2 सितंबर 2026
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तमिलनाडु: सीएम विजय ने डीएमके कार्यकाल में किसानों-शिक्षकों पर दर्ज मामले वापस लेने का ऐलान किया

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तमिलनाडु: सीएम विजय ने डीएमके कार्यकाल में किसानों-शिक्षकों पर दर्ज मामले वापस लेने का ऐलान किया

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने डीएमके शासनकाल (मई 2021–अप्रैल 2026) में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर दर्ज किसानों और शिक्षकों के सभी आपराधिक मामले वापस लेने का ऐलान किया — परंदूर हवाई अड्डा और तिरुवनमलाई SIPCOT विरोध के प्रदर्शनकारियों को सीधी राहत।

मुख्य बातें

जोसेफ विजय ने 2 सितंबर 2026 को विधानसभा में नियम 110 के तहत यह घोषणा की।
मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लेने वाले किसानों और शिक्षकों पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस होंगे।
तिरुवनमलाई SIPCOT औद्योगिक एस्टेट और कांचीपुरम परंदूर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के विरोध में दर्ज मामले भी शामिल।
कुछ किसानों को गुंडा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था, जिसकी मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की थी।
राज्यभर में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को राहत मिलने की संभावना; संबंधित विभागों को कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी होंगे।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 2 सितंबर 2026 को विधानसभा में नियम 110 के तहत एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले किसानों और शिक्षकों के विरुद्ध दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लेगी। मुख्यमंत्री ने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और नागरिकों तथा प्रशासन के बीच विश्वास के पुनर्निर्माण का प्रयास बताया।

किन मामलों पर लागू होगा यह फैसला

यह आदेश तिरुवनमलाई जिले में प्रस्तावित तमिलनाडु राज्य उद्योग संवर्धन निगम (SIPCOT) के औद्योगिक एस्टेट के विरोध में उतरे किसानों पर दर्ज मामलों को कवर करेगा। इसके अलावा, कांचीपुरम जिले के परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के खिलाफ लंबे समय तक चले आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामले भी वापस लिए जाएंगे।

परंदूर और आसपास के गाँवों के निवासियों ने हवाई अड्डा परियोजना का विरोध इस आधार पर किया था कि इससे उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण होगा, जल निकायों को नुकसान पहुँचेगा और आय के पारंपरिक स्रोत नष्ट हो जाएंगे। आंदोलन के दौरान पिछली सरकार ने कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे और कुछ किसानों को गुंडा अधिनियम के तहत हिरासत में भी लिया गया था — एक कदम जिसकी राजनीतिक दलों, नागरिक समाज संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने व्यापक आलोचना की थी।

शिक्षकों के मामले भी होंगे वापस

यह घोषणा उन शिक्षकों पर भी समान रूप से लागू होती है जिन्होंने मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में भाग लिया था। शिक्षक संगठनों ने इन वर्षों में वेतन, पेंशन, नौकरी की सुरक्षा, अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण, पदोन्नति और कार्य परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन किए थे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि मानवीय और लोकतांत्रिक आधार पर — चाहे जिन भी कानूनी प्रावधानों के तहत मामले दर्ज हुए हों — उन्हें वापस लिया जाएगा।

कानूनी प्रक्रिया और अगले कदम

संबंधित विभागों और अधिकारियों को मामले वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। अधिकारी प्रत्येक मामले की जाँच करेंगे और आवेदनों को उपयुक्त न्यायालयों में प्रस्तुत करने से पहले आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी की जाएंगी। इस फैसले से राज्य भर में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को राहत मिलने की संभावना है जो विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में बार-बार अदालतों और पुलिस अधिकारियों के सामने पेश होने को मजबूर थे।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि प्रशासन किसानों, शिक्षकों और समाज के अन्य वर्गों के दंडात्मक कार्रवाई के भय के बिना अपनी चिंताएँ व्यक्त करने के अधिकार को मान्यता देता है। सरकार के अनुसार, मुकदमों की वापसी से लोकतांत्रिक मूल्यों को मज़बूती मिलेगी, अनावश्यक मुकदमेबाज़ी कम होगी और नागरिकों तथा प्रशासन के बीच अधिक रचनात्मक संबंध स्थापित होंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब नई सरकार पिछले डीएमके शासनकाल से स्पष्ट वैचारिक दूरी बनाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि परंदूर हवाई अड्डा विरोध और SIPCOT विरोध दोनों ही तमिलनाडु में जन-आंदोलनों के प्रतीक बन चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जल निकायों की सुरक्षा — वे अभी भी अनुत्तरित हैं। मामले वापस लेना न्याय का पहला कदम है, अंतिम नहीं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु सरकार ने किसानों और शिक्षकों पर दर्ज मामले क्यों वापस लेने का फैसला किया?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के अनुसार, यह फैसला मानवीय और लोकतांत्रिक आधार पर लिया गया है ताकि नागरिक दंडात्मक कार्रवाई के भय के बिना शांतिपूर्ण तरीके से अपनी वैध शिकायतें उठा सकें। सरकार का मानना है कि इससे नागरिकों और प्रशासन के बीच विश्वास का पुनर्निर्माण होगा।
कौन-कौन से मामले वापस लिए जाएंगे?
मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले किसानों और शिक्षकों पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस होंगे। इनमें तिरुवनमलाई SIPCOT औद्योगिक एस्टेट और कांचीपुरम परंदूर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के विरोध में दर्ज मामले विशेष रूप से शामिल हैं।
परंदूर हवाई अड्डे का विरोध किस बात को लेकर था?
परंदूर और आसपास के गाँवों के निवासियों ने इस आधार पर विरोध किया था कि प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे से उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण होगा, जल निकायों को नुकसान पहुँचेगा और आय के पारंपरिक स्रोत नष्ट हो जाएंगे। आंदोलन के दौरान कुछ किसानों को गुंडा अधिनियम के तहत हिरासत में भी लिया गया था।
मामले वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी?
संबंधित विभागों और अधिकारियों को मामले वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश जारी किए जाएंगे। अधिकारी प्रत्येक मामले की जाँच करेंगे और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद आवेदन उपयुक्त न्यायालयों में प्रस्तुत किए जाएंगे।
शिक्षकों ने किन मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किए थे?
शिक्षक संगठनों ने वेतन, पेंशन, नौकरी की सुरक्षा, अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण, पदोन्नति और कार्य परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों में भाग लेने पर दर्ज मामले भी अब वापस लिए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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