एसआईआर विवाद: विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बताया 'मोहरा', माफी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दलों ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) विवाद पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को सत्तापक्ष का 'मोहरा' करार देते हुए आरोप लगाया कि असली मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश जानबूझकर की गई। विपक्ष की माँग है कि चुनाव आयोग देशवासियों से माफी माँगे और स्पष्ट करे कि किसके निर्देश पर यह सब हुआ।
विपक्ष के मुख्य आरोप
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग को सबसे पहले देश की जनता से माफी माँगनी चाहिए और खुलकर बताना चाहिए कि क्या हुआ, किसके कहने पर हुआ और क्यों हुआ। चौधरी ने दावा किया कि देशभर में चल रहे आंदोलन के दबाव में आयोग अपना रुख बदलने लगा है।
चौधरी ने कहा कि यह आंदोलन करीब दो साल पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुरू किया था, जिसे बाद में दूसरे दलों का भी समर्थन मिला। उन्होंने कहा: 'राहुल गांधी का उठाया हुआ एक नारा पहले देशभर का नारा बन गया — वोट दो या कुर्सी छोड़ो।'
बंगाल में 7.74 लाख मतदाताओं का सवाल
चौधरी ने यह भी रेखांकित किया कि इस विवाद का सबसे अधिक असर पश्चिम बंगाल में पड़ा है, जहाँ कथित तौर पर 7,74,000 मतदाता प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आयोग उन लोगों के लिए फिर से फॉर्म भरने की बात करता है जो वोट नहीं दे सके, तो ट्रिब्यूनल में फँसे मतदाताओं के लिए यही सुविधा क्यों नहीं दी जाती।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के उस अवलोकन का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि निष्पक्ष चुनाव तभी संभव हैं जब मतदाता सूची भी निष्पक्ष और सटीक हो। चौधरी ने चेतावनी दी कि वे इस माँग को सड़क और संसद दोनों जगह उठाएँगे।
भूपेश बघेल और अन्य नेताओं के तीखे बोल
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में यह तय हो गया है कि वोट चोरी बंद होने तक यह लड़ाई जारी रहेगी। बघेल ने आरोप लगाया: 'ज्ञानेश कुमार केवल मोहरा हैं, उनके माध्यम से वोट चोरी की जा रही है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य प्रधानमंत्री को सत्ता से हटाना है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने आयोग के अन्य दो सदस्यों को अँधेरे में रखकर ऐसे कदम उठाए, जिनसे असली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश हुई। उनका कहना है कि केंद्र सरकार स्वायत्त संस्थाओं में ऐसे लोगों की नियुक्ति कर रही है जो जनता के भरोसे पर खरे नहीं उतरते।
शिवसेना (उद्धव गुट) का निशाना
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि चुनाव आयोग सत्तापक्ष के इशारे पर काम कर रहा है और जब आपसी विवाद सामने आया, तब असलियत उजागर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि न केवल चुनाव आयोग, बल्कि न्यायिक व्यवस्था सहित तमाम संस्थाएँ कमज़ोर हो रही हैं और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार खतरे में हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों में याचिकाएँ विचाराधीन हैं। विपक्ष ने संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे को उठाने और देशभर में जन-आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।