एसआईआर पर विपक्ष के आरोप भ्रामक: BJP सांसद संजय जायसवाल का पलटवार, कांग्रेस पर संस्थाओं को बदनाम करने का इल्ज़ाम
सारांश
मुख्य बातें
बिहार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद संजय जायसवाल ने 29 अक्टूबर 2026 को पटना में एक प्रेस वार्ता में विपक्ष पर एसआईआर (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) को लेकर भ्रम फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अनिवार्य प्रक्रिया है, जिस पर सियासी रंग चढ़ाना देश के हित में नहीं है।
विधान परिषद परिणामों का हवाला
जायसवाल ने कहा कि हाल के विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें वह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग करती रही है। उन्होंने तर्क दिया कि विधान परिषद चुनाव में प्रेफरेंशियल वोटिंग के कारण पहले से ही बैलेट पेपर से मतदान होता है, फिर भी 28 सीटों में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली। इसी प्रकार कर्नाटक में भी कांग्रेस चारों सीटें हार गई।
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दल चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग, न्यायपालिका तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने की रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने इसे 'हार की राजनीति' करार दिया।
एसआईआर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जायसवाल ने एसआईआर का बचाव करते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया है जो वर्ष 1950 से लागू है। उनके अनुसार, अब तक कुल आठ बार एसआईआर की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है, जिनमें से सात बार कांग्रेस के शासनकाल में यह कदम उठाया गया था। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले वर्ष एसआईआर के दौरान 47 लाख मतदाताओं के नामों में सुधार किया गया, जिनमें मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाता शामिल थे।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश में मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस छिड़ी हुई है। कई विपक्षी दलों ने एसआईआर को अल्पसंख्यक एवं वंचित वर्गों के मतदान अधिकारों के लिए खतरा बताया है, जिसे भाजपा सिरे से खारिज करती रही है।
मतदाता सूची में प्रवेश की शर्तें और घुसपैठ का मुद्दा
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिक होना, 18 वर्ष की आयु पूरी करना और संबंधित स्थान का निवासी होना आवश्यक शर्तें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासन में बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए बसाने और मतदाता सूची में शामिल कराने का चलन बढ़ा है।
उन्होंने दावा किया — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी — कि कई जगहों पर पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों के पास 24 साउथ परगना के फर्जी आधार कार्ड मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारत सभी धर्मों के नागरिकों का देश है, किंतु बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
अरवल विधायक मनोज शर्मा का बयान
इस प्रेस वार्ता में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं अरवल विधायक मनोज शर्मा ने कहा कि एसआईआर को लेकर विपक्ष संवैधानिक प्रक्रियाओं के विरुद्ध भ्रामक प्रचार कर रहा है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा कि यह प्रावधान चुनाव आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की संवैधानिक जिम्मेदारी देता है। शर्मा ने सवाल किया कि मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
आगे क्या
जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस मिलने पर संबंधित व्यक्ति निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखकर सूची में सुधार करा सकता है। एसआईआर पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जारी यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, खासकर बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि को देखते हुए।