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यूएन महासचिव गुटेरेस की चेतावनी: एल नीनो से भीषण गर्मी, चार मोर्चों पर तत्काल कार्रवाई ज़रूरी

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यूएन महासचिव गुटेरेस की चेतावनी: एल नीनो से भीषण गर्मी, चार मोर्चों पर तत्काल कार्रवाई ज़रूरी

सारांश

संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने एल नीनो और रिकॉर्ड समुद्री तापमान का हवाला देते हुए चार मोर्चों पर तत्काल कार्रवाई की माँग की — लोगों की सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल, ऊष्मा-प्रतिरोधी भवन और जीवाश्म ईंधन पर रोक। उनका संदेश स्पष्ट था: गर्मी की शुरुआत खत्म हो चुकी है।

मुख्य बातें

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 1 अगस्त को एल नीनो जनित भीषण गर्मी से निपटने के लिए तत्काल वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया।
डब्ल्यूएमओ के अनुसार अक्टूबर तक पृथ्वी के लगभग हर भू-भाग पर सामान्य से अधिक गर्मी रहने की संभावना है।
प्रशांत महासागर का तापमान एल नीनो के इतिहास में अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है और अभी भी बढ़ रहा है।
भारत में मानसून पहले से ही औसत से काफी कम रहा है; दक्षिण एशिया सहित कई क्षेत्रों में शुष्क स्थिति का पूर्वानुमान।
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि हर नया जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट भविष्य की हीटवेव को और घातक बनाता है।
चार सूत्रीय कार्ययोजना में गर्मी-स्वास्थ्य कार्य योजना , पूर्व चेतावनी प्रणाली , सुरक्षित कार्यस्थल और ऊष्मा-प्रतिरोधी भवन शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 1 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एल नीनो के कारण बढ़ती भीषण गर्मी से निपटने के लिए दुनिया भर की सरकारों और नियोक्ताओं से तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के ताज़ा एल नीनो पूर्वानुमान का हवाला देते हुए कहा कि जलवायु संकट अब भविष्य की चुनौती नहीं, बल्कि वर्तमान का खतरा बन चुका है।

एल नीनो और रिकॉर्ड तोड़ती गर्मी

डब्ल्यूएमओ के नए पूर्वानुमान के अनुसार, इस मौसम में रिकॉर्ड तोड़ने वाले हीट डोम, विनाशकारी जंगल की आग, झुलसाने वाले तापमान में हज़ारों जानें जाना और समुद्र की सतह का रिकॉर्ड-उच्च तापमान दर्ज किया जा रहा है। गुटेरेस ने कहा, "एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का पानी इतना गर्म पहले कभी नहीं हुआ था और तापमान अब भी बढ़ रहा है।" संगठन के अनुमान के अनुसार, अक्टूबर तक पृथ्वी के लगभग हर भू-भाग पर सामान्य से अधिक गर्मी रहने की संभावना है।

भारत सहित दुनिया भर पर असर

गुटेरेस ने चेतावनी दी कि एल नीनो केवल गर्मी ही नहीं लाता, बल्कि यह वैश्विक वर्षा के पैटर्न को भी गहराई से प्रभावित करता है। भारत में मानसून पहले से ही औसत से काफी कम रहा है। उन्होंने कहा कि मध्य अमेरिका, कैरेबियन, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पश्चिम प्रशांत, यूरोप और अफ्रीका में गर्म और शुष्क परिस्थितियाँ बनने का पूर्वानुमान है। यह ऐसे समय में आया है जब कई देश पहले से ही जल-संकट और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।

चार मोर्चों पर कार्रवाई का आह्वान

यूएन महासचिव ने चार प्रमुख क्षेत्रों में ठोस कदम उठाने की माँग की: पहला, गर्मी के और अधिक घातक होने से पहले लोगों की रक्षा करना; दूसरा, कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाना; तीसरा, भवनों का निर्माण और नवीनीकरण भविष्य की गर्मी को ध्यान में रखकर करना; और चौथा, जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं पर रोक लगाकर जलवायु संकट को और न भड़काना। उन्होंने स्पष्ट किया कि "आज मंजूर किया गया हर नया जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट कल की हीटवेव को और खतरनाक बनाता है।"

