शताब्दी एक्सप्रेस पथराव की मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने निंदा की, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने फिरोजाबाद के पास लखनऊ-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस पर हुए पथराव की कड़ी निंदा की है — वह कोच जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत यात्रा कर रहे थे। उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और जाँच के लिए एक समिति गठित करने की माँग की है। इस घटना में मोहन भागवत को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुँचा।
मौलाना अब्बास का बयान
मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने कहा, 'भारत के एक बड़े संगठन के सरसंघचालक मोहन भागवत को इस घटना का सामना करना पड़ा है और मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ। मेरा मानना है कि इस मामले की जाँच के लिए जल्द से जल्द एक कमेटी बनाई जानी चाहिए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएँ देश और समाज दोनों के लिए हानिकारक हैं।
घटना का विवरण
12 जून को फिरोजाबाद रेलवे स्टेशन के निकट लखनऊ-दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस के एक कोच पर पत्थर फेंके गए। उस कोच में RSS प्रमुख मोहन भागवत सवार थे। अधिकारियों के अनुसार, घटना में भागवत को कोई चोट नहीं आई, परंतु मामले की जाँच जारी है। यह ऐसे समय में हुआ जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है।
गाजियाबाद में जिम ट्रेनरों के पुलिस वेरिफिकेशन पर प्रतिक्रिया
मौलाना सैयद सैफ अब्बास ने गाजियाबाद जिला प्रशासन के उस आदेश की भी सराहना की जिसमें सभी जिम ट्रेनरों के लिए पुलिस वेरिफिकेशन और पहचान-पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा, 'गाजियाबाद के जिलाधिकारी का यह आदेश एक बहुत अच्छा कदम है। आज के हालात में यह जानना जरूरी है कि सही लोग कौन हैं और गलत कौन। इस आदेश से समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और आपसी दुश्मनी की घटनाओं में भी कमी आएगी।'
प्रशासन का कदम
गाजियाबाद जिला प्रशासन ने जिले में संचालित सभी जिमों में कार्यरत ट्रेनरों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य संदिग्ध तत्वों की पहचान करना और नागरिक सुरक्षा को मजबूत करना है। यह आदेश जिले के सभी जिम संचालकों पर समान रूप से लागू होगा।
आगे की स्थिति
शताब्दी एक्सप्रेस पथराव मामले में जाँच जारी है और दोषियों की पहचान की कोशिश हो रही है। मौलाना सैयद सैफ अब्बास जैसे धर्मगुरुओं का इस घटना की निंदा करना और जाँच समिति की माँग करना सामाजिक सौहार्द की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।