2 अक्टूबर 2026
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श्रीश्री रवि शंकर का आह्वान: महिलाओं का सम्मान करना सीखें पुरुष, योग-प्राणायाम से संभालें भावनाएँ

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श्रीश्री रवि शंकर का आह्वान: महिलाओं का सम्मान करना सीखें पुरुष, योग-प्राणायाम से संभालें भावनाएँ

सारांश

आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रवि शंकर ने एक्स पर लिखा कि पुरुषों को महिलाओं को 'वस्तु' नहीं, इंसान मानना होगा — और यह संस्कार किशोरावस्था से ही विकसित होना चाहिए। देश में महिला सुरक्षा पर बहस के बीच उनका यह संदेश व्यावहारिक राह भी सुझाता है: योग, ध्यान और प्राणायाम।

मुख्य बातें

श्रीश्री रवि शंकर ने 2 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर महिला सम्मान पर पुरुषों से बदलाव की अपील की।
उन्होंने कहा — 'पुरुषों को महिलाओं को वस्तु की तरह नहीं देखना चाहिए' और संवेदनशीलता ज़रूरी है।
सम्मान के संस्कार किशोरावस्था से विकसित करने की ज़रूरत पर बल दिया।
युवाओं के लिए योग, ध्यान, संगीत, नृत्य और प्राणायाम को भावना-प्रबंधन का कारगर साधन बताया।
यह बयान दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की घटनाओं के बीच आया।

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रवि शंकर ने 2 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए पुरुषों से महिलाओं के प्रति अपना नज़रिया बदलने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं का अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना समाज में एक अनिवार्य और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।

महिला सम्मान पर गुरुदेव का संदेश

श्रीश्री रवि शंकर ने अपने एक्स पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, उनके प्रति ज़्यादा संवेदनशील होना चाहिए और उन्हें सिर्फ एक 'वस्तु' की तरह नहीं देखना चाहिए।' उनका यह बयान देश में महिला सुरक्षा को लेकर जारी बहस के बीच आया है।

उन्होंने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि सम्मान और संवेदनशीलता के संस्कार बचपन और किशोरावस्था से ही विकसित किए जाने चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी एक संतुलित एवं सम्मानजनक सोच के साथ समाज में अपना योगदान दे सके।

युवा पुरुषों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन

गुरुदेव ने युवा पुरुषों को भावनात्मक परिपक्वता की दिशा में व्यावहारिक सुझाव भी दिए। उन्होंने लिखा, 'युवा पुरुषों को काम-वासना, गुस्से और दूसरी तीव्र भावनाओं को सही और स्वस्थ तरीके से संभालने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने का तरीका सीखना चाहिए।'

उन्होंने संगीत, नृत्य, शारीरिक व्यायाम, योग और ध्यान जैसी गतिविधियों को इस दिशा में कारगर बताया। उनके अनुसार ये अभ्यास न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता में भी सहायक होते हैं।

प्राणायाम की अहमियत

श्रीश्री रवि शंकर ने विशेष रूप से प्राणायाम के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नियमित प्राणायाम से मन शांत होता है और व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ पाता है। उनके अनुसार बेहतर संतुलन, संवेदनशीलता, समझदारी और सहानुभूति विकसित करने में प्राणायाम अत्यंत असरदार सिद्ध हो सकता है।

देश की पृष्ठभूमि और प्रासंगिकता

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की घटनाओं ने जनमानस को झकझोर दिया था। देश में महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता को लेकर सार्वजनिक विमर्श लगातार तेज़ हो रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक सभी मंचों पर महिलाओं के सशक्तीकरण की माँग ज़ोर पकड़ रही है। श्रीश्री रवि शंकर जैसे प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यक्तित्व का इस विषय पर सार्वजनिक रूप से आवाज़ उठाना इस बहस को नई दिशा दे सकता है।

आगे की राह

आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रमों में पहले से ही योग, ध्यान और प्राणायाम के ज़रिए भावनात्मक विकास पर ज़ोर दिया जाता है। गुरुदेव के इस संदेश से उम्मीद जताई जा रही है कि लैंगिक संवेदनशीलता को सामाजिक और आध्यात्मिक शिक्षा के केंद्र में लाया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या आध्यात्मिक मंचों पर उठाई गई ऐसी आवाज़ें नीतिगत बदलावों में तब्दील हो पाती हैं। भारत में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के आँकड़े वर्षों से ऊँचे बने हुए हैं, और इससे पहले भी कई प्रभावशाली हस्तियाँ सोशल मीडिया पर इसी तरह के संदेश दे चुकी हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या इन विचारों को स्कूली पाठ्यक्रम, परिवार और समुदाय स्तर पर संस्थागत रूप दिया जाएगा — केवल एक्स पोस्ट तक सीमित रखा जाएगा या ज़मीन पर उतारा जाएगा। योग और प्राणायाम के सुझाव व्यावहारिक हैं, परंतु लैंगिक हिंसा की जड़ें सामाजिक-आर्थिक असमानता में भी हैं, जिन्हें केवल भावना-प्रबंधन से नहीं सुलझाया जा सकता।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीश्री रवि शंकर ने महिलाओं के बारे में क्या कहा?
श्रीश्री रवि शंकर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, उनके प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उन्हें 'वस्तु' की तरह नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं का अपने हक के लिए आवाज़ उठाना समाज में एक सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
श्रीश्री रवि शंकर ने युवाओं को भावना-प्रबंधन के लिए क्या उपाय सुझाए?
उन्होंने संगीत, नृत्य, शारीरिक व्यायाम, योग, ध्यान और प्राणायाम को कारगर साधन बताया। उनके अनुसार प्राणायाम से मन शांत होता है और व्यक्ति में संवेदनशीलता एवं सहानुभूति विकसित होती है।
यह बयान किस संदर्भ में आया?
यह बयान दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की हालिया घटनाओं और देश में महिला सुरक्षा को लेकर जारी सार्वजनिक बहस के बीच आया। देश में लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण की माँग लगातार तेज़ हो रही है।
श्रीश्री रवि शंकर कौन हैं?
श्रीश्री रवि शंकर आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक और भारत के प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं। उनके संगठन के माध्यम से विश्वभर में योग, ध्यान और तनाव-प्रबंधन के कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
बच्चों और किशोरों में सम्मान के संस्कार कैसे विकसित हों?
श्रीश्री रवि शंकर के अनुसार, महिलाओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता की भावना किशोरावस्था से ही विकसित की जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने योग, ध्यान और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रारंभिक शिक्षा का हिस्सा बनाने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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