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सलमान खान फायरिंग केस: अनमोल बिश्नोई ने माँगा प्रोडक्शन वारंट, कोर्ट ने स्पेशल पीपी से रिपोर्ट तलब की

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सलमान खान फायरिंग केस: अनमोल बिश्नोई ने माँगा प्रोडक्शन वारंट, कोर्ट ने स्पेशल पीपी से रिपोर्ट तलब की

सारांश

सलमान खान फायरिंग केस में नया मोड़ — तिहाड़ जेल में बंद अनमोल बिश्नोई ने खुद ट्रायल में शामिल होने के लिए प्रोडक्शन वारंट माँगा है। अदालत ने स्पेशल पीपी से रिपोर्ट तलब की है और अगली सुनवाई 15 जुलाई के आसपास होने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

अनमोल बिश्नोई ने तिहाड़ जेल से सलमान खान फायरिंग केस में प्रोडक्शन वारंट के लिए अर्जी दी है।
अनमोल बिश्नोई सुनवाई में शारीरिक रूप से या वर्चुअली पेश होना चाहते हैं।
अदालत ने याचिका पर विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) से रिपोर्ट माँगी है।
इस मामले में अब तक चार गवाहों की जाँच पूरी हो चुकी है; पिछली सुनवाई 20 मई को हुई थी।
अनमोल बिश्नोई फिलहाल NIA के एक अलग मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं।
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2025 के आसपास होने की संभावना है।

पुणे की एक अदालत ने सलमान खान फायरिंग केस में आरोपी अनमोल बिश्नोई की याचिका पर विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) से रिपोर्ट माँगी है। अनमोल बिश्नोई ने तिहाड़ जेल से प्रोडक्शन वारंट के लिए अर्जी दायर की है, जिसमें उन्होंने इस मामले की सुनवाई के दौरान शारीरिक रूप से या वर्चुअली पेश होने की माँग की है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2025 के आसपास होने की संभावना है।

याचिका की पृष्ठभूमि

बचाव पक्ष के वकील अजिंक्य मिरगल ने बताया कि इस मामले में पिछली गवाही 20 मई को हुई थी, जिसके बाद अगले गवाह के लिए 1 जुलाई की तारीख निर्धारित की गई थी। इसी बीच 23 जून को अनमोल बिश्नोई के वकीलों ने अदालत में आवेदन दायर कर प्रोडक्शन वारंट जारी करने की माँग की।

गौरतलब है कि अनमोल बिश्नोई फिलहाल तिहाड़ जेल में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के एक अलग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। इसी कारण उन्हें अब तक सलमान खान से जुड़े इस मामले में अदालत के समक्ष पेश नहीं किया जा सका है।

अब तक की सुनवाई की स्थिति

मिरगल के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल चार गवाहों की जाँच पूरी हो चुकी है। आगे जैसे-जैसे अभियोजन पक्ष नए गवाह पेश करेगा, बचाव पक्ष उनका प्रति-परीक्षण (क्रॉस एग्जामिनेशन) करेगा। अनमोल बिश्नोई इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहते हैं।

कानूनी प्रक्रिया क्या कहती है

वकील मिरगल ने स्पष्ट किया कि जब किसी मामले में ट्रायल पहले से चल रहा हो और कोई फरार या वांछित आरोपी बाद में गिरफ्तार होकर लाया जाए या स्वयं पेश हो, तो उस पर पहले अतिरिक्त आरोप लगाए जाते हैं। इसके बाद पूरक आरोप-पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल की जाती है और उसे चल रहे ट्रायल में शामिल किया जाता है। हालांकि, किसी नए आरोपी के शामिल होने से पहले से चल रही सुनवाई पर रोक नहीं लगाई जाती।

आगे क्या होगा

अदालत द्वारा स्पेशल पीपी से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद याचिका पर अगला निर्णय लिया जाएगा। यह मामला बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के मुंबई स्थित आवास के बाहर हुई कथित फायरिंग की घटना से जुड़ा है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था। अनमोल बिश्नोई, लॉरेंस बिश्नोई के भाई बताए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो गवाहों के क्रॉस एग्जामिनेशन को प्रभावित कर सके। यह ऐसे समय में आया है जब NIA मामले में उनकी हिरासत पहले से ही जटिल कानूनी स्थिति बना रही है। सवाल यह है कि अदालत प्रोडक्शन वारंट देती है या वर्चुअल उपस्थिति को पर्याप्त मानती है — यह निर्णय इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल की गति तय करेगा।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनमोल बिश्नोई ने सलमान खान केस में प्रोडक्शन वारंट क्यों माँगा है?
अनमोल बिश्नोई तिहाड़ जेल में NIA के एक अलग मामले में बंद हैं और उन्हें अब तक सलमान खान फायरिंग केस की सुनवाई में पेश नहीं किया गया है। वे इस ट्रायल में शारीरिक रूप से या वर्चुअली उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना चाहते हैं।
सलमान खान फायरिंग केस में अब तक क्या हुआ है?
इस मामले में अब तक चार गवाहों की जाँच पूरी हो चुकी है। पिछली गवाही 20 मई को हुई थी और अगले गवाह के लिए 1 जुलाई की तारीख थी। अनमोल बिश्नोई के वकीलों ने 23 जून को प्रोडक्शन वारंट के लिए आवेदन किया।
अदालत ने अनमोल बिश्नोई की याचिका पर क्या कदम उठाया?
अदालत ने याचिका पर विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पीपी) से रिपोर्ट माँगी है। स्पेशल पीपी की रिपोर्ट आने के बाद ही अदालत प्रोडक्शन वारंट पर अपना निर्णय सुनाएगी।
मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
बचाव पक्ष के वकील अजिंक्य मिरगल के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2025 के आसपास होने की संभावना है।
यदि कोई नया आरोपी चल रहे ट्रायल में शामिल होता है तो कानूनी प्रक्रिया क्या होती है?
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, पहले नए आरोपी पर अतिरिक्त आरोप लगाए जाते हैं, फिर पूरक आरोप-पत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल की जाती है और उसे चल रहे ट्रायल में शामिल किया जाता है। नए आरोपी के शामिल होने से पहले से चल रही सुनवाई नहीं रोकी जाती।
राष्ट्र प्रेस
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