सुखदेव थापर जयंती: 15 मई 1907 को जन्मे इस क्रांतिकारी ने 24 वर्ष की आयु में दी थी शहादत

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सुखदेव थापर जयंती: 15 मई 1907 को जन्मे इस क्रांतिकारी ने 24 वर्ष की आयु में दी थी शहादत

सारांश

15 मई 1907 को लायलपुर में जन्मे सुखदेव थापर ने 'नौजवान भारत सभा' की स्थापना कर युवाओं में क्रांति की अलख जगाई। जलियांवाला बाग नरसंहार से आहत इस क्रांतिकारी ने भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी और 23 मार्च 1931 को मात्र 24 वर्ष की आयु में फाँसी के फंदे को चूम लिया।

मुख्य बातें

सुखदेव थापर का जन्म 15 मई 1907 को लुधियाना के लायलपुर में हुआ था।
मात्र तीन वर्ष की आयु में पिता का निधन; विपरीत परिस्थितियों में पले और देशभक्ति की राह चुनी।
1919 के जलियांवाला बाग नरसंहार ने उनके क्रांतिकारी संकल्प को और दृढ़ किया।
वर्ष 1926 में लाहौर में 'नौजवान भारत सभा' की स्थापना की, जिसके वे मुख्य संयोजक थे।
लाहौर षड्यंत्र मामले में भगत सिंह और राजगुरु के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी दी गई।
शहादत के समय आयु मात्र 24 वर्ष ; महात्मा गांधी को लिखा उनका जेल-पत्र आज भी ऐतिहासिक दस्तावेज माना जाता है।

क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी सुखदेव थापर का जन्म 15 मई 1907 को लुधियाना के लायलपुर में हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव की त्रिमूर्ति को अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। मात्र 24 वर्ष की आयु में देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सुखदेव आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

बचपन और प्रारंभिक जीवन

सुखदेव थापर जब मात्र तीन वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। विपरीत परिस्थितियों में पले-बढ़े सुखदेव के मन में बचपन से ही देश के लिए कुछ कर गुजरने की ललक थी। लायलपुर के सनातन धर्म हाईस्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने लाहौर के नेशनल कॉलेज में प्रवेश लिया, जहाँ उनकी भेंट भगत सिंह से हुई — और यही मुलाकात भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के एक नए अध्याय की शुरुआत बनी।

जलियांवाला बाग और क्रांति की राह

सन 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार के समय सुखदेव की आयु लगभग 12 वर्ष थी। इस हृदयविदारक घटना ने उनके किशोर मन पर अमिट छाप छोड़ी और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध उनके संकल्प को और दृढ़ किया। गौरतलब है कि यह वही दौर था जब पूरे देश में राष्ट्रीय चेतना तीव्र गति से जाग रही थी।

वर्ष 1926 में लाहौर में 'नौजवान भारत सभा' की स्थापना हुई, जिसके मुख्य संयोजक सुखदेव थापर थे। इस संगठन ने युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाने और क्रांतिकारी विचारों को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कहा जाता है कि सुखदेव इस युवा क्रांतिकारी आंदोलन की नींव और रीढ़ थे।

लाला लाजपत राय और बदले की प्रतिज्ञा

'साइमन कमीशन' के विरोध में निकाली गई रैली पर हुए लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनका निधन हो गया। इस घटना ने सुखदेव और भगत सिंह को झकझोर दिया और दोनों ने बदला लेने का संकल्प लिया। यह निर्णय आगे चलकर लाहौर षड्यंत्र मामले की आधारशिला बना।

गांधीजी को ऐतिहासिक पत्र

सुखदेव थापर ने जेल में रहते हुए महात्मा गांधी को एक पत्र लिखा था, जिसे आज भी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज माना जाता है। इस पत्र में उन्होंने क्रांतिकारी मार्ग और अहिंसक आंदोलन के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए अपने विचार रखे थे। यह पत्र उनकी वैचारिक परिपक्वता और राजनीतिक दूरदृष्टि का प्रमाण है।

शहादत और अमर विरासत

लाहौर षड्यंत्र मामले में आरोपी ठहराए गए सुखदेव थापर, शिवराम राजगुरु और भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को फाँसी दे दी गई। मात्र 24 वर्ष की अल्पायु में सुखदेव ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। उनकी शहादत ने स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा दी और पूरे देश में क्रांति की लहर और तेज हो गई। आज भी उनका नाम भारत के सबसे साहसी सपूतों में अग्रणी स्थान पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि 'नौजवान भारत सभा' के संयोजक के रूप में उन्होंने वह संगठनात्मक ढाँचा खड़ा किया जिस पर पूरा क्रांतिकारी आंदोलन टिका था। महात्मा गांधी को लिखा उनका पत्र दर्शाता है कि वे केवल भावनावश नहीं, बल्कि वैचारिक स्पष्टता के साथ क्रांति की राह पर चले थे। उनकी जयंती हमें यह भी याद दिलाती है कि स्वतंत्रता की नींव उन अनगिनत युवाओं के बलिदान पर रखी गई है जिनके नाम इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में महज कुछ पंक्तियों तक सिमट गए हैं।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुखदेव थापर कौन थे और उनका जन्म कब हुआ था?
सुखदेव थापर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी थे, जिनका जन्म 15 मई 1907 को लुधियाना के लायलपुर में हुआ था। वे भगत सिंह और राजगुरु के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष करने वाली त्रिमूर्ति के अभिन्न अंग थे।
सुखदेव थापर को फाँसी कब और क्यों दी गई?
सुखदेव थापर को 23 मार्च 1931 को लाहौर षड्यंत्र मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद भगत सिंह और राजगुरु के साथ फाँसी दी गई। ब्रिटिश सरकार ने उन पर क्रांतिकारी गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप लगाया था।
'नौजवान भारत सभा' क्या थी और इसमें सुखदेव की क्या भूमिका थी?
'नौजवान भारत सभा' वर्ष 1926 में लाहौर में स्थापित एक क्रांतिकारी युवा संगठन था, जिसके मुख्य संयोजक सुखदेव थापर थे। इस संगठन का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति की भावना जाग्रत करना और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशक्त आंदोलन खड़ा करना था।
जलियांवाला बाग नरसंहार का सुखदेव पर क्या प्रभाव पड़ा?
सन 1919 में जलियांवाला बाग नरसंहार के समय सुखदेव की आयु लगभग 12 वर्ष थी। इस दर्दनाक घटना ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध उनके संकल्प को और मजबूत किया।
सुखदेव ने महात्मा गांधी को पत्र क्यों लिखा था?
सुखदेव थापर ने जेल में रहते हुए महात्मा गांधी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने क्रांतिकारी मार्ग और अहिंसक आंदोलन के बीच के वैचारिक अंतर को स्पष्ट किया था। यह पत्र आज भी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज माना जाता है जो उनकी वैचारिक परिपक्वता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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