क्या भगवान शिव के इस मंदिर में पोंगल विशेष अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है?

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क्या भगवान शिव के इस मंदिर में पोंगल विशेष अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है?

सारांश

तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर पोंगल पर विशेष अनुष्ठानों का गवाह बनता है। भक्तों की भारी भीड़ इस अद्वितीय मंदिर में एकत्र होती है जहां भगवान शिव की पूजा होती है। जानिए इस पावन पर्व की महत्ता और बृहदेश्वर मंदिर की विशेषताएँ।

Key Takeaways

  • पोंगल का पर्व 14 से 17 जनवरी तक मनाया जाता है।
  • बृहदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
  • मंदिर को फूलों से सजाया जाता है।
  • दक्षिण भारत में पोंगल फसल कटाई का प्रतीक है।
  • बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण ग्रेनाइट से किया गया है।

नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर भारत में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में पोंगल का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान सूर्य की उपासना की जाती है और चावल का भोग अर्पित किया जाता है।

इस वर्ष पोंगल की शुरुआत 14 जनवरी से होकर 17 जनवरी तक चलेगी। यह पूरे दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, लेकिन इसे तमिलनाडु के तंजावुर में विशेष रूप से मनाया जाता है। तंजावुर को 'चावल का कटोरा' कहा जाता है, जहां स्थित बृहदेश्वर मंदिर की विशेषता अद्वितीय है।

तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और पोंगल के दिन यहां भव्य आयोजन होते हैं। मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और पूरा दिन विशेष अनुष्ठान होते हैं। भक्त सूर्य की पूजा के साथ चावल और गुड़ से बने भोग को भगवान शिव को अर्पित करते हैं, और कुछ किसान भक्त मंदिर में नई फसलों का अंश भगवान को चढ़ाते हैं।

दक्षिण भारत में पोंगल का संबंध फसल कटाई और सूर्य की उपासना से होता है। चार दिन चलने वाले इस पर्व में हर दिन मंदिर में विशेष पूजा होती है। पोंगल पर भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अनुष्ठान करते हैं और पापों और रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं।

बृहदेश्वर मंदिर तंजावुर का सबसे प्राचीन मंदिर है, जिसकी वास्तुकला और शिल्पशैली ने इसे एक विशेष स्थान दिया है। इसे सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त है। चोल सम्राट राजाराजा चोल प्रथम ने इस मंदिर का निर्माण कराया था, और इसे ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। यह उस समय का पहला मंदिर है, जिसका निर्माण ग्रेनाइट से हुआ। तंजावुर के 100 किलोमीटर के दायरे में ग्रेनाइट पत्थर की उपलब्धता नहीं है।

985-1012 ई. के बीच पत्थर कहां से लाया गया, यह एक रहस्य है। बृहदेश्वर मंदिर कई मायनों में अद्वितीय है, क्योंकि इसकी नींव नहीं है और इसे 16 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित किया गया है। इसका गोपुरम 13 मंजिलों का है और इसे बनाने में बड़े ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग किया गया है, जिनका वजन लगभग 80,000 किलोग्राम है। यह कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में 7 साल लगे थे और इसकी दीवारों से लेकर गोपुरम तक द्रविड़ शैली की झलक देखने को मिलती है।

Point of View

बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्धि का प्रतीक भी है। पोंगल जैसे त्योहारों से जुड़े अनुष्ठान हमारे समाज में सांस्कृतिक एकता और परंपराओं को बनाए रखने में मदद करते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से स्थानीय समुदाय को भी आर्थिक लाभ मिलता है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

पोंगल का त्योहार कब मनाया जाता है?
पोंगल का त्योहार हर साल 14 जनवरी से 17 जनवरी तक मनाया जाता है।
बृहदेश्वर मंदिर किसके लिए प्रसिद्ध है?
बृहदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी वास्तुकला अद्वितीय है।
पोंगल के दौरान मंदिर में क्या विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं?
पोंगल के दौरान मंदिर में विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें चावल और गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है।
तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर कब बना था?
तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर 985-1012 ई. के बीच बना था।
बृहदेश्वर मंदिर की विशेषता क्या है?
इस मंदिर की नींव नहीं है और इसे 16 फीट ऊँचे चबूतरे पर बनाया गया है।
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