15 सितंबर 2026
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सागर नकली शराब कांड: NHRC सदस्य कानूनगो ने कहा — 7 मौतों का कारण अभी तक अनिश्चित

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सागर नकली शराब कांड: NHRC सदस्य कानूनगो ने कहा — 7 मौतों का कारण अभी तक अनिश्चित

सारांश

मध्य प्रदेश के सागर में नकली शराब कांड ने 7 जानें ली हैं — पर मौत का कारण अभी भी चिकित्सकीय रूप से अनिश्चित है। NHRC सदस्य कानूनगो ने पीड़ित परिवारों से मिलकर बड़े शराब माफिया पर कार्रवाई और दो दिनों में मुआवजे की माँग की।

मुख्य बातें

NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो ने 15 सितंबर 2026 को सागर जिले का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
जिला प्रशासन के अनुसार डॉक्टरों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की कि 7 लोगों की मौत नकली शराब के सेवन से हुई।
मृतकों के परिवारों को सरकार की ओर से ₹2 लाख , और जहाँ शराब-संबंध प्रमाणित हो वहाँ ₹4 लाख मुआवजा दिया जाएगा।
पुलिस ने 33 आरोपियों की पहचान की, जिनमें से 18 गिरफ्तार ; कई एजेंट अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि बड़े शराब माफिया के नाम बयानों में शामिल नहीं किए गए।
कानूनगो ने दो दिनों के भीतर मुआवजा वितरित करने और दोषी आपूर्तिकर्ताओं पर कार्रवाई का आग्रह किया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के सागर जिले का दौरा कर कहा कि नकली शराब कांड में सात लोगों की मौत का कारण अभी तक चिकित्सकीय रूप से पुष्ट नहीं हो पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन के अनुसार डॉक्टरों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि मृत्यु शराब के सेवन से हुई है या किसी अन्य कारण से।

मुख्य घटनाक्रम

यह मामला इसी महीने की शुरुआत में सागर जिले के बांदा-शाहगढ़ क्षेत्र के कई गाँवों में तब सामने आया, जब संदिग्ध नकली शराब के सेवन के बाद बड़ी संख्या में लोग अचानक बीमार पड़ गए। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में कुछ की मौत हो गई। मृतकों की संख्या को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है, क्योंकि जाँच के दौरान अलग-अलग आँकड़े सामने आए हैं।

पुलिस ने अब तक इस मामले में 33 आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से 18 को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच अवैध शराब की आपूर्ति और वितरण में शामिल संदिग्ध नेटवर्क पर केंद्रित है।

कानूनगो का दौरा और पीड़ित परिवारों से मुलाकात

कानूनगो ने सागर पहुँचकर पीड़ित परिवारों से सीधे मुलाकात की और उनकी शिकायतें सुनीं। इसके बाद उन्होंने घटना, जाँच की प्रगति और राहत उपायों की स्थिति जानने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के साथ एक अलग समीक्षा बैठक भी की।

उन्होंने घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि जाँच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने लोगों से इस त्रासदी का राजनीतिकरण न करने की अपील की, ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके और दोषियों को दंड मिल सके।

मुआवजा और राहत का ब्यौरा

कानूनगो ने बताया कि मृतकों के सातों परिवारों को सरकार की ओर से ₹2 लाख की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिन लोगों की मृत्यु का सीधा संबंध नकली शराब के सेवन से प्रमाणित होता है, उनके परिजनों को ₹4 लाख का मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि NHRC प्रशासन से आग्रह करेगा कि यह स्वीकृत राशि अगले दो दिनों के भीतर परिवारों तक पहुँचाई जाए।

परिवारों की शिकायत — बड़े माफिया पर कार्रवाई नहीं

कानूनगो ने बताया कि पीड़ित परिवार चल रही जाँच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। परिवारों का आरोप है कि बड़े शराब माफिया से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं के नाम उनके बयानों में शामिल नहीं किए गए और उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कुछ परिवारों ने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न गाँवों में शराब बेचने में शामिल कई एजेंट, मामले में गिरफ्तारी के बावजूद, अभी भी फरार हैं।

कानूनगो ने कहा कि उन्होंने पुलिस से ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में अवैध शराब की तस्करी पर रोक लगाने की माँग पहले से उठ रही है। NHRC की सक्रिय भूमिका से जाँच पर दबाव बढ़ेगा। अगले कुछ दिनों में चिकित्सकीय जाँच रिपोर्ट और मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उन्हें अभी भी यह नहीं बताया जा सका कि मौत का कारण क्या था — यह प्रशासनिक विफलता की नहीं, बल्कि जाँच-तंत्र की संरचनागत कमज़ोरी की निशानी है। मुआवजे की दो अलग-अलग श्रेणियाँ — ₹2 लाख और ₹4 लाख — खुद यह स्वीकार करती हैं कि राज्य को भी मौत के कारण पर भरोसा नहीं है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि बड़े शराब माफिया के नाम बयानों से क्यों गायब हैं — अगर यह चूक है तो जाँच की दिशा गलत है, और अगर जानबूझकर है तो जवाबदेही और गहरी है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सागर नकली शराब कांड क्या है?
यह मामला सितंबर 2026 के शुरुआत में मध्य प्रदेश के सागर जिले के बांदा-शाहगढ़ क्षेत्र में सामने आया, जब संदिग्ध नकली शराब के सेवन के बाद कई लोग बीमार पड़ गए और 7 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने 33 आरोपियों की पहचान की है और 18 को गिरफ्तार किया है।
NHRC सदस्य प्रियांक कानूनगो सागर क्यों गए?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने पीड़ित परिवारों से मिलने, मौत के कारण पर स्पष्टता जानने और राहत-मुआवजे की स्थिति की समीक्षा करने के लिए 15 सितंबर 2026 को सागर का दौरा किया। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस के साथ भी बैठक की।
पीड़ित परिवारों को कितना मुआवजा मिलेगा?
सरकार की ओर से मृतकों के सभी 7 परिवारों को ₹2 लाख की सहायता राशि दी जाएगी। जिन मौतों का सीधा संबंध नकली शराब के सेवन से चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित होता है, उनके परिवारों को ₹4 लाख मिलेंगे। NHRC ने यह राशि दो दिनों के भीतर वितरित करने का आग्रह किया है।
क्या मौत का कारण नकली शराब साबित हुआ है?
अभी तक नहीं। सागर जिला प्रशासन ने NHRC सदस्य को बताया कि डॉक्टरों ने अभी तक यह चिकित्सकीय पुष्टि नहीं की है कि इन सात लोगों की मौत शराब के सेवन से हुई है। मृतकों की संख्या को लेकर भी जाँच के दौरान अलग-अलग आँकड़े सामने आए हैं।
परिवारों की मुख्य शिकायतें क्या हैं?
पीड़ित परिवारों ने बताया कि बड़े शराब माफिया से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं के नाम उनके बयानों में शामिल नहीं किए गए और कई एजेंट अभी भी फरार हैं। परिवार चल रही जाँच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और दोषी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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