15 अगस्त 2026
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कीर्ति चक्र से सम्मानित सुनील कुमार पर मौलाना सैफ अब्बास बोले — 'शहीदों को जितना सम्मान दें, कम है'

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कीर्ति चक्र से सम्मानित सुनील कुमार पर मौलाना सैफ अब्बास बोले — 'शहीदों को जितना सम्मान दें, कम है'

सारांश

यूपी एसटीएफ इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र मिलने पर मौलाना सैफ अब्बास की भावनात्मक प्रतिक्रिया — शहीदों का सम्मान राष्ट्रीय कर्तव्य है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से राज्य-स्तरीय विशेष शहीद पदक योजना शुरू करने की माँग।

मुख्य बातें

यूपी एसटीएफ इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि शहीदों को जितना सम्मान दिया जाए, वह कम है — शहादत व्यक्तिगत नहीं, राष्ट्रीय कुर्बानी है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से ड्यूटी में शहीद होने वाले पुलिसकर्मियों के लिए राज्य-स्तरीय विशेष पदक योजना शुरू करने की माँग की।
मौलाना अब्बास ने कहा कि सम्मान से शहीद परिवारों को भावनात्मक सहारा मिलता है और अन्य जवानों का मनोबल भी बढ़ता है।
यह माँग 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार द्वारा वीरता पुरस्कार घोषित किए जाने के संदर्भ में आई।

शिया मरकजी चांद कमिटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास ने 15 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) के इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश की सेवा में अपनी जान न्यौछावर करने वाले शहीदों को कितना भी सम्मान दिया जाए, वह कम ही रहेगा। उन्होंने शहीद पुलिसकर्मियों और सैनिकों के बलिदान को राष्ट्र एवं समाज के प्रति सर्वोच्च कुर्बानी बताया।

शहादत व्यक्तिगत नहीं, राष्ट्रीय कुर्बानी है

मौलाना सैफ अब्बास ने स्पष्ट किया कि चाहे सेना का कोई अधिकारी हो या पुलिस का कोई सिपाही — जब वह अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए शहीद होता है, तो उसकी शहादत केवल उसके परिवार का दुख नहीं रह जाती। उन्होंने कहा, 'ये जवान देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए सौंपी गई ज़िम्मेदारी निभाते हुए अपनी जान कुर्बान करते हैं। ऐसे शहीदों को जितना भी सम्मान दिया जाए, वह कम है।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी परिवार के मुखिया, बेटे या पिता के चले जाने से जो रिक्तता आती है, उसे न धन से भरा जा सकता है और न किसी पुरस्कार से। सरकारी आर्थिक सहायता और सम्मान के बावजूद प्रियजन को खोने का दर्द अपनी जगह बना रहता है।

सम्मान से परिवार और जवानों का मनोबल बढ़ता है

मौलाना अब्बास ने कहा कि कीर्ति चक्र जैसे राष्ट्रीय सम्मान शहीद के परिवार को भावनात्मक सहारा देते हैं। जब किसी शहीद को पदक मिलता है, तो परिवार के भीतर यह विश्वास मजबूत होता है कि उनके प्रियजन की कुर्बानी को राष्ट्र ने याद रखा है। उन्होंने कहा कि इससे परिवार में जोश और हौसला पैदा होता है, साथ ही ड्यूटी पर तैनात अन्य जवानों का भी मनोबल ऊँचा रहता है।

उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष सम्मान व्यवस्था की माँग

मौलाना सैफ अब्बास ने उत्तर प्रदेश सरकार से माँग की कि राज्य स्तर पर भी शहीद पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए एक विशेष पदक या सम्मान योजना शुरू की जाए। उनका सुझाव था कि यदि वर्ष के दौरान कोई पुलिसकर्मी ड्यूटी निभाते हुए शहीद होता है, तो राज्य सरकार की ओर से भी उसके नाम पर विशेष सम्मान प्रदान किया जाए।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कई सुरक्षाकर्मियों को वीरता पुरस्कारों से नवाज़ा है। मौलाना अब्बास की यह माँग राज्य-स्तरीय सम्मान तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक आवाज़ मानी जा रही है।

शहीद परिवारों को भावनात्मक सहारे की ज़रूरत

मौलाना अब्बास ने कहा कि शहीद परिवार अपने प्रियजन को खोने के बाद स्वाभाविक रूप से गहरे दुख में होते हैं। ऐसे समय में सरकार और समाज की ओर से मिलने वाला सम्मान उनके लिए केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक वास्तविक भावनात्मक आधार बन सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस तरह की पहल से यह संदेश जाता है कि राष्ट्र अपने रक्षकों का बलिदान नहीं भूलता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राज्य-स्तरीय सम्मान तंत्र अक्सर अनौपचारिक और असंगत रहता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहाँ पुलिस बल लाखों में है और मुठभेड़ें आम हैं, एक संस्थागत राज्य शहीद पदक की माँग तर्कसंगत और समयोचित है। सवाल यह है कि सरकार इसे नीति में बदलती है या यह माँग भी अन्य घोषणाओं की तरह अनसुनी रह जाती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एसटीएफ इंस्पेक्टर सुनील कुमार को कीर्ति चक्र क्यों मिला?
इंस्पेक्टर सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, जो ड्यूटी के दौरान दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान की मान्यता है। यह पुरस्कार 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर घोषित किया गया।
मौलाना सैफ अब्बास कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
मौलाना सैफ अब्बास शिया मरकजी चांद कमिटी के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि शहीद पुलिसकर्मियों और सैनिकों को जितना सम्मान दिया जाए वह कम है, क्योंकि उनकी शहादत व्यक्तिगत नहीं बल्कि राष्ट्रीय कुर्बानी होती है।
मौलाना सैफ अब्बास ने उत्तर प्रदेश सरकार से क्या माँग की?
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से माँग की कि राज्य स्तर पर भी शहीद पुलिसकर्मियों के लिए एक विशेष पदक या सम्मान योजना शुरू की जाए। उनका कहना था कि इससे शहीद परिवारों को प्रोत्साहन मिलेगा और ड्यूटी पर तैनात जवानों का मनोबल भी बढ़ेगा।
क्या शहीद परिवारों को सम्मान देना ज़रूरी है?
मौलाना अब्बास के अनुसार, आर्थिक सहायता और पुरस्कार प्रियजन को खोने के दर्द की भरपाई नहीं कर सकते, लेकिन ये परिवार का मनोबल बढ़ाते हैं। इससे परिवार को यह एहसास होता है कि राष्ट्र ने उनके बलिदान को याद रखा है।
कीर्ति चक्र क्या होता है?
कीर्ति चक्र भारत का दूसरा सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार है, जो युद्धेतर परिस्थितियों में असाधारण वीरता के लिए दिया जाता है। यह सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिसकर्मियों को प्रदान किया जा सकता है, और मरणोपरांत भी दिया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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