27 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी की बरी पर शिवसेना का तंज: 'कोर्ट पर अविश्वास, बरी होते ही जश्न — यह दोहरापन क्यों?'

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राहुल गांधी की बरी पर शिवसेना का तंज: 'कोर्ट पर अविश्वास, बरी होते ही जश्न — यह दोहरापन क्यों?'

सारांश

शिवसेना नेता आनंद दुबे ने राहुल गांधी पर 'दोहरेपन' का सीधा आरोप लगाया — जो नेता कोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं, वही एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी होते ही उत्सव मनाते हैं। यह तंज उस वक्त आया जब चार राज्यों की विधान परिषद सीटों की मतगणना जारी थी।

मुख्य बातें

शिवसेना नेता आनंद दुबे ने 27 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी के एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी होने पर कांग्रेस पर निशाना साधा।
दुबे का आरोप — राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, ईडी और सीबीआई पर अविश्वास जताते हैं, लेकिन बरी होने पर जश्न मनाते हैं।
चुनाव आयोग को 'क्रिकेट के अंपायर' की संज्ञा देते हुए दुबे ने उसे पूर्णतः निष्पक्ष बताया।
बाबा रामदेव को 'संत' बताते हुए कहा कि उन्हें किसी भी दल के खिलाफ चुनाव लड़ने का संवैधानिक अधिकार है।
दुबे ने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद मतगणना में एनडीए की जीत का विश्वास जताया।

शिवसेना नेता आनंद दुबे ने 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी होने पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी न्यायपालिका, चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर खुलकर सवाल उठाते हैं, लेकिन जब उन्हीं अदालतों से राहत मिलती है तो वे उत्सव मनाने लगते हैं। उन्होंने इसे 'दोहरी राजनीति' करार दिया।

राहुल गांधी पर दोहरेपन का आरोप

दुबे ने कहा, 'यही राहुल गांधी हैं, जो कहते हैं कि हमें कोर्ट पर विश्वास नहीं है, कचहरी पर विश्वास नहीं है, सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास नहीं है, चुनाव आयोग पर विश्वास नहीं है, ईडी और सीबीआई पर विश्वास नहीं है। और जब बाइज्जत बरी होते हैं, तो नाचते हैं, झूमते हैं, गाड़ियों का काफिला लेकर चलते हैं। यह दोहरी बात कैसे हो सकती है?' उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि कम से कम अदालत का सम्मान किया जाए।

दुबे ने आगे कहा कि राजनीतिक हार की भरपाई प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को अपशब्द कहने से नहीं होगी। उन्होंने राहुल गांधी को याद दिलाया कि वे वीर सावरकर का अपमान कर चुके हैं और अब 'साठ साल की उम्र' की ओर बढ़ रहे हैं, इसलिए गंभीरता दिखाने की जरूरत है।

चुनाव आयोग की तुलना 'अंपायर' से

चुनाव आयोग की निष्पक्षता का बचाव करते हुए दुबे ने कहा कि चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संस्था है और उसका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं। उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि 'चुनाव आयोग अंपायर की भांति है — आप बार-बार आउट हो रहे हैं, हिट विकेट हो रहे हैं, रन आउट हो रहे हैं और आरोप अंपायर पर लगा रहे हैं।'

उन्होंने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दाखिल कर अपने ऊपर लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया है। दुबे के अनुसार इसके बाद विवाद समाप्त हो जाना चाहिए।

बाबा रामदेव और चुनाव लड़ने का अधिकार

दुबे ने बाबा रामदेव के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि वे राजनीतिक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संत हैं जो करोड़ों लोगों को योग सिखाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामदेव चाहे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से लड़ें, समाजवादी पार्टी से लड़ें या कांग्रेस से — यह उनका संवैधानिक अधिकार है।

उत्तर प्रदेश विकास और एनडीए का दावा

दुबे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिछले दस वर्षों के काम की सराहना की और कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और विश्व से निवेश आ रहा है। उन्होंने दावा किया कि एनडीए परिवार ने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की उन सीटों की गिनती में बेहतर प्रदर्शन किया है जिनके परिणाम 27 अक्टूबर को आ रहे हैं।

दुबे ने यह भी जोड़ा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का उत्तर प्रदेश से पुराना नाता है — कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह जैसे नेता वहाँ मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ भगवान राम का जन्म हुआ, वहाँ भाजपा और शिवसेना की जड़ें सदियों पुरानी हैं। विपक्ष को जनता के बीच जाकर दिल जीतने की जरूरत है, न कि प्रतिद्वंद्वियों पर कीचड़ उछालने की।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्तारूढ़ दल के सहयोगी 'दोहरेपन' का आरोप लगाने की रणनीति अपनाते हैं। असली सवाल यह है कि संस्थाओं की आलोचना और उनसे राहत पाना — दोनों एक साथ हो सकते हैं क्योंकि व्यक्ति और संस्था की कार्यप्रणाली अलग-अलग होती है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर हलफनामा दाखिल होने को 'बात खत्म' मान लेना भी उतना ही सरलीकृत है जितना संस्था पर सवाल उठाना। बहस असल में लोकतांत्रिक जवाबदेही की है — जहाँ दोनों पक्षों को आत्मचिंतन की जरूरत है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने किस मामले में बरी किया?
राहुल गांधी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने बरी किया, जिसके बाद शिवसेना नेता आनंद दुबे ने उन पर निशाना साधा। हालांकि दुबे के बयान में मामले का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया, उन्होंने इसे कांग्रेस के 'दोहरेपन' के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
आनंद दुबे ने राहुल गांधी पर 'दोहरेपन' का आरोप क्यों लगाया?
दुबे का तर्क था कि राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, ईडी और सीबीआई जैसी संस्थाओं पर अविश्वास जताते हैं, लेकिन एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी होने पर जश्न मनाते हैं। उनके अनुसार एक ही संस्थागत ढाँचे से राहत लेना और साथ ही उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाना विरोधाभासी है।
शिवसेना नेता ने चुनाव आयोग के बारे में क्या कहा?
दुबे ने चुनाव आयोग को 'क्रिकेट के अंपायर' की तरह बताया — एक निष्पक्ष संस्था जो सिर्फ नियम लागू करती है। उन्होंने कहा कि आयोग के सदस्यों ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
बाबा रामदेव के चुनाव लड़ने पर दुबे का क्या रुख है?
दुबे ने बाबा रामदेव को राजनीतिक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संत बताया जो करोड़ों लोगों को योग सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि रामदेव को किसी भी पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने का पूरा संवैधानिक अधिकार है।
27 अक्टूबर को किन राज्यों की विधान परिषद की मतगणना हुई?
दुबे के अनुसार 27 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद चुनावों की मतगणना हुई। उन्होंने दावा किया कि एनडीए इन सभी राज्यों में अधिकतम सीटें जीतेगा।
राष्ट्र प्रेस
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