तस्लीमा नसरीन का UCC समर्थन: भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में समान नागरिक संहिता जरूरी
सारांश
मुख्य बातें
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने 2 अगस्त 2026 को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) को भारत में लागू किया जाना अनिवार्य है, ताकि महिलाओं के खिलाफ व्याप्त भेदभाव को समाप्त किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जरूरत केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी ऐसे कानून की उतनी ही आवश्यकता है।
मुख्य बयान और तर्क
नसरीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'सभी विकसित देशों में यूसीसी जैसे कानून हैं। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को समान नागरिक संहिता की जरूरत है। सबके लिए बराबर कानून होने चाहिए। महिलाओं को बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यूसीसी के जरिए उसका काफी हिस्सा दूर किया जा सकता है। यह जरूरी है।'
उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी से वंचित हैं। उनके अनुसार, 'अगर हिंदू महिलाओं को आजादी और बराबर अधिकार देने हैं तो समान नागरिक संहिता जरूरी है।' उन्होंने समानता को सभ्यता की बुनियाद बताया।
पश्चिम बंगाल सरकार की पृष्ठभूमि
नसरीन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में राज्य के लिए समान नागरिक संहिता के मसौदे की जांच हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून की 'व्यापकता और विशालता' को देखते हुए यह पैनल बनाया गया है, जो आगे कोई कदम उठाने से पहले ड्राफ्ट बिल की व्यापक समीक्षा करेगा। गौरतलब है कि UCC पर राष्ट्रीय बहस वर्षों से जारी है और कई राज्य सरकारें इस पर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही हैं।
मदरसों पर आलोचना
नसरीन ने मदरसों की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश में मदरसों का अस्तित्व नहीं होना चाहिए। कई मामलों में पाया गया है कि मदरसे जिहादी तैयार कर रहे हैं। इमामों और मदरसा शिक्षकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मुझे नहीं लगता मदरसों की कोई जरूरत है। कई स्नातक आगे जाकर कोई उत्पादक काम नहीं करते, वे दान पर ही जीते हैं।'
उनके इस बयान को पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की उस टिप्पणी के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने 2002 में राज्य के सीमावर्ती इलाकों में कुछ गैर-कानूनी मदरसों का जिक्र करते हुए कहा था कि वे आतंकी गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं।
कोलकाता वापसी और सम्मान
तस्लीमा नसरीन करीब 19 वर्षों के अंतराल के बाद कोलकाता लौटी हैं। उन्हें शनिवार को रवींद्र सदन में राज्य सरकार के एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। उन्होंने 2007 में कोलकाता छोड़ा था, जब उनकी किताब 'द्विखंडितो' के प्रकाशन के विरोध के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें शहर से बाहर भेज दिया था।
आगे की दिशा
नसरीन की इस यात्रा और उनके बयानों ने UCC, धार्मिक शिक्षा और महिला अधिकारों पर बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। पश्चिम बंगाल में गठित उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार की दिशा यह तय करेगी कि राज्य इस संवेदनशील मुद्दे पर किस रास्ते पर चलता है।