिन्न सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँचाई जाएँगी। वहाँ बेटियाँ जाकर सीमा के जवानों को राखी बाँधेंगी — यह प्रारंभिक लक्ष्य सवा लाख राखियों का था।
साध्वी ऋतंभरा ने गणपति उत्सव विवाद पर क्या कहा?
मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान हुई घटना पर साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएँ सदियों पुरानी हैं और इनका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गणपति उत्सव, नवरात्रि, दीपावली जैसे पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाए जाते रहेंगे।
साध्वी ऋतंभरा ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर क्या रुख अपनाया?
साध्वी ऋतंभरा ने महाकुंभ के बचाव के साथ-साथ यह भी कहा कि देश के हर बच्चे को विद्यालय और बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ मिलें — यह सरकार और समाज दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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