कीर्ति चक्र से सम्मानित सुनील कुमार पर मौलाना सैफ अब्बास बोले — 'शहीदों को जितना सम्मान दें, कम है'
सारांश
मुख्य बातें
शिया मरकजी चांद कमिटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने 15 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) के इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश की सेवा में अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीदों को कितना भी सम्मान दिया जाए, वह कम ही रहेगा। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों और सैनिकों के बलिदान को राष्ट्र एवं समाज के प्रति सर्वोच्च कुर्बानी बताया।
शहादत व्यक्तिगत नहीं, राष्ट्रीय कुर्बानी है
मौलाना सैफ अब्बास ने स्पष्ट किया कि चाहे सेना का कोई अधिकारी हो या पुलिस का कोई सिपाही — जब वह अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए शहीद होता है, तो उसकी शहादत केवल उसके परिवार का दुख नहीं रह जाती। उन्होंने कहा, 'ये जवान देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए सौंपी गई ज़िम्मेदारी निभाते हुए अपनी जान कुर्बान करते हैं। ऐसे शहीदों को जितना भी सम्मान दिया जाए, वह कम है।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी परिवार के मुखिया, बेटे या पिता के चले जाने से जो रिक्तता आती है, उसे न धन से भरा जा सकता है और न किसी पुरस्कार से। सरकारी आर्थिक सहायता और सम्मान के बावजूद प्रियजन को खोने का दर्द अपनी जगह बना रहता है।
सम्मान से परिवार और जवानों का मनोबल बढ़ता है
मौलाना अब्बास ने कहा कि कीर्ति चक्र जैसे राष्ट्रीय सम्मान शहीद के परिवार को भावनात्मक सहारा देते हैं। जब किसी शहीद को पदक मिलता है, तो परिवार के भीतर यह विश्वास मजबूत होता है कि उनके प्रियजन की कुर्बानी को राष्ट्र ने याद रखा है। उन्होंने कहा कि इससे परिवार में जोश और हौसला पैदा होता है, साथ ही ड्यूटी पर तैनात अन्य जवानों का भी मनोबल ऊँचा रहता है।
उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष सम्मान व्यवस्था की माँग
मौलाना सैफ अब्बास ने उत्तर प्रदेश सरकार से माँग की कि राज्य स्तर पर भी शहीद पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए एक विशेष पदक या सम्मान योजना शुरू की जाए। उनका सुझाव था कि यदि वर्ष के दौरान कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी निभाते हुए शहीद होता है, तो राज्य सरकार की ओर से भी उसके नाम पर विशेष सम्मान प्रदान किया जाए।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कई सुरक्षाकर्मियों को वीरता पुरस्कारों से नवाज़ा है। मौलाना अब्बास की यह माँग राज्य-स्तरीय सम्मान तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक आवाज़ मानी जा रही है।
शहीद परिवारों को भावनात्मक सहारे की ज़रूरत
मौलाना अब्बास ने कहा कि शहीद परिवार अपने प्रियजन को खोने के बाद स्वाभाविक रूप से गहरे दुख में होते हैं। ऐसे समय में सरकार और समाज की ओर से मिलने वाला सम्मान उनके लिए केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक वास्तविक भावनात्मक आधार बन सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस तरह की पहल से यह संदेश जाता है कि राष्ट्र अपने रक्षकों का बलिदान नहीं भूलता।