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पांवटा साहिब यमुना घाट की दुर्दशा पर श्रद्धालु नाराज़, नमामि गंगे की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल

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पांवटा साहिब यमुना घाट की दुर्दशा पर श्रद्धालु नाराज़, नमामि गंगे की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल

सारांश

गुरु गोबिंद सिंह जी की धरती पांवटा साहिब में यमुना घाट की बदहाली श्रद्धालुओं को निराश कर रही है। नमामि गंगे परियोजना के तहत एकमात्र मशीन से चल रहा काम और सुविधाओं का अभाव बड़ा सवाल खड़ा करता है — आस्था के इस केंद्र को विकास का इंतज़ार कब तक?

मुख्य बातें

पांवटा साहिब ( सिरमौर, हिमाचल प्रदेश ) के यमुना घाट पर सफाई और सुविधाओं की कमी को लेकर 14 जून को श्रद्धालुओं ने चिंता जताई।
नमामि गंगे परियोजना के तहत घाट पर केवल एक मशीन से काम चल रहा है, जिसे श्रद्धालुओं ने अपर्याप्त बताया।
दिल्ली से आए श्रद्धालुओं ने स्नान और धार्मिक अनुष्ठान के लिए बेहतर व्यवस्था की माँग की।
श्रद्धालुओं ने गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल पर दिल्ली के गुरुद्वारों जैसी सुविधाएँ विकसित करने की अपील की।
प्रशासन से माँग — परियोजना में तेज़ी लाकर घाट को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त धार्मिक स्थल बनाया जाए।

पांवटा साहिब (सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) में यमुना घाट की बदहाल सफाई व्यवस्था और नदी के घटते जलस्तर ने 14 जून को देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी। केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना के तहत यहाँ चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों की सुस्त गति पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस स्थल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अनुरूप यहाँ बुनियादी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।

घाट पर क्या है स्थिति

दिल्ली से अपने जत्थे के साथ पांवटा साहिब पहुँचे एक श्रद्धालु ने बताया कि गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएँ — ठहरने के कमरे, भोजन व्यवस्था — संतोषजनक हैं और पूर्व-बुकिंग से उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। हालाँकि, यमुना तट पर पहुँचते ही उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने कहा कि नदी के किनारे सफाई और सौंदर्यीकरण का काम बेहद धीमी गति से हो रहा है और वहाँ केवल एक मशीन से काम चलाया जा रहा है।

श्रद्धालु के अनुसार, इतनी महत्त्वपूर्ण नदी के संरक्षण के लिए एकमात्र मशीन की तैनाती पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार इस कार्य को वास्तव में प्राथमिकता देती, तो यहाँ अधिक संसाधन और मशीनरी लगाई जाती।

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व

श्रद्धालुओं ने रेखांकित किया कि पांवटा साहिब का यमुना घाट गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और सिख इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके लिए यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि आस्था और इतिहास का प्रतीक है। इसी कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालु चाहते हैं कि घाट का विकास इस विरासत के अनुकूल हो और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिले।

एक श्रद्धालु ने दिल्ली के विभिन्न गुरुद्वारों और सरोवरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ स्नान के लिए व्यवस्थित और सुरक्षित इंतजाम हैं। उन्होंने माँग की कि पांवटा साहिब के यमुना घाट पर भी इसी तरह की सुविधाएँ विकसित की जाएँ, ताकि श्रद्धालु धार्मिक स्नान कर सकें।

नमामि गंगे परियोजना पर सवाल

गौरतलब है कि नमामि गंगे परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नदी संरक्षण पहल है, जिसके तहत यमुना सहित देश की प्रमुख नदियों के किनारों के विकास और सफाई का काम किया जा रहा है। पांवटा साहिब में इस परियोजना के तहत काम की धीमी रफ्तार देख श्रद्धालुओं ने परियोजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।

श्रद्धालुओं की माँगें और आगे की राह

श्रद्धालुओं ने प्रशासन और संबंधित विभागों से माँग की है कि नमामि गंगे परियोजना के कार्यों में तेज़ी लाई जाए और यमुना घाट को एक स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। उनका कहना है कि पांवटा साहिब देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए यहाँ बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। दिल्ली से आए श्रद्धालु ने बताया कि वे घाट पर स्नान की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन मौजूदा हालात देख केवल गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेककर वापस लौटने का निर्णय लेना पड़ा। यदि शीघ्र सुधार नहीं हुए, तो यह स्थान अपनी धार्मिक पर्यटन क्षमता को पूरी तरह साकार नहीं कर पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीन पर एक मशीन से काम चलाया जा रहा है। गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़े इस स्थान पर लाखों श्रद्धालु आते हैं — ऐसे में बुनियादी घाट सुविधाओं का अभाव केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, धार्मिक पर्यटन की अनदेखी भी है। सवाल यह है कि परियोजना की निगरानी और जवाबदेही का तंत्र कहाँ है, और क्या स्थानीय प्रशासन केंद्रीय योजनाओं को ज़मीन पर उतारने में सक्षम है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पांवटा साहिब के यमुना घाट पर क्या समस्याएँ हैं?
पांवटा साहिब के यमुना घाट पर सफाई की अपर्याप्त व्यवस्था, नदी का घटता जलस्तर और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रमुख समस्याएँ हैं। स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सुरक्षित इंतजाम भी उपलब्ध नहीं हैं।
नमामि गंगे परियोजना पांवटा साहिब में क्या काम कर रही है?
नमामि गंगे परियोजना के तहत पांवटा साहिब में यमुना घाट के सौंदर्यीकरण और सफाई का काम चल रहा है, लेकिन श्रद्धालुओं के अनुसार वहाँ केवल एक मशीन तैनात है और काम की गति बेहद धीमी है। परियोजना की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए गए हैं।
पांवटा साहिब का यमुना घाट धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
पांवटा साहिब का यमुना घाट गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और सिख इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह स्थान देश-विदेश से आने वाले लाखों सिख श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
श्रद्धालुओं ने प्रशासन से क्या माँगें की हैं?
श्रद्धालुओं ने माँग की है कि नमामि गंगे परियोजना के कार्यों में तेज़ी लाई जाए, अधिक मशीनरी और संसाधन तैनात किए जाएँ, और यमुना घाट को दिल्ली के गुरुद्वारों की तर्ज़ पर स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
क्या पांवटा साहिब में गुरुद्वारे की सुविधाएँ ठीक हैं?
हाँ, दिल्ली से आए श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं — ठहरने के कमरे और समग्र व्यवस्था — की सराहना की। उनकी शिकायत केवल यमुना घाट की स्थिति और नमामि गंगे परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर है।
राष्ट्र प्रेस
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