तमिलनाडु: स्कूल पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष डॉ. सुल्तान अहमद इस्माइल पदमुक्त, नई समिति गठित होगी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने प्रसिद्ध मृदा जीवविज्ञानी और पारिस्थितिकीविद् डॉ. सुल्तान अहमद इस्माइल को राज्य स्कूल पाठ्यक्रम समिति के अध्यक्ष पद से पदमुक्त कर दिया है। स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद यह फैसला लिया गया, और संकेत हैं कि सरकार पाठ्यक्रम में आगामी बदलावों की निगरानी के लिए एक नई समिति गठित करने की तैयारी में है।
क्या है पूरा घटनाक्रम
डॉ. इस्माइल को पिछली डीएमके सरकार ने स्कूली पाठ्यक्रम संशोधन के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उन्होंने बताया कि उन्हें आधिकारिक तौर पर सूचित किया गया है कि अब उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सरकार नई समिति का गठन करने जा रही है।
गौरतलब है कि यह घटनाक्रम डॉ. इस्माइल और पूर्व स्कूली शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी की डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से हुई मुलाकात के कुछ ही सप्ताह बाद सामने आया है। इस मुलाकात में समिति की देखरेख में तैयार की गई नई पाठ्यपुस्तकें स्टालिन को भेंट की गई थीं।
डॉ. इस्माइल का बयान
सोशल मीडिया पर अपनी पदमुक्ति की जानकारी देते हुए डॉ. इस्माइल ने पिछली सरकार और परियोजना से जुड़े अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा, “मैं पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, पूर्व स्कूली शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी और इस परियोजना से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारियों का दिल से धन्यवाद करता हूं। उनके सहयोग से पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के लिए टर्म-१ की उत्कृष्ट पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा सकीं।”
उन्होंने आगे जोड़ा, “मुझे तमिलनाडु सरकार की ओर से एक आधिकारिक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि नई समिति का गठन किया जा रहा है, इसलिए मुझे इस जिम्मेदारी से मुक्त किया जा रहा है। मैं नई टीम को शुभकामनाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि वह उसी प्रगतिशील सोच को आगे बढ़ाएगी, जिसकी शुरुआत हमने की थी।”
सरकार की चुप्पी
वरिष्ठ अधिकारियों ने नई समिति के गठन की खबरों की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया। उन्होंने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि क्या मौजूदा समिति के सदस्य नए अध्यक्ष के नेतृत्व में अपना काम जारी रखेंगे।
पाठ्यक्रम सुधार की पृष्ठभूमि
पिछली सरकार द्वारा शुरू किए गए बड़े शैक्षिक सुधारों के तहत पाठ्यक्रम समिति ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण सामग्री में बदलाव करने में अहम भूमिका निभाई थी। समिति द्वारा तैयार पाठ्यपुस्तकें स्कूलों में लागू की जा चुकी हैं, और हाल ही में स्कूली शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने कक्षा १ से ३ तक के छात्रों के लिए नई किताबें जारी की थीं।
आगे क्या
नई पाठ्यक्रम समिति के गठन पर शिक्षा जगत की नजर रहेगी, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य की भविष्य की शैक्षिक सामग्री और शिक्षा नीतियों की दिशा पर पड़ सकता है।