2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार: स्वामी भद्रेशदासजी की कृति 'प्रस्थान चतुष्टय ब्रह्मघोष' को मिला राष्ट्रीय सम्मान
सारांश
Key Takeaways
- स्वामी भद्रेशदासजी को 2025 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
- 'प्रस्थान चतुष्टय ब्रह्मघोष' संस्कृत साहित्य में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
- यह कृति उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, और ब्रह्मसूत्र का समन्वय प्रस्तुत करती है।
- यह पुरस्कार संस्कृत की निरंतर प्रासंगिकता को दर्शाता है।
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार ने साहित्य के क्षेत्र में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 की घोषणा की है। इस वर्ष संस्कृत भाषा के लिए यह सम्मान महान विद्वान महामहोपाध्याय स्वामी भद्रेशदासजी को उनकी अद्वितीय कृति 'प्रस्थान चतुष्टय ब्रह्मघोष' के लिए प्रदान किया गया है।
इस ग्रंथ को भारत की सर्वश्रेष्ठ संस्कृत रचना के तौर पर मान्यता प्राप्त हुई है, जिसमें हिंदू धर्म के प्रमुख शास्त्र—उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, और ब्रह्मसूत्र—के साथ-साथ भगवान स्वामिनारायण द्वारा दिए गए वचनामृत पर आधारित ब्रह्म तत्त्व का व्यापक निरूपण किया गया है।
सूत्रात्मक (सूत्र शैली) काव्यात्मक रूप में रचित यह ग्रंथ विद्वानों द्वारा दार्शनिक काव्य की उत्कृष्ट कृति माना गया है। इसकी साहित्यिक विशेषताओं और गहन दार्शनिकता को ध्यान में रखते हुए चयन समिति ने इसे वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ संस्कृत रचना के रूप में चुना है।
यह ग्रंथ भगवान स्वामिनारायण द्वारा प्रतिपादित दर्शन को साहित्यिक रूप में प्रस्तुत करता है। वर्ष 2018 में प्रकाशित इस कृति का लेखन स्वामी भद्रेशदासजी ने परम पूज्य महंत स्वामी महाराज के मार्गदर्शन में किया था।
इस पुरस्कार की घोषणा के बाद विद्वानों और साहित्य प्रेमियों में खुशी और गर्व का माहौल है।
नई दिल्ली साहित्य अकादमी ने वर्ष 2025 के अपने प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कारों की औपचारिक घोषणा करते हुए महामहोपाध्याय स्वामी भद्रेशदासजी को संस्कृत भाषा श्रेणी में विजेता घोषित किया है। उन्हें उनकी उत्कृष्ट कृति 'प्रस्थान चतुष्टय ब्रह्मघोष' के लिए सम्मानित किया गया है।
दर्शन और काव्य का अद्वितीय समन्वय: यह ग्रंथ ब्रह्म तत्त्व का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है और उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता, ब्रह्मसूत्र और वचनामृत का समन्वय करता है। सूत्रात्मक और काव्यात्मक शैली में लिखी गई यह कृति चयन समिति द्वारा 'दार्शनिक काव्य की उत्कृष्ट महाकृति' के रूप में सराही गई है।
मुख्य विशेषताएं: साहित्यिक उत्कृष्टता—छंदबद्ध संरचना और उच्च साहित्यिक प्रस्तुति, दार्शनिक महत्व—अक्षर-पुरुषोत्तम दर्शन का व्यवस्थित निरूपण, विरासत—2018 में महंत स्वामी महाराज के मार्गदर्शन में रचित।
शैक्षणिक प्रतिक्रिया: इस घोषणा से पूरे देश के विद्वानों और साहित्यिक जगत में उत्साह का संचार हुआ है। यह सम्मान संस्कृत भाषा की निरंतर प्रासंगिकता को दर्शाता है।
साहित्य अकादमी पुरस्कार: यह भारत का एक प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मान है, जो 24 भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट कृतियों को प्रदान किया जाता है।