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तस्लीमा नसरीन का UCC समर्थन: भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में समान नागरिक संहिता जरूरी

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तस्लीमा नसरीन का UCC समर्थन: भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में समान नागरिक संहिता जरूरी

सारांश

19 साल बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन ने UCC को भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के लिए जरूरी बताया — महिला भेदभाव खत्म करने की दलील दी। यह बयान तब आया जब पश्चिम बंगाल सरकार ने UCC मसौदे की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की है।

मुख्य बातें

निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने 2 अगस्त 2026 को कोलकाता में समान नागरिक संहिता (UCC) का खुलकर समर्थन किया।
उन्होंने भारत , बांग्लादेश और पाकिस्तान — तीनों देशों में UCC लागू करने की जरूरत बताई।
बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं को पिता की संपत्ति में अधिकार न मिलने का हवाला देते हुए UCC को अनिवार्य बताया।
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में UCC मसौदे की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की है।
नसरीन ने मदरसों की भूमिका पर भी आलोचनात्मक टिप्पणी की और बांग्लादेश में उनकी आवश्यकता पर सवाल उठाए।
नसरीन 19 वर्षों के बाद कोलकाता लौटी हैं; 2007 में 'द्विखंडितो' विवाद के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था।

निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने 2 अगस्त 2026 को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) को भारत में लागू किया जाना अनिवार्य है, ताकि महिलाओं के खिलाफ व्याप्त भेदभाव को समाप्त किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जरूरत केवल भारत तक सीमित नहीं, बल्कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी ऐसे कानून की उतनी ही आवश्यकता है।

मुख्य बयान और तर्क

नसरीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'सभी विकसित देशों में यूसीसी जैसे कानून हैं। बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत को समान नागरिक संहिता की जरूरत है। सबके लिए बराबर कानून होने चाहिए। महिलाओं को बहुत भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यूसीसी के जरिए उसका काफी हिस्सा दूर किया जा सकता है। यह जरूरी है।'

उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं की स्थिति का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपने पिता की संपत्ति में हिस्सेदारी से वंचित हैं। उनके अनुसार, 'अगर हिंदू महिलाओं को आजादी और बराबर अधिकार देने हैं तो समान नागरिक संहिता जरूरी है।' उन्होंने समानता को सभ्यता की बुनियाद बताया।

पश्चिम बंगाल सरकार की पृष्ठभूमि

नसरीन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में राज्य के लिए समान नागरिक संहिता के मसौदे की जांच हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून की 'व्यापकता और विशालता' को देखते हुए यह पैनल बनाया गया है, जो आगे कोई कदम उठाने से पहले ड्राफ्ट बिल की व्यापक समीक्षा करेगा। गौरतलब है कि UCC पर राष्ट्रीय बहस वर्षों से जारी है और कई राज्य सरकारें इस पर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट कर रही हैं।

मदरसों पर आलोचना

नसरीन ने मदरसों की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश में मदरसों का अस्तित्व नहीं होना चाहिए। कई मामलों में पाया गया है कि मदरसे जिहादी तैयार कर रहे हैं। इमामों और मदरसा शिक्षकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। मुझे नहीं लगता मदरसों की कोई जरूरत है। कई स्नातक आगे जाकर कोई उत्पादक काम नहीं करते, वे दान पर ही जीते हैं।'

उनके इस बयान को पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की उस टिप्पणी के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने 2002 में राज्य के सीमावर्ती इलाकों में कुछ गैर-कानूनी मदरसों का जिक्र करते हुए कहा था कि वे आतंकी गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं।

कोलकाता वापसी और सम्मान

तस्लीमा नसरीन करीब 19 वर्षों के अंतराल के बाद कोलकाता लौटी हैं। उन्हें शनिवार को रवींद्र सदन में राज्य सरकार के एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। उन्होंने 2007 में कोलकाता छोड़ा था, जब उनकी किताब 'द्विखंडितो' के प्रकाशन के विरोध के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने उन्हें शहर से बाहर भेज दिया था।

आगे की दिशा

नसरीन की इस यात्रा और उनके बयानों ने UCC, धार्मिक शिक्षा और महिला अधिकारों पर बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। पश्चिम बंगाल में गठित उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार की दिशा यह तय करेगी कि राज्य इस संवेदनशील मुद्दे पर किस रास्ते पर चलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनकी टिप्पणियाँ — विशेषकर मदरसों पर — बिना बारीकी के एक जटिल संस्था को एकरंगी रूप में पेश करती हैं, जो आलोचनात्मक दृष्टि से अधूरी है। पश्चिम बंगाल सरकार का UCC समिति गठित करना और उसी सप्ताह नसरीन को सम्मानित करना — यह महज़ संयोग नहीं लगता। असली सवाल यह है कि क्या यह बहस महिलाओं के वास्तविक अधिकारों की दिशा में आगे बढ़ेगी, या सियासी प्रतीकवाद तक सिमटकर रह जाएगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तस्लीमा नसरीन ने UCC के बारे में क्या कहा?
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान तीनों देशों में समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए, क्योंकि इससे महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने विकसित देशों का उदाहरण देते हुए UCC को सभ्यता की बुनियाद बताया।
तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता क्यों लौटीं?
नसरीन 2007 में अपनी किताब 'द्विखंडितो' के प्रकाशन के विरोध के बाद तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार द्वारा कोलकाता से बाहर भेजे जाने के बाद निर्वासन में थीं। करीब 19 वर्षों बाद वे कोलकाता लौटीं, जहाँ पश्चिम बंगाल सरकार ने रवींद्र सदन में उन्हें सम्मानित किया।
पश्चिम बंगाल में UCC समिति क्यों बनाई गई है?
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के लिए UCC के मसौदे की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, प्रस्तावित कानून की 'व्यापकता और विशालता' को देखते हुए यह पैनल आगे कोई कदम उठाने से पहले ड्राफ्ट बिल की जांच करेगा।
तस्लीमा नसरीन ने मदरसों पर क्या कहा?
नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश में मदरसों की जरूरत नहीं है और कई मामलों में इन्हें जिहादी तैयार करने के केंद्र के रूप में पाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कई मदरसा स्नातक आगे जाकर उत्पादक काम नहीं करते और दान पर निर्भर रहते हैं।
UCC से महिलाओं को क्या फायदा होगा?
नसरीन के अनुसार, UCC लागू होने से महिलाओं के खिलाफ धर्म-आधारित भेदभाव काफी हद तक खत्म होगा। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं का उदाहरण दिया, जो मौजूदा कानूनों के तहत पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी से वंचित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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