सागर नकली शराब कांड: NHRC सदस्य कानूनगो ने कहा — 7 मौतों का कारण अभी तक अनिश्चित
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के सागर जिले का दौरा कर कहा कि नकली शराब कांड में सात लोगों की मौत का कारण अभी तक चिकित्सकीय रूप से पुष्ट नहीं हो पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन के अनुसार डॉक्टरों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि मृत्यु शराब के सेवन से हुई है या किसी अन्य कारण से।
मुख्य घटनाक्रम
यह मामला इसी महीने की शुरुआत में सागर जिले के बांदा-शाहगढ़ क्षेत्र के कई गाँवों में तब सामने आया, जब संदिग्ध नकली शराब के सेवन के बाद बड़ी संख्या में लोग अचानक बीमार पड़ गए। कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में कुछ की मौत हो गई। मृतकों की संख्या को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है, क्योंकि जाँच के दौरान अलग-अलग आँकड़े सामने आए हैं।
पुलिस ने अब तक इस मामले में 33 आरोपियों की पहचान की है, जिनमें से 18 को गिरफ्तार किया जा चुका है। जाँच अवैध शराब की आपूर्ति और वितरण में शामिल संदिग्ध नेटवर्क पर केंद्रित है।
कानूनगो का दौरा और पीड़ित परिवारों से मुलाकात
कानूनगो ने सागर पहुँचकर पीड़ित परिवारों से सीधे मुलाकात की और उनकी शिकायतें सुनीं। इसके बाद उन्होंने घटना, जाँच की प्रगति और राहत उपायों की स्थिति जानने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के साथ एक अलग समीक्षा बैठक भी की।
उन्होंने घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि जाँच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने लोगों से इस त्रासदी का राजनीतिकरण न करने की अपील की, ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके और दोषियों को दंड मिल सके।
मुआवजा और राहत का ब्यौरा
कानूनगो ने बताया कि मृतकों के सातों परिवारों को सरकार की ओर से ₹2 लाख की सहायता राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिन लोगों की मृत्यु का सीधा संबंध नकली शराब के सेवन से प्रमाणित होता है, उनके परिजनों को ₹4 लाख का मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि NHRC प्रशासन से आग्रह करेगा कि यह स्वीकृत राशि अगले दो दिनों के भीतर परिवारों तक पहुँचाई जाए।
परिवारों की शिकायत — बड़े माफिया पर कार्रवाई नहीं
कानूनगो ने बताया कि पीड़ित परिवार चल रही जाँच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। परिवारों का आरोप है कि बड़े शराब माफिया से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं के नाम उनके बयानों में शामिल नहीं किए गए और उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कुछ परिवारों ने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न गाँवों में शराब बेचने में शामिल कई एजेंट, मामले में गिरफ्तारी के बावजूद, अभी भी फरार हैं।
कानूनगो ने कहा कि उन्होंने पुलिस से ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में अवैध शराब की तस्करी पर रोक लगाने की माँग पहले से उठ रही है। NHRC की सक्रिय भूमिका से जाँच पर दबाव बढ़ेगा। अगले कुछ दिनों में चिकित्सकीय जाँच रिपोर्ट और मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।