23 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सुपर अल नीनो से भारत में 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान, वैश्विक आँकड़ा 4.51 लाख: क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सुपर अल नीनो से भारत में 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान, वैश्विक आँकड़ा 4.51 लाख: क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब

सारांश

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट के अनुसार 'सुपर अल नीनो' की भीषण गर्मी से वैश्विक स्तर पर 4,51,000 और भारत में 15,800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं — और यह केवल गर्मी से है। नेपाल बाढ़ से 65 गुना बड़ा यह खतरा वैश्विक दक्षिण पर सबसे भारी पड़ेगा, लेकिन समय पर कार्रवाई से हज़ारों जीवन बचाए जा सकते हैं।

मुख्य बातें

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की 23 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 'सुपर अल नीनो' से अत्यधिक गर्मी के कारण 4,51,000 मौतों का वैश्विक अनुमान।
भारत में 15,800 अतिरिक्त मौतें होने की आशंका — सूखे, बाढ़ और जंगल की आग से होने वाली मौतें इसमें शामिल नहीं।
अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में 66,800 मौतों का अनुमान; अकेले नाइजीरिया में 31,400 ।
यह अनुमानित मृत्यु संख्या हाल की नेपाल बाढ़ के 6,800 पीड़ितों से लगभग 65 गुना अधिक।
माइकल ग्रीनस्टोन (शिकागो विश्वविद्यालय) ने कहा कि यह पहली बार है जब अल नीनो के मृत्यु प्रभाव का सटीक अनुमान संभव हुआ।
प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और शीतलन केंद्र जैसे उपायों से हज़ारों मौतें टाली जा सकती हैं।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की 23 सितंबर 2026 को जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष के 'सुपर अल नीनो' के कारण अत्यधिक गर्मी से वैश्विक स्तर पर 4,51,000 लोगों की मौत होने का अनुमान है — जिनमें से 15,800 मौतें अकेले भारत में होने की आशंका जताई गई है। यह रिपोर्ट अल नीनो के पहले छह महीनों के आँकड़ों पर आधारित है और इसे उन क्षेत्रों की पहचान के लिए तैयार किया गया है जहाँ आपातकालीन कार्रवाई सर्वाधिक जीवन बचा सकती है।

रिपोर्ट की मुख्य चेतावनी

रिपोर्ट के अनुसार ये अनुमानित मौतें केवल अत्यधिक गर्मी से हैं — इनमें अल नीनो के कारण संभावित सूखे, जंगल की आग और बाढ़ से होने वाली मौतें शामिल नहीं हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि बढ़ते तापमान और वर्षा के बदलते पैटर्न के चलते इन प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान अलग और अतिरिक्त होगा।

गौरतलब है कि यह अल नीनो अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बन सकता है, जिससे इसके प्रभावों की तीव्रता और व्यापकता दोनों बढ़ जाती हैं। तुलना के लिए, अनुमानित 4,51,000 मौतें हाल ही में नेपाल में आई भीषण बाढ़ में मारे गए या लापता हुए 6,800 लोगों की संख्या से लगभग 65 गुना अधिक हैं।

विशेषज्ञ की राय

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और शिकागो विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के मिल्टन फ्रीडमैन विशिष्ट सेवा प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा, 'हम लंबे समय से फसलों पर तापमान के प्रभावों का अनुमान लगाते रहे हैं, और अब हम इसके सबसे बुरे परिणाम — मृत्यु — पर पड़ने वाले प्रभाव का भी अनुमान लगा सकते हैं। इसका नतीजा यह है कि अब हम अनुमान लगा सकते हैं कि अल नीनो के कारण आने वाले महीनों में 4,51,000 लोगों की मृत्यु हो सकती है। यह इतनी बड़ी संख्या है कि स्तब्ध कर देती है, लेकिन इसमें माता-पिता और बच्चे, दादा-दादी और पड़ोसी, काम पर जाने वाले और परिवारों की देखभाल करने वाले — अपना जीवन जीने वाले लोग शामिल हैं।'

सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र

रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक गर्मी से होने वाली ये मौतें मुख्य रूप से वैश्विक दक्षिण में केंद्रित होंगी। अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में अगले छह महीनों में 66,800 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान है, जिनमें से लगभग आधी अर्थात 31,400 मौतें नाइजीरिया में होंगी। इसके अतिरिक्त सूडान में 17,500, नाइजर में 10,000 और चाड में 8,000 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।

दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में संयुक्त रूप से 19,400 तथा इंडोनेशिया में 19,300 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। दक्षिण अमेरिका में ब्राज़ील सर्वाधिक प्रभावित देश है जहाँ 13,300 मौतों की आशंका है।

भारत पर असर और बचाव के उपाय

भारत में 15,800 अतिरिक्त मौतों का यह अनुमान देश की उस आबादी के लिए गंभीर चेतावनी है जो पहले से ही लू और भीषण गर्मी की चपेट में आती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में ग्रीष्म लहरें अधिक बार और अधिक तीव्र होती जा रही हैं।

रिपोर्ट में क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की 'एडैप्टेशन इन्वेंटरी' का भी उल्लेख है, जो सहकर्मी-समीक्षित शोध के आधार पर जीवन बचाने में प्रभावी अनुकूलन उपायों का साक्ष्य आधार प्रदान करती है। इनमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, शीतलन केंद्र और बाहरी श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपाय शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन उच्च-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया को समय रहते निर्देशित किया जाए तो हज़ारों मौतों को टाला जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नीति-निर्माताओं को 'रिएक्ट' नहीं बल्कि 'प्रिपेयर' करने का अवसर देती है। भारत के संदर्भ में 15,800 का आँकड़ा उन राज्यों पर गहरा सवाल खड़ा करता है जहाँ हीट एक्शन प्लान या तो कागज़ पर हैं या अपर्याप्त रूप से लागू हैं। विडंबना यह है कि यह रिपोर्ट जिन 'अनुकूलन उपायों' की सिफारिश करती है — शीतलन केंद्र, बाहरी मज़दूरों की सुरक्षा — वे सस्ते और सिद्ध हैं, फिर भी सबसे ज़्यादा प्रभावित वैश्विक दक्षिण के पास उन्हें लागू करने की क्षमता सबसे कम है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुपर अल नीनो क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है?
अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है जो वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है। इस वर्ष का अल नीनो 'सुपर' इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बन सकता है, जिससे अत्यधिक गर्मी, सूखा, बाढ़ और जंगल की आग की घटनाएँ असामान्य रूप से तीव्र होने की आशंका है।
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट में भारत के लिए क्या अनुमान लगाया गया है?
रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष के सुपर अल नीनो के कारण अत्यधिक गर्मी से भारत में 15,800 अतिरिक्त मौतें होने की आशंका है। यह अनुमान केवल गर्मी से होने वाली मौतों का है — सूखे, बाढ़ या जंगल की आग से होने वाली संभावित मौतें इसमें शामिल नहीं हैं।
वैश्विक स्तर पर सबसे ज़्यादा मौतें कहाँ होने का अनुमान है?
रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक मौतें अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में होने का अनुमान है, जहाँ 66,800 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। अकेले नाइजीरिया में 31,400 , सूडान में 17,500 , नाइजर में 10,000 और चाड में 8,000 मौतों की आशंका है। दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण अमेरिका भी बुरी तरह प्रभावित होंगे।
क्या इन मौतों को रोका जा सकता है?
हाँ, रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते आपातकालीन कार्रवाई से हज़ारों मौतें टाली जा सकती हैं। इसमें प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, शीतलन केंद्र और बाहरी श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपाय जैसे सिद्ध उपाय शामिल हैं जो क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की एडैप्टेशन इन्वेंटरी में सूचीबद्ध हैं।
यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पहली बार है जब किसी प्रयोगशाला ने अल नीनो जैसी मौसमी घटना से होने वाली मौतों का सटीक पूर्वानुमान लगाया है। माइकल ग्रीनस्टोन के अनुसार यह रिपोर्ट निर्णय लेने वालों को यह समझने में मदद करती है कि आपातकालीन संसाधन कहाँ तैनात किए जाएँ, ताकि अधिकतम जीवन बचाया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले