3 सितंबर 2026
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शरद पवार का केंद्र पर हमला: 7.8% जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों में 'हेरफेर' का आरोप, असल समस्याओं को नजरअंदाज करने की बात

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शरद पवार का केंद्र पर हमला: 7.8% जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों में 'हेरफेर' का आरोप, असल समस्याओं को नजरअंदाज करने की बात

सारांश

शरद पवार ने बारामती में केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला — 7.8% जीडीपी ग्रोथ को 'सांख्यिकीय हेरफेर' बताया और आरोप लगाया कि सरकार महंगाई व घटती बचत जैसी असल समस्याओं से ध्यान भटका रही है। पूर्व वित्त सचिव समेत कई अर्थशास्त्री भी गणना पद्धति पर सवाल उठा चुके हैं।

मुख्य बातें

शरद पवार ने 3 सितंबर को बारामती में अप्रैल-जून तिमाही की 7.8% जीडीपी ग्रोथ को 'सांख्यिकीय हेरफेर' करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के जरिए महंगाई और घटती पारिवारिक बचत जैसे घरेलू मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं।
दूध की कीमतें ₹60 से बढ़कर ₹80 प्रति लीटर होने पर उन्होंने एफडीए के मिलावट-विरोधी अभियान का स्वागत किया।
महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी के चलते पीने के पानी और बुवाई संकट की चेतावनी दी; सामूहिक राहत की अपील की।
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत अर्थशास्त्रियों ने भी जीडीपी गणना पद्धति पर आपत्ति जताई है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और सांख्यिकी मंत्रालय ने विपक्ष के आरोप खारिज कर आंकड़ों की सटीकता का बचाव किया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने 3 सितंबर को बारामती में पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और अप्रैल-जून तिमाही के लिए घोषित 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों को 'सांख्यिकीय हेरफेर' का नतीजा बताया। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री देश की आर्थिक वास्तविकता को छुपाकर एक भ्रामक नैरेटिव गढ़ रहे हैं।

पवार के मुख्य आरोप

पवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था की स्थिति को बहुत अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे असल समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे यह समझने में नाकाम रहे हैं कि अर्थव्यवस्था असल में धीमी हो रही है।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री घरेलू मुद्दों — जैसे तेजी से बढ़ती महंगाई और परिवारों की घटती बचत — से ध्यान भटकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का सहारा ले रहे हैं।

कृषि और क्षेत्रीय मुद्दों पर चिंता

चीनी की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए पवार ने कहा कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को इसका सीधा लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने चीनी आयात के खिलाफ सलाह दी और कहा कि इसके दीर्घकालिक असर के बारे में अभी कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता। दूसरी ओर, उन्होंने महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे के डेयरी सेक्टर में मिलावट-विरोधी अभियान की सराहना की। उनके अनुसार, दूध की कीमतें ₹60 से बढ़कर ₹80 प्रति लीटर होने के बावजूद उपभोक्ता बेहतर गुणवत्ता के लिए अधिक भुगतान को तैयार हैं, जिसका फायदा अंततः उत्पादकों को मिल रहा है।

महाराष्ट्र में सूखे की चेतावनी

पवार ने महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी का हवाला देते हुए पीने के पानी और बुवाई के कार्यों को लेकर आने वाले संकट की चेतावनी दी और सामूहिक राहत प्रयासों की अपील की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 16 अक्टूबर के आसपास बारामती दौरे की संभावना है, जहाँ उन्हें स्थानीय पहलों की जानकारी दी जाएगी।

न्यायपालिका और राजनीतिक घटनाक्रम

शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न पर सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियों का जिक्र करते हुए पवार ने कहा कि न्यायपालिका की सख्त चेतावनियाँ सरकार के फैसले लेने के तरीकों पर सवाल उठाती हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब छात्र विरोध-प्रदर्शनों को लेकर भी राजनीतिक माहौल गरम है।

विपक्ष और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

एनसीपी (एसपी) का यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) भी जीडीपी गणना के बदले तरीके पर सरकार को घेर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार महज 'आंकड़ों का खेल' खेल रही है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत कई अर्थशास्त्रियों ने भी जीडीपी गणना पद्धति में बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि मौजूदा तरीके से विकास दर बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाई जाती है।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने विपक्ष के इन दावों को सिरे से खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस भारत की आर्थिक प्रगति और विकास की रफ्तार को पचा नहीं पा रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने भी अपनी डेटा संग्रह और गणना पद्धति का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि 7.8 प्रतिशत की विकास दर तिमाही आर्थिक प्रदर्शन को सटीक रूप से दर्शाती है। आने वाले हफ्तों में यह बहस और तेज होने की संभावना है, क्योंकि अगली तिमाही के आंकड़े जारी होने से पहले आर्थिक बहस का केंद्र डेटा पारदर्शिता बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सांख्यिकीय भी है। विडंबना यह है कि जिस 7.8% के आंकड़े को सरकार उपलब्धि बता रही है, उसी पर सवाल उठाने वाले मुख्यधारा के अर्थशास्त्री भी हैं — जिन्हें मीडिया कवरेज में पर्याप्त जगह नहीं मिलती। महंगाई और घटती पारिवारिक बचत जैसे मुद्दे GDP की हेडलाइन संख्या में नहीं दिखते, लेकिन आम नागरिक की जेब पर उनका असर सीधा है — यही वह अंतर है जिसे पवार उजागर कर रहे हैं।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरद पवार ने 7.8% जीडीपी ग्रोथ पर क्या आरोप लगाए?
पवार ने आरोप लगाया कि सरकार सांख्यिकीय तरीकों में 'हेरफेर' कर अप्रैल-जून तिमाही की 7.8% जीडीपी ग्रोथ को वास्तविकता से बेहतर दिखा रही है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था असल में धीमी हो रही है और सरकार इसे स्वीकार नहीं कर रही।
जीडीपी गणना पद्धति पर किन अर्थशास्त्रियों ने सवाल उठाए हैं?
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत कई अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी गणना के बदले तरीके पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मौजूदा पद्धति से विकास दर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती है।
केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस भारत की आर्थिक प्रगति पचा नहीं पा रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अपनी पद्धति का बचाव करते हुए 7.8% की दर को सटीक बताया।
महाराष्ट्र में बारिश की कमी को लेकर पवार ने क्या चेतावनी दी?
पवार ने कहा कि राज्य में बारिश की भारी कमी से पीने के पानी और बुवाई के कामों पर गंभीर संकट आ सकता है। उन्होंने सामूहिक राहत प्रयासों की अपील की।
प्रधानमंत्री मोदी के बारामती दौरे को लेकर पवार ने क्या कहा?
पवार ने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 16 अक्टूबर के आसपास बारामती आने की संभावना है। इस दौरान उन्हें स्थानीय पहलों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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