सपा सांसद सनातन पांडे का पलटवार: 'बच्चों ने सरकार को माफ नहीं किया, पीएम की माफी बेमानी'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद सनातन पांडे ने 1 अगस्त को लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने विरोध प्रदर्शन में शामिल युवाओं को माफ करने की बात कही थी। सपा सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि प्रधानमंत्री ने बच्चों को माफ किया या नहीं — बल्कि यह है कि क्या प्रदर्शनकारी बच्चों ने सरकार को माफ किया है।
पीएम के बयान पर सपा का पलटवार
सनातन पांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश के युवाओं के विरोध प्रदर्शन से 'परेशान और भयभीत' हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'भारत के संविधान में हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का पूरा हक है। हर व्यक्ति को इस बात का पूरा हक है कि उनकी बात सुनी जाए और मानी जाए। इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।' उनके अनुसार, प्रधानमंत्री की ओर से माफी की घोषणा करने से कुछ भी हासिल नहीं होगा, क्योंकि बच्चों की कोई गलती थी ही नहीं।
पुलिस दमन के आरोप: क्या हुआ प्रदर्शन में
सपा सांसद ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी बच्चे अपनी माँगें सरकार तक पहुँचाने के लिए एकत्रित हुए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनके साथ 'दमनकारी और निर्मम' व्यवहार किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के कपड़े फाड़े गए, उनके साथ बदसलूकी की गई और कील गड़ी हुई लाठियों से मारा गया। पांडे ने कहा कि ये बच्चे बिना खाए-पीए लंबे समय तक प्रदर्शन में डटे रहे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में युवा बेरोज़गारी और सरकारी वादों के पूरे न होने को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
सनातन पांडे ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने अब तक जितने भी वादे किए, उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ। उनके अनुसार, 'किसान, व्यापारी और युवा — समाज का हर वर्ग इस सरकार से दुखी है।' उन्होंने दावा किया कि देश की जनता इस सरकार को माफ नहीं करेगी और 'यह हुकूमत बहुत जल्द जाने वाली है।'
अखिलेश यादव के बयान का समर्थन
सपा सांसद ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'भाजपा सरकार अवध एक्सप्रेस पर आई थी और अयोध्या एक्सप्रेस पर चली जाएगी।' पांडे ने कहा कि आज की तारीख में अगर कोई नेता सच में भारत के युवाओं, किसानों और देश की सीमाओं की बात करता है, तो वो अखिलेश यादव हैं — और यह बात देश की जनता भलीभाँति समझ रही है।
आगे क्या
सपा के इस पलटवार से स्पष्ट है कि विपक्ष युवा प्रदर्शनकारियों के मुद्दे को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने की रणनीति पर है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में युवा बेरोज़गारी और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर असंतोष चरम पर है। आने वाले दिनों में सपा समेत अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को और घेरने की कोशिश कर सकते हैं।