राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने CBI और ED को 8 हफ्तों में जवाब देने का निर्देश दिया

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राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने CBI और ED को 8 हफ्तों में जवाब देने का निर्देश दिया

सारांश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने CBI और ED को राहुल गांधी के खिलाफ कथित अनुपातहीन संपत्ति की याचिका पर 8 हफ्तों में जवाब माँगा है। सभी दस्तावेज सीलबंद, अगली सुनवाई 20 जुलाई को — यह मामला विपक्ष के नेता के लिए नई कानूनी चुनौती बन सकता है।

मुख्य बातें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 14 मई 2026 को CBI, ED और SFIO को 8 हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस.
विग्नेश शिशिर ने दायर की है, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर कथित अनुपातहीन संपत्ति का आरोप है।
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफर अहमद की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की।
मामले से जुड़े सभी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में सीनियर रजिस्ट्रार की हिरासत में रखे गए हैं।
अगली सुनवाई 20 जुलाई को इन-चैंबर कार्यवाही के रूप में होगी।
भारत संघ को कार्मिक विभाग, राजस्व विभाग और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के माध्यम से अतिरिक्त पक्ष बनाया गया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 14 मई 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को निर्देश दिया कि वे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ कथित अनुपातहीन संपत्ति के आरोपों वाली याचिका पर आठ हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। यह आदेश कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया।

मामले का घटनाक्रम

जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफर अहमद की डिवीजन बेंच ने इन-चैंबर कार्यवाही के दौरान यह आदेश सुनाया। याचिकाकर्ता शिशिर स्वयं अदालत में उपस्थित थे। CBI की ओर से पेश वकील ने बताया कि एजेंसी को 11 मई के लिखित निर्देशों के आधार पर याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और वह आठ हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करेगी।

इसी प्रकार, ED के वकील ने 9 मई के निर्देशों का हवाला देते हुए पुष्टि की कि मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी इस एजेंसी को भी शिकायत मिल गई है और वह आरोपों की जांच करने की स्थिति में है।

अदालत की टिप्पणी और निर्देश

दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज करते हुए अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हुई है, तो उसमें लगाए गए आरोपों की जांच कानून के अनुसार की जाएगी। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि CBI और ED को कानून के तहत अनुमत उचित कदम उठाने का अधिकार है।

अदालत ने याचिकाकर्ता को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के माध्यम से भारत संघ को अतिरिक्त पक्ष के रूप में शामिल करने की अनुमति भी दी। सभी पक्षों को आठ हफ्तों के भीतर जवाबी हलफनामे दाखिल करने और शिकायत पर हुई प्रगति का ब्यौरा रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया है।

दस्तावेज़ सीलबंद, अगली सुनवाई 20 जुलाई को

जस्टिस चौहान की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया कि मामले में दाखिल पेपर-बुक और सभी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में रखे जाएं और इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार की सुरक्षित हिरासत में रहें। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को इन-चैंबर कार्यवाही के रूप में निर्धारित की गई है।

इससे पहले 6 मई को अदालत ने याचिकाकर्ता की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद पूरी पेपर-बुक सीलबंद करने और प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश प्राप्त करने के लिए समय देने का आदेश दिया था।

याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि

एस. विग्नेश शिशिर वही याचिकाकर्ता हैं जिनकी एक अन्य याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले उत्तर प्रदेश पुलिस को कथित दोहरी नागरिकता के आरोपों में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने पर विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि, बाद में जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल-न्यायाधीश बेंच ने — जिन्होंने बाद में उस मामले से स्वयं को अलग कर लिया — वह निर्देश वापस ले लिया था। बेंच ने तब कहा था कि संभावित आरोपी के रूप में राहुल गांधी को ऐसा कोई भी आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के उपयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। अगली सुनवाई में CBI और ED के जवाब यह तय करेंगे कि यह मामला जांच के किस चरण में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी राजनीतिक परतें गहरी हैं — एक भाजपा कार्यकर्ता की याचिका पर CBI और ED से जवाब माँगना, चाहे प्रक्रियागत रूप से उचित हो, विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे के खिलाफ जांच एजेंसियों के संभावित उपयोग का संकेत देता है। गौरतलब है कि इसी याचिकाकर्ता की पिछली याचिका पर दिया गया निर्देश बाद में वापस लिया जा चुका है, जो इस मामले की कानूनी मजबूती पर सवाल खड़े करता है। असली परीक्षा यह होगी कि CBI और ED अपने जवाब में क्या रुख अपनाती हैं — जांच शुरू करने का संकेत देती हैं या याचिका को निराधार बताती हैं। दस्तावेजों का सीलबंद रखा जाना और इन-चैंबर कार्यवाही इस मामले को असामान्य रूप से गोपनीय बनाती है, जो पारदर्शिता के दृष्टिकोण से चिंताजनक है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने CBI और ED को राहुल गांधी मामले में क्यों नोटिस दिया?
कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने एक आपराधिक रिट याचिका दायर की है जिसमें राहुल गांधी पर कथित अनुपातहीन संपत्ति का आरोप है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने CBI, ED और SFIO को 8 हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की गई है और यह भी इन-चैंबर कार्यवाही के रूप में होगी। तब तक सभी पक्षों को अपने जवाबी हलफनामे और शिकायत पर हुई प्रगति का ब्यौरा दाखिल करना होगा।
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर कौन हैं?
एस. विग्नेश शिशिर कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता हैं जिन्होंने इससे पहले भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ कथित दोहरी नागरिकता के आरोपों में याचिका दायर की थी। उस मामले में दिया गया निर्देश बाद में वापस ले लिया गया था।
मामले के दस्तावेज सीलबंद क्यों रखे गए हैं?
अदालत ने आदेश दिया है कि मामले की पेपर-बुक और सभी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार की सुरक्षित हिरासत में रखे जाएं। यह निर्देश 6 मई को दिया गया था और अभी भी लागू है।
क्या CBI और ED ने राहुल गांधी के खिलाफ जांच शुरू करने का संकेत दिया है?
अभी तक केवल यह स्पष्ट हुआ है कि CBI और ED दोनों को याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हो गई है। अदालत ने कहा है कि यदि शिकायत मिली है तो आरोपों की जांच कानून के अनुसार की जाएगी, लेकिन किसी भी एजेंसी ने औपचारिक जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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