2 नवंबर 2026
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सीएनजी एलपीजी मूल्यवृद्धि पर शिवसेना यूबीटी का हमला, 'सामना' में बताया 'क्रूर दीपावली उपहार'

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सीएनजी एलपीजी मूल्यवृद्धि पर शिवसेना यूबीटी का हमला, 'सामना' में बताया 'क्रूर दीपावली उपहार'

सारांश

दीपावली से ठीक पहले सीएनजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतें बढ़ीं तो शिवसेना (यूबीटी) ने इसे सूखाग्रस्त महाराष्ट्र की जनता पर 'क्रूर दीपावली उपहार' कहा। 'सामना' संपादकीय में 7.74% खाद्य महंगाई, RBI की ब्याज दर और चुनाव बाद मूल्यवृद्धि का सिलसिला — सब एक साथ निशाने पर।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने 2 नवंबर 2026 को 'सामना' संपादकीय में सीएनजी एलपीजी मूल्यवृद्धि को 'क्रूर दीपावली उपहार' करार दिया।
एमएमआर में सीएनजी ₹1 प्रति किलो महँगी हुई — पिछले 6 महीनों में छठी बार ; कमर्शियल एलपीजी में ₹10 की बढ़ोतरी।
मई में कमर्शियल सिलेंडर ₹1,000 महँगा हुआ था; बाद की कटौती को पार्टी ने 'दिखावा' बताया।
संपादकीय में खाद्य महंगाई दर 7.74% और RBI के रेपो रेट बढ़ोतरी से ईएमआई महँगी होने का उल्लेख।
आरोप — चुनावों तक कीमतें कृत्रिम रूप से रोकी गईं, चुनाव बाद बेकाबू हुईं।

शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सीएनजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई ताज़ा बढ़ोतरी पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में इसे सूखे और महंगाई की दोहरी मार झेल रही जनता के लिए 'क्रूर दीपावली उपहार' करार दिया गया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले इस गुट ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों को गहरे आर्थिक संकट में धकेल रही है।

मूल्यवृद्धि का ब्यौरा

सामना के संपादकीय के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में सीएनजी की कीमत में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जो पिछले छह महीनों में छठी बार है। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹10 का इज़ाफा किया गया है। संपादकीय में यह भी याद दिलाया गया कि मई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹1,000 की भारी बढ़ोतरी हुई थी और बाद की मामूली कटौती को 'महज दिखावा' बताया गया, क्योंकि दाम फिर से ऊपर जा रहे हैं।

आम जनता और किसानों पर असर

संपादकीय में कहा गया, "पूरा महाराष्ट्र भीषण सूखे की चपेट में है। किसानों के खेतों में फसल नहीं है और आम लोगों की जेब में पैसे नहीं बचे हैं। लोग अपनी थोड़ी बहुत बचत को बचाकर रखे हुए थे, इस उम्मीद में कि दीपावली पर वे अपने बच्चों की जिंदगी में थोड़ी खुशियाँ ला सकेंगे। लेकिन, सरकार द्वारा सीएनजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में की गई बढ़ोतरी ने इन बची खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।" संपादकीय ने तीखा सवाल भी दागा, "क्या सत्ता में बैठे लोग यह चाहते हैं कि जनता इस साल दीपावली मनाए ही नहीं?"

घरेलू सिलेंडर बचाव पर पलटवार

शिवसेना (यूबीटी) ने घरेलू सिलेंडर की कीमतें न बढ़ाने संबंधी सरकारी बचाव को खारिज करते हुए कहा कि कमर्शियल गैस महँगी होने से होटल, रेस्तरां और त्योहारी मिठाइयों स्नैक्स की लागत सीधे बढ़ती है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ता ही उठाता है। गौरतलब है कि यह तर्क उन लाखों परिवारों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जो बाहर से तैयार खाना खरीदने पर निर्भर हैं।

