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सिरुवानी बांध का जलस्तर 50 फीट क्षमता के मुकाबले 26.7 फीट, कोयंबटूर में पानी आपूर्ति 65 से घटाकर 55 एमएलडी

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सिरुवानी बांध का जलस्तर 50 फीट क्षमता के मुकाबले 26.7 फीट, कोयंबटूर में पानी आपूर्ति 65 से घटाकर 55 एमएलडी

सारांश

कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने सिरुवानी बांध के कैचमेंट में महज 7-8 मिमी बारिश दी, जबकि जरूरत थी 50-100 मिमी की। नतीजा — कोयंबटूर में पानी की दैनिक आपूर्ति 10 एमएलडी घटी, बांध का जलस्तर आधी क्षमता से भी नीचे। ₹18 करोड़ की मरम्मत परियोजना अभी स्वीकृति की राह देख रही है।

मुख्य बातें

सिरुवानी बांध का जलस्तर 23 अगस्त 2026 तक 26.7 फीट — पूर्ण क्षमता 50 फीट के मुकाबले आधे से भी कम।
कमजोर मानसून के कारण कैचमेंट में केवल 7-8 मिमी वर्षा; आवश्यकता 50-100 मिमी की थी।
टीडब्ल्यूएडी बोर्ड ने कोयंबटूर की दैनिक जल आपूर्ति 65 एमएलडी से घटाकर 55 एमएलडी की।
कोयंबटूर सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने बकाया के रूप में ₹11 करोड़ का भुगतान किया; ₹18 करोड़ की मरम्मत परियोजना स्वीकृति हेतु प्रस्तावित।
तमिलनाडु और केरल सरकारें मिलकर बांध मरम्मत की प्रशासनिक व वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया में हैं।

कोयंबटूर में पेयजल संकट गहराता जा रहा है — केरल स्थित सिरुवानी बांध के कैचमेंट क्षेत्र में कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के चलते तमिलनाडु जल आपूर्ति और जल निकासी बोर्ड (टीडब्ल्यूएडी) को शहर की दैनिक पानी आपूर्ति 65 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) से घटाकर 55 एमएलडी करनी पड़ी है। 23 अगस्त 2026 तक बांध का जलस्तर मात्र 26.7 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी पूर्ण भंडारण क्षमता 50 फीट है।

मानसून की विफलता और जलस्तर की स्थिति

टीडब्ल्यूएडी बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जलाशय में पर्याप्त जलभराव के लिए कैचमेंट क्षेत्र में 50 से 100 मिमी वर्षा आवश्यक थी। लेकिन चालू मानसून सीजन में इस क्षेत्र में केवल 7 से 8 मिमी बारिश ही दर्ज की गई — यानी आवश्यकता का दसवाँ हिस्सा भी नहीं। इस कारण बांध में पानी की आवक न्यूनतम रही और भंडार लगातार घटता गया।

यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने अंतिम चरण में है, और आने वाले हफ्तों में भारी वर्षा की संभावना और भी कम हो जाती है। गौरतलब है कि सिरुवानी जलाशय कोयंबटूर शहर के पेयजल के प्रमुख स्रोतों में से एक है, जिससे लाखों नागरिक सीधे प्रभावित होते हैं।

बांध मरम्मत का काम अभी अधर में

बांध से हो रहे जल रिसाव को रोकने के लिए प्रस्तावित मरम्मत कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। तमिलनाडु और केरल सरकारें आवश्यक कार्यों की पहचान करने और प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृतियाँ हासिल करने की प्रक्रिया में हैं।

केरल सरकार के अधिकारी बांध की मौजूदा स्थिति और जरूरी मरम्मत का विवरण देने वाली एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। यह रिपोर्ट जमा होने के बाद सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यों की पहचान की जाएगी और प्रस्ताव टीडब्ल्यूएडी बोर्ड के प्रबंध निदेशक को भेजा जाएगा। स्वीकृत धनराशि केरल के अधिकारियों को हस्तांतरित की जाएगी, जो मरम्मत कार्य को अंजाम देंगे।

