शेखपुरा में फसल कटनी व कृषि सांख्यिकी प्रशिक्षण, अधिकारियों को पारदर्शिता के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
शेखपुरा जिले में 31 अक्टूबर 2026 को समाहरणालय स्थित मंथन सभागार में फसल कटनी एवं कृषि सांख्यिकी पर एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला पदाधिकारी शेखर आनंद के निर्देश पर संपन्न हुआ और इसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त ने की। सभी संबंधित अधिकारियों को सटीक आँकड़े समय पर उपलब्ध कराने हेतु पारदर्शिता के साथ कार्य करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रशिक्षण सत्र का उद्घाटन उप विकास आयुक्त द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के प्रतीक स्वरूप उन्हें पौधा भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, समस्त प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, प्रशिक्षक, प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी तथा अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया
लैपटॉप आधारित प्रस्तुति के माध्यम से अधिकारियों को कृषि सांख्यिकी और फसल कटनी के विविध पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय को 'राज्य कृषि सांख्यिकी प्राधिकरण' घोषित किया गया है, जिसके अंतर्गत कृषि सांख्यिकी से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य संपादित होते हैं।
प्रशिक्षण में शुद्ध सिंचित विवरणी, मौसमवार सिंचित क्षेत्रफल विवरणी, प्रयोग मूल्य, फसल एवं फल-सब्जी कटनी प्रयोग के माध्यम से उपज दर का आकलन, नेत्रांकन विधि से उपज दर निर्धारण, वर्षापात आँकड़ों का संकलन तथा फसल सांख्यिकी सुधार योजना के तहत फसल क्षेत्रफल एवं कटनी प्रयोगों की जाँच जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा द्रुत सर्वेक्षण योजना के अंतर्गत फसल क्षेत्रफल के आकलन की प्रक्रिया भी समझाई गई।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
कार्यक्रम में सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फसल कटनी और सांख्यिकी कार्यों को पूरी पारदर्शिता, सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ संपादित करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि सटीक आँकड़े निर्धारित अवधि में संबंधित विभाग को उपलब्ध कराए जाएँ।
आम जनता और किसानों पर असर
अधिकारियों ने रेखांकित किया कि कृषि क्षेत्र से जुड़े आँकड़ों की शुद्धता नीति निर्माण और किसानों के हित में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि फसल उत्पादन के सटीक आँकड़े सरकारी सहायता, फसल बीमा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुड़े निर्णयों का आधार बनते हैं, जिनका सीधा प्रभाव किसानों की आजीविका पर पड़ता है। इसी उद्देश्य से प्रशिक्षण के माध्यम से संबंधित पदाधिकारियों की क्षमता वृद्धि पर विशेष जोर दिया गया।
आगे की राह
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिले में कृषि आँकड़ा संग्रह की प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले फसल सत्र में प्रशिक्षित अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ किए जाने की उम्मीद है।