16 जुलाई 2026
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तेलंगाना कांग्रेस का बड़ा फैसला: पार्टी कार्यक्रमों में दूधाभिषेक, जलाभिषेक और बुलडोजर-माला पर पाबंदी

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तेलंगाना कांग्रेस का बड़ा फैसला: पार्टी कार्यक्रमों में दूधाभिषेक, जलाभिषेक और बुलडोजर-माला पर पाबंदी

सारांश

तेलंगाना कांग्रेस ने पार्टी कार्यक्रमों में दूधाभिषेक, जलाभिषेक और बुलडोजर से माला पहनाने पर रोक लगाई है। एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन के निर्देश पर जारी इस परिपत्र में खाद्य बर्बादी और 'दमन के प्रतीक' वाहनों के उपयोग को अनुचित बताया गया है।

मुख्य बातें

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) ने 16 जुलाई 2026 को परिपत्र जारी कर पार्टी कार्यक्रमों में दूधाभिषेक (पालाभिषेकम) और जलाभिषेकम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
जेसीबी, बुलडोजर व अन्य भारी मशीनों से नेताओं को विशाल मालाएँ पहनाने की परंपरा पर भी पाबंदी; इन्हें 'दमन का प्रतीक' बताया गया।
निर्णय एआईसीसी की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन के निर्देशों के अनुरूप; परिपत्र टी.
कुमार राव (उपाध्यक्ष, टीपीसीसी) ने जारी किया।
पार्टी का तर्क: खाद्य सामग्री की बर्बादी कुपोषण से जूझ रहे समाज के लिए अनुचित; दूध-खाद्य सामग्री जरूरतमंदों में वितरित करने का सुझाव।
उल्लंघन करने वाले नेताओं व कार्यकर्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी।

तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) ने 16 जुलाई 2026 को एक अहम परिपत्र जारी कर पार्टी के सभी कार्यक्रमों में नेताओं का 'पालाभिषेकम' (दूधाभिषेक) और 'जलाभिषेकम' करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही जेसीबी, बुलडोजर या अन्य भारी मशीनों की सहायता से नेताओं को विशाल मालाएँ पहनाने की परंपरा पर भी रोक लगाई गई है। उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

क्या है नया निर्देश

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने पार्टी कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी अवसर या स्थान पर आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम में दूध या पानी से अभिषेक नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ कांग्रेस की विचारधारा और सिद्धांतों के सर्वथा विरुद्ध हैं।

टीपीसीसी के उपाध्यक्ष टी. कुमार राव ने यह परिपत्र जारी किया, जिसमें बताया गया कि यह निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि पार्टी का प्रत्येक पदाधिकारी इन निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होगा।

खाद्य बर्बादी और कुपोषण की दलील

पार्टी ने अपने निर्देश में तर्क दिया है कि दूध और पानी से अभिषेक जैसी परंपराएँ खाद्य सामग्री की बर्बादी को बढ़ावा देती हैं। यह ऐसे समय में विशेष रूप से अनुचित है जब समाज का एक बड़ा वर्ग कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।

टीपीसीसी ने सुझाव दिया है कि कार्यकर्ता दूध या अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग अभिषेक के बजाय जरूरतमंद लोगों में वितरण के लिए करें — यानी प्रतीकात्मक अनुष्ठान की जगह ठोस सामाजिक कार्य को प्राथमिकता दी जाए।

बुलडोजर-माला परंपरा पर रोक

परिपत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि हाल के दिनों में वरिष्ठ नेताओं के राज्यभर के दौरों के दौरान कुछ कार्यकर्ता जेसीबी और बुलडोजर जैसी भारी मशीनों की मदद से नेताओं को विशाल मालाएँ पहनाते रहे हैं। पार्टी ने इस प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कहा कि ये वाहन 'दमन के प्रतीक' माने जाते हैं और इनका उपयोग ऐसे आयोजनों में करना पार्टी की छवि के अनुकूल नहीं है।