वित्तीय प्रबंध और नगर निगम की भूमिका

कोयंबटूर सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने हाल ही में टीडब्ल्यूएडी बोर्ड को बकाया जल शुल्क के रूप में लगभग ₹11 करोड़ का भुगतान किया है। इसके साथ ही निगम ने जलाशय में मरम्मत और रखरखाव के लिए ₹18 करोड़ की परियोजना की स्वीकृति हेतु तमिलनाडु सरकार को एक प्रस्ताव भी सौंपा है।

अधिकारियों के अनुसार, रिसाव रोकना और अनावश्यक जल हानि को नियंत्रित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। मानसून के अंत में मरम्मत कार्य करने से आपूर्ति में न्यूनतम व्यवधान की उम्मीद है।

आम जनता पर असर

कोयंबटूर शहर में पेयजल आपूर्ति में 10 एमएलडी की कटौती का सीधा असर उन नागरिकों पर पड़ेगा जो सिरुवानी जलाशय पर निर्भर हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उपलब्ध जल भंडार के अनुसार आपूर्ति को नियंत्रित किया जा रहा है।

यदि मानसून का शेष मौसम भी कमजोर रहा, तो आने वाले महीनों में जलस्तर और नीचे जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मरम्मत कार्य की शीघ्र स्वीकृति और क्रियान्वयन ही इस संकट से दीर्घकालिक राहत का रास्ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दो राज्यों के बीच साझा जल संसाधन प्रबंधन की पुरानी जटिलताओं का प्रतिबिंब है। ₹18 करोड़ की मरम्मत परियोजना का प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद स्वीकृति प्रक्रिया में देरी यह सवाल उठाती है कि अंतर-राज्यीय जल ढाँचे में आपातकालीन निर्णय कितने धीमे हैं। जब बांध का जलस्तर आधी क्षमता से नीचे हो और मानसून विदाई पर हो, तो प्रशासनिक फाइलों की गति ही असली संकट बन जाती है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिरुवानी बांध का मौजूदा जलस्तर कितना है?
23 अगस्त 2026 तक सिरुवानी बांध का जलस्तर 26.7 फीट दर्ज किया गया है, जबकि इसकी पूर्ण भंडारण क्षमता 50 फीट है। यानी बांध अपनी क्षमता के आधे से भी कम भरा है।
कोयंबटूर में पानी की आपूर्ति क्यों घटाई गई?
कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण सिरुवानी बांध के कैचमेंट क्षेत्र में केवल 7-8 मिमी वर्षा हुई, जबकि पर्याप्त जलभराव के लिए 50-100 मिमी की जरूरत थी। इससे बांध का जलस्तर घटा और टीडब्ल्यूएडी बोर्ड को आपूर्ति 65 एमएलडी से घटाकर 55 एमएलडी करनी पड़ी।
सिरुवानी बांध की मरम्मत कब होगी?
मरम्मत कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है। केरल सरकार के अधिकारी एक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जिसके बाद प्रस्ताव टीडब्ल्यूएडी बोर्ड के प्रबंध निदेशक को भेजा जाएगा। कोयंबटूर नगर निगम ने ₹18 करोड़ की परियोजना की स्वीकृति हेतु तमिलनाडु सरकार को प्रस्ताव सौंपा है।
कोयंबटूर नगर निगम ने टीडब्ल्यूएडी बोर्ड को कितना भुगतान किया है?
कोयंबटूर सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने हाल ही में टीडब्ल्यूएडी बोर्ड को बकाया जल शुल्क के रूप में लगभग ₹11 करोड़ का भुगतान किया है।
इस जल संकट से कोयंबटूर के नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
सिरुवानी कोयंबटूर के प्रमुख पेयजल स्रोतों में से एक है, इसलिए 10 एमएलडी की कटौती सीधे लाखों नागरिकों को प्रभावित करती है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल उपलब्ध जल के अनुसार आपूर्ति को नियंत्रित किया जा रहा है; यदि मानसून और कमजोर रहा तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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