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एसआईआर विवाद: विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बताया 'मोहरा', माफी की माँग

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एसआईआर विवाद: विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बताया 'मोहरा', माफी की माँग

सारांश

एसआईआर विवाद अब सीधे संस्थागत टकराव में बदल गया है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'मोहरा' बताते हुए माफी और जवाबदेही की माँग की है। बंगाल में 7.74 लाख प्रभावित मतदाताओं का आँकड़ा और सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन का हवाला — यह लड़ाई अब सड़क से संसद तक जाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 3 अक्टूबर 2026 को 'मोहरा' करार देते हुए चुनाव आयोग से सार्वजनिक माफी की माँग की।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 7,74,000 मतदाता एसआईआर विवाद से प्रभावित हुए हैं।
भूपेश बघेल ने कहा कि CWC बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे , सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में वोट चोरी रोकने तक लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया गया।
JMM सांसद महुआ माजी का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के अन्य दो सदस्यों की जानकारी के बिना मतदाताओं को प्रभावित करने वाले निर्णय लिए।
विपक्ष ने माँग की है कि स्पष्ट किया जाए कि किसके निर्देश पर असली मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कोशिश हुई।

विपक्षी दलों ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को सत्तापक्ष का 'मोहरा' करार देते हुए आरोप लगाया कि असली मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश जानबूझकर की गई। विपक्ष की माँग है कि चुनाव आयोग देशवासियों से माफी माँगे और स्पष्ट करे कि किसके निर्देश पर यह सब हुआ।

विपक्ष के मुख्य आरोप

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग को सबसे पहले देश की जनता से माफी माँगनी चाहिए और खुलकर बताना चाहिए कि क्या हुआ, किसके कहने पर हुआ और क्यों हुआ। चौधरी ने दावा किया कि देशभर में चल रहे आंदोलन के दबाव में आयोग अपना रुख बदलने लगा है।

चौधरी ने कहा कि यह आंदोलन करीब दो साल पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुरू किया था, जिसे बाद में दूसरे दलों का भी समर्थन मिला। उन्होंने कहा: 'राहुल गांधी का उठाया हुआ एक नारा पहले देशभर का नारा बन गया — वोट दो या कुर्सी छोड़ो।'

बंगाल में 7.74 लाख मतदाताओं का सवाल

चौधरी ने यह भी रेखांकित किया कि इस विवाद का सबसे अधिक असर पश्चिम बंगाल में पड़ा है, जहाँ कथित तौर पर 7,74,000 मतदाता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग उन लोगों के लिए फिर से फॉर्म भरने की बात करता है जो वोट नहीं दे सके, तो ट्रिब्यूनल में फँसे मतदाताओं के लिए यही सुविधा क्यों नहीं दी जाती।

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस अवलोकन का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि निष्पक्ष चुनाव तभी संभव हैं जब मतदाता सूची भी निष्पक्ष और सटीक हो। चौधरी ने चेतावनी दी कि वे इस माँग को सड़क और संसद दोनों जगह उठाएँगे।

भूपेश बघेल और अन्य नेताओं के तीखे बोल

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में यह तय हो गया है कि वोट चोरी बंद होने तक यह लड़ाई जारी रहेगी। बघेल ने आरोप लगाया: 'ज्ञानेश कुमार केवल मोहरा हैं, उनके माध्यम से वोट चोरी की जा रही है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य प्रधानमंत्री को सत्ता से हटाना है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के अन्य दो सदस्यों को अँधेरे में रखकर ऐसे कदम उठाए, जिनसे असली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश हुई। उनका कहना है कि केंद्र सरकार स्वायत्त संस्थाओं में ऐसे लोगों की नियुक्ति कर रही है जो जनता के भरोसे पर खरे नहीं उतरते।

शिवसेना (उद्धव गुट) का निशाना

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि चुनाव आयोग सत्तापक्ष के इशारे पर काम कर रहा है और जब आपसी विवाद सामने आया, तब असलियत उजागर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि न केवल चुनाव आयोग, बल्कि न्यायिक व्यवस्था सहित तमाम संस्थाएँ कमज़ोर हो रही हैं और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार खतरे में हैं।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों में याचिकाएँ विचाराधीन हैं। विपक्ष ने संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे को उठाने और देशभर में जन-आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लोकतंत्र की नींव को छूता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया हो, लेकिन इस बार आयोग के भीतरी मतभेद और 7.74 लाख मतदाताओं का ठोस आँकड़ा मामले को अधिक ठोस ज़मीन पर रखता है। मुख्यधारा की कवरेज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर ज़्यादा केंद्रित है, जबकि असली सवाल यह है कि मतदाता सूची में हुई इस कथित चूक की निष्पक्ष जाँच कौन करेगा — और उसका तंत्र क्या होगा। जब तक यह स्पष्ट नहीं होता, चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर संदेह बना रहेगा।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर विवाद क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में जानबूझकर असली मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिससे उनके मताधिकार का हनन हुआ।
चुनाव आयोग से विपक्ष की मुख्य माँगें क्या हैं?
विपक्ष चाहता है कि चुनाव आयोग देश से सार्वजनिक माफी माँगे और स्पष्ट करे कि किसके निर्देश पर मतदाताओं को सूची से बाहर करने की कोशिश हुई। साथ ही ट्रिब्यूनल में फँसे मतदाताओं के लिए भी पुनः नामांकन की सुविधा देने की माँग की गई है।
पश्चिम बंगाल में कितने मतदाता इस विवाद से प्रभावित बताए जा रहे हैं?
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर 7,74,000 मतदाता इस विवाद से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने इसे देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्य बताया है।
CWC बैठक में इस मुद्दे पर क्या निर्णय हुआ?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अनुसार, कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में यह तय हुआ कि जब तक वोट चोरी नहीं रुकती, यह लड़ाई जारी रहेगी।
JMM सांसद महुआ माजी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
महुआ माजी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के अन्य दो सदस्यों की जानकारी और सहमति के बिना ऐसे कदम उठाए, जिनसे असली मतदाता मताधिकार से वंचित हुए। उनका कहना है कि केंद्र सरकार स्वायत्त संस्थाओं में अविश्वसनीय व्यक्तियों की नियुक्ति कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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