सरकारों और नियोक्ताओं से अपेक्षाएँ

गुटेरेस ने ज़ोर दिया कि हर शहर और देश में गर्मी-स्वास्थ्य कार्य योजना, पूर्व चेतावनी प्रणाली और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय होने चाहिए जो समय रहते हर समुदाय तक पहुँचें। सरकारों और नियोक्ताओं को गर्मी के मानक तय करने, काम के घंटे समायोजित करने और सस्टेनेबल कूलिंग तक पहुँच को तत्काल एवं समान रूप से बढ़ाने की ज़रूरत है। शहरों, घरों, स्कूलों और अस्पतालों की डिज़ाइन में भी इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

जलवायु संकट पर कड़ा संदेश

यूएन महासचिव ने अपने संबोधन में कहा, "फैसला साफ है: जलवायु संकट बहुत ज्यादा बढ़ गया है।" उन्होंने आगाह किया कि "गर्मी की शुरुआत खत्म हो चुकी है — अब हम मुख्य घटना का इंतजार नहीं कर सकते।" गौरतलब है कि यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में एक साथ हीटवेव, सूखा और बाढ़ की घटनाएँ दर्ज की जा रही हैं — जो जलवायु विशेषज्ञों के दीर्घकालिक पूर्वानुमानों के अनुरूप है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वैश्विक उत्सर्जन में कटौती की रफ्तार अब भी लक्ष्यों से कोसों दूर है। असली सवाल यह है कि क्या इस बार की चेतावनी में कोई बाध्यकारी तंत्र है — या यह फिर से एक नैतिक आह्वान तक सीमित रहेगी। भारत जैसे देशों के लिए, जहाँ मानसून पहले से कमज़ोर है और करोड़ों लोग असंगठित क्षेत्र में धूप में काम करते हैं, गर्मी-स्वास्थ्य योजना और पूर्व चेतावनी प्रणाली की माँग बेहद प्रासंगिक है — पर इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और वित्तीय प्रतिबद्धता दोनों चाहिए, जिनका अभी अभाव है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एल नीनो क्या है और यह गर्मी को कैसे बढ़ाता है?
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे दुनिया भर में तापमान और वर्षा के पैटर्न प्रभावित होते हैं। डब्ल्यूएमओ के अनुसार, वर्तमान एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है और अभी भी बढ़ रहा है।
गुटेरेस ने भीषण गर्मी से निपटने के लिए क्या चार कदम सुझाए?
यूएन महासचिव ने चार मोर्चों पर कार्रवाई का आह्वान किया: गर्मी के और घातक होने से पहले लोगों की रक्षा करना, कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाना, भवनों को भविष्य की गर्मी के अनुकूल बनाना और जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं को मंजूरी देना बंद करना। उन्होंने हर देश में गर्मी-स्वास्थ्य कार्य योजना और पूर्व चेतावनी प्रणाली लागू करने की भी माँग की।
भारत पर एल नीनो का क्या असर पड़ रहा है?
भारत में मानसून पहले से ही औसत से काफी कम रहा है, जिसे एल नीनो के प्रभाव से जोड़ा जा रहा है। दक्षिण एशिया में गर्म और शुष्क परिस्थितियाँ बनने का पूर्वानुमान है, जो कृषि, जल आपूर्ति और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
डब्ल्यूएमओ का अक्टूबर तक का तापमान पूर्वानुमान क्या है?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुमान के अनुसार अक्टूबर तक पृथ्वी के लगभग हर भू-भाग पर सामान्य से अधिक गर्मी रहने की संभावना है। यह पूर्वानुमान मध्य अमेरिका, कैरेबियन, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण एशिया, यूरोप और अफ्रीका को विशेष रूप से प्रभावित करने वाला बताया गया है।
जीवाश्म ईंधन और हीटवेव का क्या संबंध है?
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि आज मंजूर किया गया हर नया जीवाश्म ईंधन प्रोजेक्ट भविष्य की हीटवेव को और खतरनाक और दुनिया को कम सुरक्षित बनाता है। जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें वैश्विक तापमान वृद्धि की मुख्य वजह मानी जाती हैं, जो एल नीनो जैसी प्राकृतिक घटनाओं के प्रभाव को और बढ़ा देती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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