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तमिलनाडु में पेयजल संकट: 59 बांध सूखे, 13 जिलों में 10 दिन में एक बार मिल रहा पानी

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तमिलनाडु में पेयजल संकट: 59 बांध सूखे, 13 जिलों में 10 दिन में एक बार मिल रहा पानी

सारांश

तमिलनाडु में 59 बांध पूरी तरह सूख चुके हैं और 13 जिलों में 10 दिन में एक बार पानी मिल रहा है — यह महज आँकड़ा नहीं, करोड़ों लोगों की रोज़मर्रा की मुश्किल है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता ने चेन्नई के जल स्रोतों को भी खतरे में डाल दिया है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के 90 प्रमुख बांधों में से 59 पूरी तरह सूख चुके हैं; 16 बांधों में मात्र 25–50% जल शेष।
3,489 सिंचाई टैंक रिक्त; 6,158 टैंक सूखने की कगार पर।
विरुधुनगर, तिरुची, मदुरै, तंजावुर सहित 13 जिलों में 10 दिन में एक बार पेयजल आपूर्ति।
निवासी निजी टैंकरों और अस्थायी स्रोतों पर निर्भर; बोरवेल से पर्याप्त पानी नहीं।
तिरुवल्लूर और कांचीपुरम में भूजल संकट से चेन्नई की जलापूर्ति पर भी खतरा।
आलोचकों का कहना है कि तमिलनाडु वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से नहीं कीं।

तमिलनाडु में दक्षिण-पश्चिम मानसून की लंबी विफलता के चलते पेयजल संकट विकराल रूप ले चुका है। राज्य के 90 प्रमुख बांधों में से 59 पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि 3,489 सिंचाई टैंक भी रीत गए हैं और 6,158 टैंक सूखने की कगार पर हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में अब हर 10 दिन में केवल एक बार पेयजल आपूर्ति हो रही है।

जल भंडारण की स्थिति

जल संसाधन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 90 प्रमुख बांधों और 14,000 से अधिक सिंचाई टैंकों में जल स्तर चिंताजनक स्तर तक गिर चुका है। 59 बांध पूरी तरह रिक्त हो चुके हैं, जबकि 16 बांधों में मात्र 25 से 50 प्रतिशत जल भंडारण शेष है। सतही जल स्रोतों के सिकुड़ने के साथ-साथ भूजल स्तर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है।

प्रभावित जिले और आपूर्ति की स्थिति

राज्य के 13 जिलेविरुधुनगर, तिरुवन्नामलाई, तिरुनेलवेली, तिरुचिरापल्ली (तिरुची), तूतीकोरिन (थूथुकुडी), तंजावुर, नमक्कल, पेरम्बलूर, मदुरै, शिवगंगा, धर्मपुरी, कुड्डालोर और डिंडीगुल — भीषण जल संकट से जूझ रहे हैं। जहाँ पहले सप्ताह में एक बार पेयजल मिलता था, वहाँ अब हर 10 दिन में एक बार ही आपूर्ति हो पा रही है। इससे स्थानीय निवासी निजी पानी के टैंकरों और अन्य अस्थायी स्रोतों पर निर्भर हो गए हैं।

बोरवेल और बिजली पर बढ़ता बोझ

तमिलनाडु वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड द्वारा स्थापित कई बोरवेल अब पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं दे पा रहे। अधिकारियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सीमित पानी निकालने के लिए पंपों को लंबे समय तक चलाना पड़ रहा है, जिससे बिजली की खपत बढ़ रही है लेकिन जलापूर्ति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो रहा। आलोचकों का कहना है कि बोर्ड ने सबसे अधिक प्रभावित जिलों में वैकल्पिक जलापूर्ति की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की है।

चेन्नई पर मंडराता खतरा

यह संकट केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। तिरुवल्लूर और कांचीपुरम जिलों में भूजल की बिगड़ती स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ये दोनों जिले चेन्नई के लिए पेयजल के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। गौरतलब है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता का असर पड़ोसी दक्षिणी राज्यों में भी देखा जा रहा है, जहाँ सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पर वैकल्पिक जल प्रबंधन और आपात आपूर्ति तंत्र को मजबूत करने का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मानसून सक्रिय नहीं होता, स्थिति और गंभीर हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक सिंचाई टैंकों के होते हुए भी 3,489 का पूरी तरह सूखना यह सवाल उठाता है कि वर्षा जल संचयन और टैंक पुनरुद्धार की योजनाएं कागज़ से ज़मीन तक क्यों नहीं पहुंच पाईं। चेन्नई के निकटवर्ती जिलों — तिरुवल्लूर और कांचीपुरम — में भूजल का संकट यह संकेत देता है कि अगर मानसून और देर से आया, तो महानगरीय जलापूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। बोर्ड पर वैकल्पिक व्यवस्था की विफलता के आरोप बताते हैं कि आपदा प्रबंधन की तैयारी, नीति की तुलना में अभी भी कहीं पीछे है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में पेयजल संकट कितना गंभीर है?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 90 प्रमुख बांधों में से 59 पूरी तरह सूख चुके हैं और 13 जिलों में अब हर 10 दिन में केवल एक बार पेयजल आपूर्ति हो रही है। 3,489 सिंचाई टैंक भी रिक्त हो चुके हैं।
कौन से जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं?
विरुधुनगर, तिरुवन्नामलाई, तिरुनेलवेली, तिरुचिरापल्ली, थूथुकुडी, तंजावुर, नमक्कल, पेरम्बलूर, मदुरै, शिवगंगा, धर्मपुरी, कुड्डालोर और डिंडीगुल सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं। इन जिलों में निवासी निजी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
चेन्नई की जलापूर्ति पर क्या असर पड़ेगा?
चेन्नई के लिए पेयजल के प्रमुख स्रोत माने जाने वाले तिरुवल्लूर और कांचीपुरम जिलों में भूजल की स्थिति बिगड़ रही है। यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं हुआ, तो महानगर की जलापूर्ति पर भी संकट गहरा सकता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता का क्या असर हुआ है?
मानसून की लंबी विफलता के कारण जलाशयों में पानी की आवक में भारी गिरावट आई है, जिससे सिंचाई और पेयजल दोनों प्रभावित हुए हैं। यह असर केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं, पड़ोसी दक्षिणी राज्यों में भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है।
तमिलनाडु वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड की क्या भूमिका है?
बोर्ड राज्य में पेयजल आपूर्ति के लिए ज़िम्मेदार है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि उसने सबसे प्रभावित जिलों में पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्थाएं नहीं कीं। बोरवेल से पर्याप्त पानी न मिलने के कारण पंपों को लंबे समय तक चलाना पड़ रहा है, जिससे बिजली खपत बढ़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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