इंडियाबुल्स वित्तीय अनियमितता मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया, EOW रिपोर्ट से स्वतंत्र होगी जांच
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और उससे संबद्ध कंपनियों पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र जांच करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सिटीजन्स व्हिसलब्लोअर फोरम की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया।
मामले की पृष्ठभूमि
जनहित याचिका में इंडियाबुल्स से जुड़ी कंपनियों पर संदिग्ध ऋण लेनदेन, धनराशि का डायवर्जन, शेयर मूल्यों में हेरफेर और ऋण की एवरग्रीनिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा पाँच लेनदेन पर आगे कार्रवाई न करने के निर्णय को चुनौती दी थी और एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच की माँग की थी।
गौरतलब है कि EOW पहले ही इन आरोपों की जांच कर चुकी थी और उसने राय दी थी कि आगे जांच आवश्यक नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह EOW की रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा, जिसमें कुछ लेनदेन के संबंध में क्लीन चिट दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश
न्यायालय ने CBI को यह स्पष्ट निर्देश दिया कि वह EOW के निष्कर्षों से प्रभावित हुए बिना सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच करे और एक विस्तृत रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। इसके अतिरिक्त, स्पेशल जज, PMLA, मुंबई को 24 अगस्त से दो सप्ताह के भीतर CBI की लंबित आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया।
न्यायालय ने EOW को भी लगभग ₹1,574 करोड़ के छठे लेनदेन से जुड़ी अपनी लंबित जांच पूरी कर नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता और CBI के तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सर्कुलर के अनुसार ₹50 करोड़ से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामलों में CBI जांच अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, धन का डायवर्जन और सार्वजनिक धन की एवरग्रीनिंग के आरोप सामने आए हैं।
CBI के वकील ने न्यायालय को बताया कि ₹1,574 करोड़ के लेनदेन की आगे की जांच के लिए उनकी आवेदन पहले से ही स्पेशल जज, PMLA, मुंबई के समक्ष लंबित है। एजेंसी ने CBI, EOW, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) और RBI के बीच समन्वय का उल्लेख करते हुए अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।
आगे क्या होगा
यह मामला अब CBI की स्वतंत्र जांच और PMLA न्यायालय के निर्णय पर केंद्रित हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने CBI को जांच की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। यह आदेश वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।