4 अगस्त 2026
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शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर धनबाद में श्रद्धांजलि, पाठ्यक्रम में संघर्ष शामिल करने की मांग

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शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर धनबाद में श्रद्धांजलि, पाठ्यक्रम में संघर्ष शामिल करने की मांग

सारांश

शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर धनबाद में श्रद्धांजलि सभा हुई, जहाँ विधायक अरूप चटर्जी ने गुरुजी के संघर्ष को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने और झारखंड के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की माँग उठाई — यह सवाल कि क्या राज्य का सपना अभी भी अधूरा है, एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

मुख्य बातें

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर 4 अगस्त को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
निरसा विधायक अरूप चटर्जी और सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो सहित कई राजनीतिक व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने माँग की कि गुरुजी का जीवन-संघर्ष झारखंड के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
चटर्जी ने आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्तियों में बाहरी लोगों को प्राथमिकता मिल रही है, जो राज्य आंदोलन की भावना के विरुद्ध है।
वक्ताओं ने जल, जंगल, जमीन और झारखंडी अस्मिता की रक्षा के संकल्प को दोहराया।

झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार, 4 अगस्त को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एक भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने गुरुजी के जीवन-संघर्ष को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की जोरदार मांग उठाई।

श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

सभा में निरसा के सीपीआई एमएल विधायक अरूप चटर्जी और सिंदरी के विधायक चंद्रदेव महतो सहित विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गुरुजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने शिबू सोरेन के नेतृत्व में चले झारखंड आंदोलन और राज्य निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।

पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग

आंदोलनकारियों ने सरकार से आग्रह किया कि शिबू सोरेन के जीवन, झारखंड आंदोलन और राज्य निर्माण में उनकी भूमिका को झारखंड के स्कूली पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और जनसंघर्षों से परिचित हो सके। उनका कहना था कि गुरुजी के विचारों को केवल स्मृति समारोहों तक सीमित रखना उनके बलिदान के साथ न्याय नहीं होगा।

विधायक अरूप चटर्जी का बयान

निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि दिशोम गुरु ने जिस झारखंड का सपना देखा था, वह आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन का मूल उद्देश्य स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक रोजगार और अधिकार दिलाना था, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। चटर्जी ने आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से बाहरी लोगों को नौकरियाँ मिल रही हैं, जो राज्य आंदोलन की मूल भावना के विपरीत है।

जल, जंगल, जमीन की रक्षा का संकल्प

चटर्जी ने कहा कि गुरुजी ने जल, जंगल, जमीन और झारखंडी अस्मिता की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके विचारों को सरकारी नीतियों और शिक्षा व्यवस्था में भी स्थान मिलना चाहिए। सभा में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी गुरुजी के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प दोहराया और झारखंड आंदोलन के इतिहास को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

आगे क्या

यह मांग ऐसे समय में उठाई गई है जब झारखंड में स्थानीय रोजगार और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। गौरतलब है कि राज्य गठन को 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं और इस पृष्ठभूमि में पाठ्यक्रम सुधार की माँग व्यापक विमर्श को जन्म दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि राज्य की संस्थागत संरचना आंदोलन की मूल भावना को आत्मसात नहीं कर पाई। झारखंड लोक सेवा आयोग पर लगाए गए आरोप नए नहीं हैं, लेकिन इन्हें बार-बार उठाए जाने के बावजूद नीतिगत सुधार की गति धीमी रही है। बिना ठोस पाठ्यक्रम सुधार और सत्यापन-योग्य रोजगार नीति के, ये स्मृति सभाएँ इतिहास को जीवित रखने का माध्यम तो बन सकती हैं, पर बदलाव का औज़ार नहीं।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिबू सोरेन कौन थे और झारखंड आंदोलन में उनकी भूमिका क्या थी?
शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता थे, जिन्हें 'दिशोम गुरु' कहा जाता है। उन्होंने जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए दशकों तक संघर्ष किया और अलग झारखंड राज्य के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाई।
धनबाद में श्रद्धांजलि सभा में क्या मांग उठाई गई?
4 अगस्त को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर आयोजित सभा में माँग की गई कि शिबू सोरेन के जीवन, झारखंड आंदोलन और राज्य निर्माण में उनकी भूमिका को झारखंड के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। इसके अलावा राज्य के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की भी माँग उठाई गई।
विधायक अरूप चटर्जी ने झारखंड लोक सेवा आयोग पर क्या आरोप लगाए?
निरसा के सीपीआई एमएल विधायक अरूप चटर्जी ने आरोप लगाया कि झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से बाहरी लोगों को नौकरियाँ मिल रही हैं, जो राज्य आंदोलन की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि झारखंड के संसाधनों और सरकारी नौकरियों पर पहला अधिकार राज्य के युवाओं का होना चाहिए।
क्या शिबू सोरेन का सपना पूरा हुआ?
विधायक अरूप चटर्जी के अनुसार, दिशोम गुरु ने जिस झारखंड का सपना देखा था वह आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो सका है। राज्य गठन का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक रोजगार और अधिकार दिलाना था, लेकिन बड़ी संख्या में युवा अभी भी बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं।
झारखंड आंदोलन के इतिहास को संरक्षित करने की क्यों जरूरत बताई जा रही है?
वक्ताओं का कहना है कि नई पीढ़ी अपने इतिहास और जनसंघर्षों से अनजान होती जा रही है। गुरुजी के विचारों को केवल स्मृति समारोहों तक सीमित न रखकर शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों में भी स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि झारखंड आंदोलन की विरासत जीवित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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