व्यापक आर्थिक दबाव की तस्वीर

संपादकीय में वैश्विक और घरेलू कारणों का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि सूखे की स्थिति और ईरान अमेरिका संघर्ष के चलते खाद्य महंगाई दर 7.74 प्रतिशत के ऊँचे स्तर पर पहुँच गई है। दालों और अनाजों की कीमतें इतनी चढ़ गई हैं कि वे 'विलासिता की वस्तुएँ' लगने लगी हैं। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट बढ़ाने के कारण पर्सनल लोन और होम लोन की ईएमआई भी भारी हो गई है।

राजनीतिक दोहरेपन पर निशाना

ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि पाँच राज्यों के चुनाव खत्म होने तक ईंधन और ज़रूरी चीजों की कीमतों को "राजनीतिक स्वार्थ के लिए कृत्रिम रूप से रोका गया" और अब चुनाव बाद "महंगाई का घोड़ा बेकाबू हो गया है।" संपादकीय ने यह भी कहा कि जो शासक खाड़ी युद्ध जैसे वैश्विक तनाव के बावजूद कीमतें काबू में रखने का दावा करते थे, वे अब बेपरवाह हो गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की आहटें सुनाई देने लगी हैं और विपक्ष जन असंतोष को भुनाने की कोशिश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सूखे और RBI की ब्याज दर को एक साथ पिरोकर यह दिखाने की कोशिश की गई है कि आर्थिक संकट बहुआयामी है। हालाँकि सरकार की ओर से घरेलू सिलेंडर की कीमतें न बढ़ाने का तर्क दिया जा रहा है, पर कमर्शियल गैस की महँगाई का रोज़ाना की थाली पर असर पड़ना एक वास्तविकता है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। महाराष्ट्र में राजनीतिक तापमान ऊँचा है और यह संपादकीय उसी का प्रतिबिंब है — लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष महँगाई पर आक्रोश को ठोस वैकल्पिक नीति प्रस्ताव में बदल पाएगा।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवसेना (यूबीटी) ने सीएनजी एलपीजी बढ़ोतरी को 'क्रूर दीपावली उपहार' क्यों कहा?
पार्टी ने 'सामना' संपादकीय में कहा कि महाराष्ट्र पहले से सूखे और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है, और ऐसे में दीपावली से ठीक पहले सीएनजी व कमर्शियल एलपीजी की कीमतें बढ़ाना जनता की उम्मीदों पर पानी फेरना है। पार्टी का आरोप है कि इससे त्योहारी खर्च और रोज़मर्रा का बजट दोनों बिगड़ेंगे।
एमएमआर में सीएनजी कितनी बार महँगी हुई है?
'सामना' के अनुसार मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में सीएनजी पिछले छह महीनों में छठी बार महँगी हुई है, इस बार ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर में भी ₹10 का इज़ाफा किया गया है।
कमर्शियल एलपीजी महँगा होने से आम जनता पर क्या असर पड़ता है?
शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने से होटल, रेस्तरां और बाज़ार में बिकने वाले खाने पीने की चीज़ें महँगी हो जाती हैं। घरेलू सिलेंडर की कीमत न बढ़ाने का सरकारी तर्क इसलिए अधूरा है, क्योंकि बड़ी आबादी बाहर से तैयार खाना खरीदती है।
सामना संपादकीय में किन आर्थिक आँकड़ों का हवाला दिया गया?
संपादकीय में खाद्य महंगाई दर 7.74 प्रतिशत बताई गई है। साथ ही RBI द्वारा रेपो रेट बढ़ाने से पर्सनल लोन और होम लोन की ईएमआई महँगी होने और ईरान अमेरिका संघर्ष व सूखे को महंगाई के कारणों में गिनाया गया है।
शिवसेना (यूबीटी) ने चुनाव और मूल्यवृद्धि को कैसे जोड़ा?
पार्टी ने आरोप लगाया कि पाँच राज्यों के चुनाव समाप्त होने तक ईंधन और ज़रूरी वस्तुओं की कीमतें राजनीतिक कारणों से कृत्रिम रूप से रोकी गई थीं। चुनाव खत्म होते ही कीमतें बढ़ने लगीं, जिसे पार्टी ने सरकार के दोहरे रवैये का सबूत बताया।
राष्ट्र प्रेस
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