6 अगस्त 2026
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वेट्री वानमगल योजना: तमिलनाडु की महिला किसानों को मिलेगी ड्रोन पायलट ट्रेनिंग, ₹4 करोड़ का बजट

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वेट्री वानमगल योजना: तमिलनाडु की महिला किसानों को मिलेगी ड्रोन पायलट ट्रेनिंग, ₹4 करोड़ का बजट

सारांश

तमिलनाडु की 'वेट्री वानमगल योजना' महज़ एक कृषि कार्यक्रम नहीं — यह ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन पायलट बनाने का दांव है। ₹4 करोड़ के बजट और TNAU की ट्रेनिंग के साथ, राज्य सरकार संयुक्त राष्ट्र के 'महिला किसान वर्ष 2026' के मंच पर खेती में तकनीक और लैंगिक समावेश को एक साथ साधने की कोशिश कर रही है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने 6 अगस्त 2026 को 'वेट्री वानमगल योजना' की घोषणा की, जो महिला किसानों को ड्रोन प्रशिक्षण देगी।
500 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण मिलेगा, जिनमें 100 महिलाएँ विशेष रूप से शामिल हैं; प्रशिक्षण TNAU के रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन के ज़रिए होगा।
प्रशिक्षण के लिए ₹1.50 करोड़ और ड्रोन सब्सिडी के लिए ₹2.50 करोड़ आवंटित; कुल बजट ₹4 करोड़ ।
50 प्रशिक्षित महिलाओं को 50% सब्सिडी पर ड्रोन उपलब्ध कराए जाएँगे।
संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को 'महिला किसान का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' घोषित किया है, जो इस पहल को वैश्विक संदर्भ देता है।
योजना को मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय की 'वानमगल फ़ोर्स' अवधारणा से जोड़ा गया है।

तमिलनाडु सरकार ने 6 अगस्त 2026 को 'वेट्री वानमगल योजना' की घोषणा की, जिसके तहत राज्य की महिला किसानों को कृषि ड्रोन संचालन का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य तकनीक-आधारित खेती को बढ़ावा देना और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर खोलना है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री आर. विनोथ ने विधानसभा में 2026-27 का कृषि बजट पेश करते हुए इस योजना का ऐलान किया।

योजना में क्या शामिल है

इस योजना के अंतर्गत 500 योग्य उम्मीदवारों को ड्रोन संचालन का पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनमें 100 महिलाएँ विशेष रूप से शामिल होंगी। प्रशिक्षण तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (TNAU) के रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन के माध्यम से दिया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को ड्रोन पायलट लाइसेंस प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। प्रशिक्षण व्यय के लिए राज्य सरकार ने ₹1.50 करोड़ आवंटित किए हैं।

सब्सिडी और वित्तीय सहायता

प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार 50 प्रशिक्षित महिलाओं को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर ड्रोन उपलब्ध कराएगी। इस सब्सिडी घटक के लिए राज्य कोष से ₹2.50 करोड़ अलग से आवंटित किए गए हैं। इस प्रकार योजना का कुल बजट ₹4 करोड़ है।

ड्रोन तकनीक से कृषि को लाभ

मंत्री विनोथ ने कहा कि ड्रोन तकनीक खेती, निर्माण, माल ढुलाई, निगरानी और आपदा प्रबंधन सहित अनेक क्षेत्रों में तेज़ी से रोज़गार के अवसर पैदा कर रही है। कृषि में ड्रोन के उपयोग से उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव तथा फसल निगरानी जैसे श्रम-सघन कार्यों में मानवीय निर्भरता घटती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह तकनीक खेती के महत्वपूर्ण मौसमों में श्रमिकों की कमी की समस्या से निपटने में सहायक हो सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ और राजनीतिक महत्व

मंत्री ने रेखांकित किया कि यह पहल इसलिए और भी प्रासंगिक है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को 'महिला किसान का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' घोषित किया है, जिससे कृषि एवं खाद्य सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक ध्यान केंद्रित हुआ है। उन्होंने इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की महिला-केंद्रित नीतियों से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'सिंगप्पेन' फ़ोर्स बनाई गई थी, उसी तरह अब खेती की सुरक्षा और सहारे के लिए 'वानमगल फ़ोर्स' तैयार की जाएगी।

आगे की राह

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से प्रशिक्षित महिला ड्रोन ऑपरेटरों की एक नई पीढ़ी तैयार होगी जो ड्रोन-आधारित कृषि सेवाओं को आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में अपना सकेंगी। यह पहल तमिलनाडु के खेतों में प्रिसिजन एग्रीकल्चर तकनीक के विस्तार की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। 500 में से केवल 100 महिला सीटें और 50 सब्सिडी वाले ड्रोन तमिलनाडु के विशाल कृषि कार्यबल के मुकाबले प्रतीकात्मक ही लगते हैं। ₹4 करोड़ का बजट महत्वाकांक्षा और संसाधन के बीच की खाई को उजागर करता है। यदि TNAU प्रमाणित ऑपरेटरों को बाज़ार से नहीं जोड़ा गया, तो लाइसेंस प्राप्त महिलाएँ भी उसी बेरोज़गार-प्रशिक्षित वर्ग में शामिल हो सकती हैं जो कई सरकारी कौशल कार्यक्रमों की नियति रही है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वेट्री वानमगल योजना क्या है?
यह तमिलनाडु सरकार की एक कृषि पहल है जिसकी घोषणा 6 अगस्त 2026 को की गई। इसके तहत 100 महिला किसानों समेत 500 उम्मीदवारों को TNAU के रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन के ज़रिए ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण और पायलट लाइसेंस दिलाया जाएगा।
इस योजना के लिए कितना बजट रखा गया है?
योजना का कुल बजट ₹4 करोड़ है — ₹1.50 करोड़ प्रशिक्षण खर्च के लिए और ₹2.50 करोड़ 50 प्रशिक्षित महिलाओं को 50% सब्सिडी पर ड्रोन उपलब्ध कराने के लिए।
ड्रोन प्रशिक्षण से महिला किसानों को क्या फ़ायदा होगा?
प्रशिक्षित महिलाएँ ड्रोन-आधारित कृषि सेवाएँ — जैसे उर्वरक व कीटनाशक छिड़काव और फसल निगरानी — प्रदान करके आय का अतिरिक्त स्रोत बना सकती हैं। साथ ही, ड्रोन तकनीक खेती में श्रमिकों की कमी की समस्या को भी कम करती है।
इस योजना का प्रशिक्षण कहाँ और कैसे मिलेगा?
प्रशिक्षण तमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (TNAU) के रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइज़ेशन के माध्यम से दिया जाएगा। इसमें तकनीकी दक्षता और सरकारी ड्रोन पायलट लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया शामिल है।
यह योजना 2026 में क्यों शुरू की गई?
संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को 'महिला किसान का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष' घोषित किया है, जिससे कृषि में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक ध्यान है। कृषि मंत्री आर. विनोथ ने इसी संदर्भ में इस पहल को विशेष रूप से प्रासंगिक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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