स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नव संवत्सर पर दी शुभकामनाएं और गौ रक्षा का आह्वान किया
सारांश
Key Takeaways
- नव संवत्सर का स्वागत श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया।
- स्वामी जी ने गौ माता की रक्षा पर जोर दिया।
- इस वर्ष का राजा गुरु है, जिससे वर्षा और सुख-समृद्धि की संभावना है।
- समाज में उत्सव का माहौल रहेगा, भले ही चुनौतियाँ आएं।
- गंगा और गायों की रक्षा के संकल्प सफल रहे हैं।
वाराणसी, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इस वर्ष भारतीय नव वर्ष, विक्रम संवत 2083 का स्वागत अत्यधिक श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 'सनातन पंचांग' का उद्घाटन करते हुए सभी देशवासियों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान काशी के शंकराचार्य घाट पर प्रातः वैदिक मंत्रों के साथ उगते सूर्य को अर्घ्य देकर नए साल का स्वागत किया गया, जो एक आध्यात्मिक और सकारात्मक शुरुआत मानी जाती है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह नया साल 'रौद्र' नाम का संवत्सर है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस संवत्सर में शासक वर्ग, यानी राजा, कुछ कठोर या निष्ठुर हो सकते हैं। साथ ही, इस साल का राजा 'गुरु' है, क्योंकि वर्ष की शुरुआत गुरुवार से हुई है। शास्त्रों में यह माना जाता है कि जब वर्ष का राजा गुरु होता है तो वर्षा अच्छी होती है, पशु-पक्षी, विशेषकर गायें, खुश रहती हैं और समाज में धार्मिक कार्यों की वृद्धि होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस साल लोगों में उत्सव का माहौल रहेगा। इसका मतलब है कि भले ही कुछ कठिनाइयाँ आएं, लेकिन आम जनता संघर्ष करती रहेगी और अंततः खुशहाल और विजयी होगी। यह एक तरह का उम्मीद और सकारात्मकता का संदेश है कि कठिनाइयों के बावजूद समाज आगे बढ़ेगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस संवत्सर को 'गविष्ठी संवत्सर' घोषित किया है, जिसका मतलब है कि इस साल विशेष रूप से गौ माता की रक्षा के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि एक लक्ष्य है, जिसे इस वर्ष पूरा करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले लिए गए कई संकल्प, जैसे गंगा और गायों की रक्षा, काफी हद तक सफल रहे हैं, इसलिए अब हमें और भी मजबूती से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।