गौरतलब है कि बुलडोजर की राजनीतिक प्रतीकात्मकता हाल के वर्षों में भारतीय राजनीति में तीखी बहस का विषय रही है। विपक्षी दल इसे सत्तारूढ़ दलों द्वारा दमन के औजार के रूप में चिह्नित करते रहे हैं — ऐसे में कांग्रेस का यह कदम एक सुविचारित वैचारिक संदेश भी देता है।

तेलंगाना में राजनीतिक परंपरा का संदर्भ

तेलंगाना में विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता नेताओं की जयंती, महत्वपूर्ण घोषणाओं या अन्य विशेष अवसरों पर उनके चित्रों और प्रतिमाओं का दूध और पानी से अभिषेक करते आए हैं। रैलियों और सार्वजनिक सभाओं में जेसीबी या बुलडोजर की मदद से बड़ी मालाएँ पहनाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। कांग्रेस का यह निर्देश इस क्षेत्रीय राजनीतिक संस्कृति से सीधे टकराव का संकेत देता है।

अनुशासन और आगे की राह

गौड़ ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार अपनी जन-कल्याण छवि को मजबूत करने में जुटी है और पार्टी संगठन को अधिक अनुशासित बनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का कितना पालन होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित वैचारिक पुनर्स्थापन है — खासकर तब जब 'बुलडोजर राजनीति' को लेकर राष्ट्रीय बहस चरम पर है। कांग्रेस का बुलडोजर को 'दमन का प्रतीक' कहना भाजपा शासित राज्यों की नीतियों पर सीधा वैचारिक प्रहार है, लेकिन विडंबना यह है कि यह प्रतीक तेलंगाना में कांग्रेस के अपने कार्यकर्ता ही इस्तेमाल कर रहे थे। दूधाभिषेक पर प्रतिबंध सामाजिक संवेदनशीलता का संदेश देता है, पर असली परीक्षा यह है कि क्या जमीनी कार्यकर्ता इस 'ऊपर से आए' निर्देश को आत्मसात करते हैं या यह परिपत्र महज कागजी रह जाता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीपीसीसी ने दूधाभिषेक और जलाभिषेक पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
तेलंगाना कांग्रेस ने यह प्रतिबंध इसलिए लगाया क्योंकि पार्टी का मानना है कि दूध और पानी से अभिषेक जैसी परंपराएँ खाद्य सामग्री की बर्बादी को बढ़ावा देती हैं, जो कुपोषण से जूझ रहे समाज के लिए अनुचित है। पार्टी ने इसे अपनी विचारधारा के विरुद्ध भी बताया है।
टीपीसीसी का यह परिपत्र किसने जारी किया और किसके निर्देश पर?
यह परिपत्र टीपीसीसी के उपाध्यक्ष टी. कुमार राव ने जारी किया। यह निर्णय एआईसीसी की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने इसे लागू करने के आदेश दिए हैं।
बुलडोजर से माला पहनाने पर रोक क्यों लगाई गई?
परिपत्र में कहा गया है कि जेसीबी और बुलडोजर जैसे वाहन 'दमन के प्रतीक' माने जाते हैं, इसलिए इनका उपयोग नेताओं को माला पहनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। हाल के दिनों में वरिष्ठ नेताओं के दौरों के दौरान यह प्रथा बढ़ती देखी गई थी।
इन निर्देशों का उल्लंघन करने पर क्या होगा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। परिपत्र में कहा गया है कि पार्टी का प्रत्येक पदाधिकारी इन निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होगा।
तेलंगाना में दूधाभिषेक और बुलडोजर-माला की परंपरा कब से चली आ रही है?
तेलंगाना में विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता लंबे समय से नेताओं की जयंती या विशेष अवसरों पर उनके चित्रों और प्रतिमाओं का दूध-पानी से अभिषेक करते आए हैं। रैलियों में जेसीबी या बुलडोजर की मदद से विशाल मालाएँ पहनाने की परंपरा भी वर्षों से चली आ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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