राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने CBI और ED को 8 हफ्तों में जवाब देने का निर्देश दिया
सारांश
मुख्य बातें
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 14 मई 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को निर्देश दिया कि वे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ कथित अनुपातहीन संपत्ति के आरोपों वाली याचिका पर आठ हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। यह आदेश कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
मामले का घटनाक्रम
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफर अहमद की डिवीजन बेंच ने इन-चैंबर कार्यवाही के दौरान यह आदेश सुनाया। याचिकाकर्ता शिशिर स्वयं अदालत में उपस्थित थे। CBI की ओर से पेश वकील ने बताया कि एजेंसी को 11 मई के लिखित निर्देशों के आधार पर याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और वह आठ हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करेगी।
इसी प्रकार, ED के वकील ने 9 मई के निर्देशों का हवाला देते हुए पुष्टि की कि मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी इस एजेंसी को भी शिकायत मिल गई है और वह आरोपों की जांच करने की स्थिति में है।
अदालत की टिप्पणी और निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज करते हुए अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हुई है, तो उसमें लगाए गए आरोपों की जांच कानून के अनुसार की जाएगी। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि CBI और ED को कानून के तहत अनुमत उचित कदम उठाने का अधिकार है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के माध्यम से भारत संघ को अतिरिक्त पक्ष के रूप में शामिल करने की अनुमति भी दी। सभी पक्षों को आठ हफ्तों के भीतर जवाबी हलफनामे दाखिल करने और शिकायत पर हुई प्रगति का ब्यौरा रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया है।
दस्तावेज़ सीलबंद, अगली सुनवाई 20 जुलाई को
जस्टिस चौहान की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया कि मामले में दाखिल पेपर-बुक और सभी दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में रखे जाएं और इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार की सुरक्षित हिरासत में रहें। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को इन-चैंबर कार्यवाही के रूप में निर्धारित की गई है।
इससे पहले 6 मई को अदालत ने याचिकाकर्ता की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद पूरी पेपर-बुक सीलबंद करने और प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश प्राप्त करने के लिए समय देने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता की पृष्ठभूमि
एस. विग्नेश शिशिर वही याचिकाकर्ता हैं जिनकी एक अन्य याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पहले उत्तर प्रदेश पुलिस को कथित दोहरी नागरिकता के आरोपों में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने पर विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि, बाद में जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकल-न्यायाधीश बेंच ने — जिन्होंने बाद में उस मामले से स्वयं को अलग कर लिया — वह निर्देश वापस ले लिया था। बेंच ने तब कहा था कि संभावित आरोपी के रूप में राहुल गांधी को ऐसा कोई भी आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों के उपयोग को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। अगली सुनवाई में CBI और ED के जवाब यह तय करेंगे कि यह मामला जांच के किस चरण में आगे बढ़ता है।