सुनेत्रा पवार का एनसीपी अध्यक्ष चुनाव वैध, कानूनी नोटिस के बावजूद तटकरे ने फूट की अटकलें खारिज कीं
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि सुनेत्रा पवार का पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्वाचन पूरी तरह वैध है और इसे पार्टी संविधान तथा निर्धारित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुरूप संपन्न कराया गया। यह बयान पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह द्वारा चुनाव को चुनौती देते हुए कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद आया है।
कानूनी नोटिस की पृष्ठभूमि
9 जुलाई 2026 को सच्चिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और राष्ट्रीय महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में माँग की गई है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की पूरी प्रक्रिया को अवैध, अस्तित्वहीन (नॉन-एस्ट) और निरस्त घोषित किया जाए।
सिंह का दावा है कि 17 फरवरी 2026 के पार्टी रिकॉर्ड के अनुसार, अजित पवार के निधन के पश्चात राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष का दायित्व संभालना था। परंतु उनके अनुसार, 18 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने पार्टी संविधान का पालन किए बिना राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाने और स्थायी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव पारित करा दिया।
तटकरे का पलटवार
पत्रकारों से बातचीत में तटकरे ने कहा कि पार्टी शीर्ष नेतृत्व का चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ और इसमें संगठन के सभी संवैधानिक प्रावधानों तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। उन्होंने कहा, "पार्टी में किसी तरह की फूट या मतभेद नहीं है। सुनेत्रा पवार का राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चुनाव संगठन के नियमों और संविधान के अनुरूप हुआ है।"
तटकरे ने यह भी कहा कि पार्टी को मिले कानूनी नोटिस का उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत जवाब दिया जाएगा, लेकिन उसमें लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं और यह पार्टी में विवाद पैदा करने की कोशिश मात्र है।
प्रफुल्ल पटेल का समर्थन
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने भी पार्टी में एकजुटता की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सभी वरिष्ठ नेता सुनेत्रा पवार के साथ मिलकर राजनीतिक विषयों पर चर्चा करते हैं और संगठन में किसी तरह का मतभेद नहीं है। पटेल ने सच्चिदानंद सिंह के पत्र को विशेष महत्व देने से इनकार करते हुए कहा कि इस कानूनी नोटिस से उनका कोई संबंध नहीं है।
पार्टी का आधिकारिक रुख
पार्टी सूत्रों के अनुसार, एनसीपी नेतृत्व इस कानूनी नोटिस को किसी बड़े संगठनात्मक संकट के बजाय एक व्यक्तिगत शिकायत के रूप में देख रहा है। पार्टी का कहना है कि पूरा संगठन नई राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ एकजुट है। गौरतलब है कि बृजमोहन श्रीवास्तव निर्वाचन आयोग के लिए पार्टी के नोडल अधिकारी भी हैं, जिससे यह विवाद संगठनात्मक स्तर से आगे कानूनी और चुनावी निहितार्थ भी रखता है।
आने वाले दिनों में पार्टी का कानूनी जवाब और निर्वाचन आयोग की संभावित भूमिका इस विवाद की दिशा तय करेगी।