जीडीपी 7.8% ग्रोथ पर शरद पवार का केंद्र पर हमला — 'आंकड़ों में हेरफेर, असल समस्याएं नजरअंदाज'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने 3 सितंबर को बारामती में पत्रकारों से बातचीत में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि अप्रैल-जून तिमाही के लिए घोषित 7.8 प्रतिशत जीडीपी विकास दर सांख्यिकीय तरीकों में 'हेरफेर' का नतीजा है। उनके अनुसार, सरकार वास्तविक आर्थिक चुनौतियों — तेज़ी से बढ़ती महंगाई और परिवारों की घटती बचत — से जनता का ध्यान भटका रही है।
पवार के मुख्य आरोप
पवार ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा, "प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था की स्थिति को बहुत अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे असल समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे यह समझने में नाकाम रहे हैं कि अर्थव्यवस्था असल में धीमी हो रही है।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री घरेलू संकटों से ध्यान हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का सहारा ले रहे हैं। पवार ने कृषि और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी गंभीर चिंता जताई।
कृषि व डेयरी क्षेत्र पर चिंता
चीनी की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए पवार ने कहा कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को इसका उचित लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने चीनी आयात के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर भी आगाह किया, हालांकि स्वीकार किया कि इसके परिणामों के बारे में अभी कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता।
दूसरी ओर, पवार ने महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे द्वारा डेयरी क्षेत्र में मिलावट के विरुद्ध चलाए गए अभियानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दूध की कीमत ₹60 से बढ़कर ₹80 प्रति लीटर होने के बावजूद उपभोक्ता बेहतर गुणवत्ता के लिए अधिक मूल्य देने को तैयार हैं, जिससे उत्पादकों को दीर्घकालिक लाभ मिल रहा है।
महाराष्ट्र में सूखे का संकट
महाराष्ट्र में इस वर्ष बारिश की भारी कमी का हवाला देते हुए पवार ने पेयजल आपूर्ति और बुवाई के कार्यों पर मंडरा रहे संकट की चेतावनी दी और सामूहिक राहत प्रयासों की अपील की। उन्होंने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के 16 अक्टूबर के आसपास बारामती आने की संभावना है, जहाँ उन्हें स्थानीय पहलों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
विपक्ष की व्यापक आलोचना और अर्थशास्त्रियों की आपत्ति
यह ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) भी जीडीपी गणना के बदले हुए तरीके पर सवाल उठाते हुए सरकार पर 'आंकड़ों का खेल' खेलने का आरोप लगा रही है। आलोचकों का कहना है कि पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग सहित कई अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी गणना पद्धति में बदलाव पर आपत्ति जताई है और कहा है कि मौजूदा तरीके से विकास दर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती है।
इसके अलावा, पवार ने सर्वोच्च न्यायालय की उन हालिया टिप्पणियों का भी उल्लेख किया जो शिवसेना पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर चल रही सुनवाई से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, न्यायपालिका की सख्त चेतावनियाँ सरकार के निर्णय लेने के तरीके पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
सरकार का पलटवार
केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष के सभी दावों को सिरे से खारिज किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस भारत की आर्थिक प्रगति और विकास की गति को स्वीकार नहीं कर पा रही। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अपनी डेटा संग्रह और गणना पद्धतियों का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि 7.8 प्रतिशत विकास दर का आंकड़ा तिमाही आर्थिक प्रदर्शन को सटीक रूप से दर्शाता है।
गौरतलब है कि जीडीपी गणना पद्धति को लेकर यह विवाद नया नहीं है — विपक्ष और कुछ स्वतंत्र अर्थशास्त्री वर्षों से आधार वर्ष बदलने तथा गणना के तरीकों पर सवाल उठाते रहे हैं। आने वाले महीनों में यह बहस और तेज़ होने की संभावना है।