सीएनजी एलपीजी मूल्यवृद्धि पर शिवसेना यूबीटी का हमला, 'सामना' में बताया 'क्रूर दीपावली उपहार'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सीएनजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई ताज़ा बढ़ोतरी पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में इसे सूखे और महंगाई की दोहरी मार झेल रही जनता के लिए 'क्रूर दीपावली उपहार' करार दिया गया। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले इस गुट ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों को गहरे आर्थिक संकट में धकेल रही है।
मूल्यवृद्धि का ब्यौरा
सामना के संपादकीय के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में सीएनजी की कीमत में ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है, जो पिछले छह महीनों में छठी बार है। इसके साथ ही कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में ₹10 का इज़ाफा किया गया है। संपादकीय में यह भी याद दिलाया गया कि मई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹1,000 की भारी बढ़ोतरी हुई थी और बाद की मामूली कटौती को 'महज दिखावा' बताया गया, क्योंकि दाम फिर से ऊपर जा रहे हैं।
आम जनता और किसानों पर असर
संपादकीय में कहा गया, "पूरा महाराष्ट्र भीषण सूखे की चपेट में है। किसानों के खेतों में फसल नहीं है और आम लोगों की जेब में पैसे नहीं बचे हैं। लोग अपनी थोड़ी बहुत बचत को बचाकर रखे हुए थे, इस उम्मीद में कि दीपावली पर वे अपने बच्चों की जिंदगी में थोड़ी खुशियाँ ला सकेंगे। लेकिन, सरकार द्वारा सीएनजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में की गई बढ़ोतरी ने इन बची खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।" संपादकीय ने तीखा सवाल भी दागा, "क्या सत्ता में बैठे लोग यह चाहते हैं कि जनता इस साल दीपावली मनाए ही नहीं?"
घरेलू सिलेंडर बचाव पर पलटवार
शिवसेना (यूबीटी) ने घरेलू सिलेंडर की कीमतें न बढ़ाने संबंधी सरकारी बचाव को खारिज करते हुए कहा कि कमर्शियल गैस महँगी होने से होटल, रेस्तरां और त्योहारी मिठाइयों स्नैक्स की लागत सीधे बढ़ती है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ता ही उठाता है। गौरतलब है कि यह तर्क उन लाखों परिवारों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जो बाहर से तैयार खाना खरीदने पर निर्भर हैं।
व्यापक आर्थिक दबाव की तस्वीर
संपादकीय में वैश्विक और घरेलू कारणों का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि सूखे की स्थिति और ईरान अमेरिका संघर्ष के चलते खाद्य महंगाई दर 7.74 प्रतिशत के ऊँचे स्तर पर पहुँच गई है। दालों और अनाजों की कीमतें इतनी चढ़ गई हैं कि वे 'विलासिता की वस्तुएँ' लगने लगी हैं। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट बढ़ाने के कारण पर्सनल लोन और होम लोन की ईएमआई भी भारी हो गई है।
राजनीतिक दोहरेपन पर निशाना
ठाकरे गुट ने आरोप लगाया कि पाँच राज्यों के चुनाव खत्म होने तक ईंधन और ज़रूरी चीजों की कीमतों को "राजनीतिक स्वार्थ के लिए कृत्रिम रूप से रोका गया" और अब चुनाव बाद "महंगाई का घोड़ा बेकाबू हो गया है।" संपादकीय ने यह भी कहा कि जो शासक खाड़ी युद्ध जैसे वैश्विक तनाव के बावजूद कीमतें काबू में रखने का दावा करते थे, वे अब बेपरवाह हो गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की आहटें सुनाई देने लगी हैं और विपक्ष जन असंतोष को भुनाने की कोशिश में है।