यमुना सफाई के लिए दिल्ली सरकार का नया एक्शन प्लान: अनिल गोयल की जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- यमुना की सफाई के लिए सरकार ने एक्शन प्लान तैयार किया है।
- गुलाबी-सफेद झाग वर्षों से जमा कचरे का परिणाम है।
- 35 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
- दिल्ली के बजट में 9,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
- प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी की सफाई के लिए सरकार ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। भाजपा विधायक अनिल गोयल ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नदी में जो झाग दिखाई देता है, उसका गुलाबी या सफेद रंग कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि यह वर्षों से जमा 'लिगेसी वेस्ट' का नतीजा है।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस को बताया कि यमुना में झाग बनने का मुख्य कारण रासायनिक प्रतिक्रियाएं हैं। जब औद्योगिक कचरा, सीवेज, या अन्य वेस्ट पानी में मिलते हैं, तो झाग का निर्माण होता है। इसके अलावा, जब पानी तेज धारा में बहते हुए किनारों या संरचनाओं से टकराता है, जैसे कालिंदी क्षेत्र के बैराज, तब भी झाग उत्पन्न होता है। जो गुलाबी या सफेद झाग दिखाई देता है, वह लंबे समय से जमा कचरे का प्रभाव है।
अनिल गोयल ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 27 वर्षों में दिल्ली की पूर्व सरकारों, चाहे वे कांग्रेस हों या आम आदमी पार्टी, ने इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए, जिसके परिणामस्वरूप समस्या अब गंभीर हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि अब दिल्ली सरकार इस स्थिति में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। औद्योगिक कचरे और सीवेज के निस्तारण के लिए बड़े पैमाने पर कार्य चल रहा है। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहाँ पहले सीवेज की व्यवस्था नहीं थी, वहां 35 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ की गई है।
इसके साथ ही, यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नालों में से 11 को पिछले एक वर्ष में टैप किया जा चुका है, ताकि गंदा पानी सीधे नदी में न जाए। शेष नालों पर भी कार्य जारी है।
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिना ट्रीटमेंट के औद्योगिक कचरा और रसायन नदी में छोड़ने वाली इकाइयों के खिलाफ कठोर कदम उठा रहा है।
अनिल गोयल ने कहा कि दिल्ली के बजट में भी पानी और सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी गई है। पिछले बजट में लगभग 9,000 करोड़ रुपए इस क्षेत्र के लिए आवंटित किए गए थे। इसके अलावा, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पहली बार 57,000 करोड़ रुपए का बड़ा ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जो भविष्य में जल निकासी और सफाई व्यवस्था को मजबूत करेगा। साथ ही, केंद्र सरकार की ओर से भी यमुना की सफाई के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं।
भाजपा विधायक ने बताया कि नदी की सफाई के लिए नई आधुनिक मशीनें भी लाई गई हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा इन मशीनों का उद्घाटन किया गया है, और अब ये सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगेगा, क्योंकि नालों की डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) और सीवरेज सिस्टम को सुधारना एक लंबी प्रक्रिया है। लेकिन सरकार लगातार इस दिशा में प्रयासरत है।
--आईएएनेस
वीकेयू/एबीएम