शाहजहांपुर पुलिस ने बरामद किए ₹40 लाख के 201 चोरी-गुम मोबाइल, असली मालिकों को लौटाए
सारांश
मुख्य बातें
शाहजहांपुर पुलिस ने 5 नवंबर 2026 को सर्विलांस और साइबर टीम के समन्वित अभियान के तहत जिले के विभिन्न कस्बों में रहने वाले लोगों के 201 खोए और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिए। बरामद फोन की अनुमानित कुल कीमत ₹40 लाख बताई गई है। इस अभियान की सफलता से उन लोगों को बड़ी राहत मिली जो लंबे समय से अपने फोन की तलाश में थे।
मुख्य घटनाक्रम
एसपी सिटी देवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार को पुलिस की सर्विलांस और साइबर टीम ने मिलकर अलग-अलग कंपनियों के 201 मोबाइल फोन ट्रेस किए और उन्हें बरामद किया। बरामद किए गए फोन में कई ऐसे भी थे जो 2025 या उससे पहले खोए अथवा चोरी हुए थे।
बरामदगी के बाद सभी फोन उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द कर दिए गए। पुलिस के अनुसार, फोन वापस पाकर मालिकों के चेहरे पर खुशी स्पष्ट दिखाई दी।
कैसे हुई बरामदगी
शाहजहांपुर पुलिस ने इस अभियान में सर्विलांस तकनीक और साइबर टूल्स का प्रयोग किया। गुम या चोरी हुए फोन के IMEI नंबर के आधार पर नेटवर्क पर उनकी लोकेशन ट्रेस की गई और उन्हें जब्त किया गया। बरामद मोबाइल फोन जनपद के विभिन्न कस्बों के निवासियों के थे।
पहले भी हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस तरह की बड़ी बरामदगी की हो। इससे पहले 19 अक्टूबर 2026 को गौतमबुद्धनगर पुलिस ने अपने अभियान के तहत ₹25 लाख अनुमानित कीमत के 108 स्मार्टफोन बरामद कर उनके मालिकों को लौटाए थे। उस अभियान में भी फोन वापस पाने वाले लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में मोबाइल चोरी और गुमशुदगी के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पुलिस साइबर तकनीक का उपयोग कर इनकी बरामदगी को प्राथमिकता दे रही है।
आम जनता पर असर
मोबाइल फोन आज महज एक संचार उपकरण नहीं रहा — इसमें बैंकिंग, व्यक्तिगत डेटा, तस्वीरें और सरकारी दस्तावेज़ सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में फोन की चोरी या गुमशुदगी न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि डेटा सुरक्षा के लिहाज़ से भी गंभीर जोखिम है।
इस अभियान से उन नागरिकों को सीधा फायदा मिला जो ₹40 लाख कीमत के फोन खोकर परेशान थे।
आगे की राह
शाहजहांपुर पुलिस के इस अभियान की सफलता उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक नमूना बन सकती है। साइबर तकनीक और सर्विलांस के समन्वित प्रयोग से इस तरह के और अभियान चलाए जाने की उम्मीद है, जिससे मोबाइल चोरी पर लगाम लगाई जा सके।