अमित शाह के नक्सलवाद खात्मे के दावे पर टीएस सिंह देव का पलटवार: '31 मार्च 2026 की डेडलाइन गुज़र गई'

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अमित शाह के नक्सलवाद खात्मे के दावे पर टीएस सिंह देव का पलटवार: '31 मार्च 2026 की डेडलाइन गुज़र गई'

सारांश

छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने एक साथ चार मोर्चों पर केंद्र सरकार को घेरा — नक्सलवाद की 31 मार्च 2026 की डेडलाइन, यूपी का 'बुलडोजर राज', मोदी की विदेश यात्राओं की उपयोगिता, और होर्मुज संकट से उपजा कच्चे तेल का खतरा।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने 19 मई 2026 को रायपुर में गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलवाद खात्मे के दावे को 'केवल मनोबल बढ़ाने वाला' बताया।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद उन्मूलन की 31 मार्च 2026 की सरकारी समयसीमा बीत चुकी है, लेकिन सभी नक्सली मुख्यधारा में नहीं लौटे।
यूपी पुलिस मुठभेड़ के आँकड़ों पर उन्होंने 'बुलडोजर राज' को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया।
होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और देश का भंडार लगभग समाप्त होने पर गंभीर चिंता जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनका ठोस कूटनीतिक लाभ स्पष्ट नहीं है।

छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने 19 मई 2026 को रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नक्सलवाद में कमी वाले बयान को 'मनोबल बढ़ाने वाला' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गृह मंत्री द्वारा नक्सलवाद उन्मूलन के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की समयसीमा बीत चुकी है, और सभी नक्सली मुख्यधारा में नहीं लौटे हैं।

नक्सलवाद पर अमित शाह के दावे पर सवाल

सिंह देव ने कहा, 'वह गृह मंत्री हैं, और वह ऐसे बयान या तो लोगों का मनोबल बनाए रखने के लिए दे रहे हैं या फिर असलियत बताने के लिए।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कुछ समय पहले मीडिया में एक खबर आई थी जिसमें नक्सलियों की ओर से जारी एक पत्र का उल्लेख था, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि उनके साथ धोखा हुआ है और वे बातचीत जारी रखेंगे। उनके अनुसार, 31 मार्च 2026 की सरकारी डेडलाइन समाप्त हो चुकी है, लेकिन नक्सल समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हुआ।

यूपी पुलिस मुठभेड़ पर तीखी प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश पुलिस मुठभेड़ के आँकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह देव ने कहा कि 'बुलडोजर राज' को लागू करने के दुष्परिणाम समाज में अनिवार्य रूप से सामने आते हैं। उन्होंने कहा, 'आप कानून के ऊपर काम कर रहे हैं, इससे बचने की जरूरत है। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में इससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है?' उनके अनुसार, संविधान-प्रदत्त कानूनी ढाँचे को तोड़कर कार्य करना, चाहे उसे लोक-कल्याण के नाम पर उचित ठहराया जाए, अंततः सामाजिक व्यवस्था को खंडित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं पर सवाल

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन यात्राओं का परिणाम यह रहता है कि अमेरिका तय करता है कि भारत को सामान कहाँ से खरीदना है। उन्होंने कहा, 'अगर पीएम मोदी के विदेश दौरों का नतीजा ऐसा निकल रहा है तो देश को लाभ कहाँ हो रहा है?' सिंह देव ने यह भी कहा कि जब भारतीय नागरिकों को अमेरिका से हथकड़ी और बेड़ियों में वापस भेजा जाता है, तो ऐसे कूटनीतिक संवाद की सार्थकता पर प्रश्नचिह्न लगता है।

ईंधन संकट और कच्चे तेल की आपूर्ति पर चिंता

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर सिंह देव ने कहा कि स्थिति चिंताजनक है और इसके और गंभीर होने की आशंका है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि इस मार्ग से कच्चे तेल के जहाज नहीं निकल पा रहे हैं और देश में संग्रहित कच्चा तेल लगभग समाप्त हो चुका है। उनके अनुसार, 'सरकार की असली विफलता पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना नहीं, बल्कि कच्चे तेल की वैकल्पिक व्यवस्था न कर पाना है।' उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने अन्य देशों से संबंध सीमित कर दिए हैं, जिसके कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो रही है।

आगे क्या

सिंह देव के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में नक्सल-विरोधी अभियान जारी हैं और केंद्र सरकार नक्सलवाद के खात्मे का दावा कर रही है। आलोचकों का कहना है कि सरकार की समयसीमा और ज़मीनी हकीकत के बीच का अंतर अभी भी स्पष्ट है। यह देखना होगा कि सरकार इन सवालों का जवाब किस नीतिगत कदम से देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भेद अक्सर धुंधला हो जाता है। होर्मुज संकट वाला तर्क अधिक ठोस है — कच्चे तेल की वैकल्पिक आपूर्ति शृंखला बनाने में विफलता एक नीतिगत प्रश्न है जिसका उत्तर विदेश दौरों की संख्या से नहीं, बल्कि ऊर्जा कूटनीति के परिणामों से मिलना चाहिए।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएस सिंह देव ने अमित शाह के नक्सलवाद बयान पर क्या कहा?
टीएस सिंह देव ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का नक्सलवाद में कमी वाला बयान या तो लोगों का मनोबल बनाए रखने के लिए है या असलियत बताने के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद खात्मे की 31 मार्च 2026 की सरकारी समयसीमा बीत चुकी है और सभी नक्सली मुख्यधारा में नहीं लौटे हैं।
नक्सलवाद उन्मूलन की सरकारी डेडलाइन क्या थी और क्या वह पूरी हुई?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की थी। कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव के अनुसार यह समयसीमा बीत चुकी है, लेकिन नक्सल समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हुआ है।
यूपी पुलिस मुठभेड़ पर सिंह देव का क्या रुख है?
टीएस सिंह देव ने यूपी पुलिस मुठभेड़ के आँकड़ों को 'बुलडोजर राज' से जोड़ते हुए कहा कि कानून से ऊपर उठकर काम करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता है। उनके अनुसार संविधान-प्रदत्त कानूनी ढाँचे को तोड़ना, चाहे लोक-कल्याण के नाम पर हो, अंततः सामाजिक व्यवस्था को नष्ट करता है।
होर्मुज स्ट्रेट संकट का भारत की ईंधन कीमतों पर क्या असर है?
टीएस सिंह देव के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल के जहाज नहीं निकल पा रहे हैं और देश का संग्रहित कच्चा तेल लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग नहीं खोजा गया तो कच्चे तेल के दाम और बढ़ेंगे, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें और ऊपर जाएंगी।
मोदी की विदेश यात्राओं पर कांग्रेस की क्या आपत्ति है?
कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं का परिणाम यह रहता है कि अमेरिका तय करता है कि भारत सामान कहाँ से खरीदे। उन्होंने भारतीय नागरिकों को हथकड़ी-बेड़ियों में अमेरिका से वापस भेजे जाने और ईरान-रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति में आ रही बाधाओं का हवाला देते हुए इन यात्राओं की कूटनीतिक उपयोगिता पर सवाल उठाया।
राष्ट्र प्रेस
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