17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आषाढ़ी बीज पर CM भूपेंद्र पटेल ने अडालज और मेमनगर में दो जगन्नाथ रथ यात्राओं का किया उद्घाटन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आषाढ़ी बीज पर CM भूपेंद्र पटेल ने अडालज और मेमनगर में दो जगन्नाथ रथ यात्राओं का किया उद्घाटन

सारांश

आषाढ़ी बीज पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने एक ही दिन में दो जगन्नाथ रथ यात्राओं का नेतृत्व किया — अडालज की पाँचवीं और मेमनगर एसजीवी गुरुकुल की 19वीं। पाहिंद विधि, मंगला आरती और महा आरती के साथ यह आयोजन धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक उत्सव का संगम बना।

मुख्य बातें

CM भूपेंद्र पटेल ने 16 जुलाई को आषाढ़ी बीज पर दो जगन्नाथ रथ यात्राओं में भाग लिया।
अडालज जगन्नाथ मंदिर की पाँचवीं रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाने से पहले सोने की झाड़ू से 'पाहिंद विधि' का पालन किया।
मेमनगर एसजीवी गुरुकुल की 19वीं रथ यात्रा का औपचारिक उद्घाटन संतों व गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हुआ।
यह आयोजन धर्मजीवदास स्वामी की 125वीं जयंती और श्री स्वामीनारायण गुरुकुल की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में था।
गांधीनगर महापौर मीरा पटेल , अहमदाबाद महापौर हितेश बरोट और पूर्व राज्यसभा सदस्य नरहरि अमीन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार, 16 जुलाई को आषाढ़ी बीज के पावन अवसर पर अहमदाबाद और गांधीनगर जिलों में आयोजित दो अलग-अलग जगन्नाथ रथ यात्राओं में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने पहले अडालज स्थित जगन्नाथ मंदिर की पाँचवीं रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाई और बाद में मेमनगर में एसजीवी गुरुकुल द्वारा आयोजित 19वीं रथ यात्रा का औपचारिक उद्घाटन किया।

अडालज में पाँचवीं रथ यात्रा का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पटेल सुबह अडालज स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ मंदिर प्रशासन ने उनका पुष्पमाला और पारंपरिक पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाने से पूर्व उन्होंने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सोने की झाड़ू से पारंपरिक 'पाहिंद विधि' का पालन किया और भगवान जगन्नाथ को मंगला आरती अर्पित की।

सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना के लिए एकत्रित हुए। श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक अकादमी और अनुसंधान केंद्र द्वारा पिछले पाँच वर्षों से आयोजित यह रथ यात्रा मंदिर से शनि मंदिर, उवरसाद पुल और अडालज सर्कल होते हुए शाम को पुनः मंदिर में लौटती है।

इस अवसर पर गांधीनगर की महापौर मीरा पटेल, पूर्व राज्यसभा सदस्य नरहरि अमीन, पूर्व सिविल सेवक, राजनीतिक व सामाजिक नेता तथा गुजरात के ओडिया समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।

मेमनगर में एसजीवी गुरुकुल की 19वीं रथ यात्रा

दिन के बाद के पहर में मुख्यमंत्री मेमनगर स्थित एसजीवी गुरुकुल पहुँचे और संस्थान की 19वीं जगन्नाथ रथ यात्रा का उद्घाटन किया। उन्होंने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों के समक्ष प्रार्थना की, वैदिक विधि के अनुसार महा आरती की और संतों व गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से जुलूस का शुभारंभ किया।

अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने तीनों रथों को हरी झंडी दिखाने से पहले जनता की खुशी, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। अहमदाबाद के महापौर हितेश बरोट भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

विशेष जयंती समारोह का हिस्सा

एसजीवी गुरुकुल की यह रथ यात्रा दो महत्त्वपूर्ण उत्सवों के उपलक्ष्य में आयोजित की गई — परम पूज्य शास्त्री महाराज श्री धर्मजीवदास स्वामी की 125वीं जयंती और मेमनगर स्थित श्री स्वामीनारायण गुरुकुल की स्वर्ण जयंती। यह आयोजन धार्मिक परंपरा और संस्थागत स्मृति दोनों का संगम रहा।

आषाढ़ी बीज और जगन्नाथ परंपरा का महत्त्व

आषाढ़ी बीज को गुजरात में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है और इस दिन जगन्नाथ रथ यात्राओं का आयोजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। गौरतलब है कि पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा की परंपरा से प्रेरित ये स्थानीय आयोजन गुजरात में ओडिया समुदाय और स्थानीय भक्तों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करते हैं। मुख्यमंत्री की इन आयोजनों में सक्रिय भागीदारी राज्य सरकार की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बहु-सांस्कृतिक समावेश का मंच बन रहे हैं। एसजीवी गुरुकुल की स्वर्ण जयंती के साथ रथ यात्रा को जोड़ना संस्थागत और धार्मिक प्रतीकवाद का कुशल संयोजन है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM भूपेंद्र पटेल ने 16 जुलाई को किन रथ यात्राओं में भाग लिया?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 16 जुलाई को अडालज स्थित जगन्नाथ मंदिर की पाँचवीं रथ यात्रा और मेमनगर के एसजीवी गुरुकुल की 19वीं रथ यात्रा में भाग लिया। दोनों आयोजन आषाढ़ी बीज के अवसर पर हुए।
पाहिंद विधि क्या होती है?
पाहिंद विधि जगन्नाथ रथ यात्रा की एक पारंपरिक रस्म है जिसमें सोने की झाड़ू से रथ के मार्ग को प्रतीकात्मक रूप से साफ किया जाता है। यह विधि वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार रथ यात्रा के शुभारंभ से पूर्व की जाती है।
एसजीवी गुरुकुल की रथ यात्रा किस उपलक्ष्य में आयोजित हुई?
यह रथ यात्रा परम पूज्य शास्त्री महाराज श्री धर्मजीवदास स्वामी की 125वीं जयंती और मेमनगर स्थित श्री स्वामीनारायण गुरुकुल की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों का हिस्सा थी।
अडालज की जगन्नाथ रथ यात्रा का मार्ग क्या है?
अडालज की रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर शनि मंदिर, उवरसाद पुल और अडालज सर्कल होते हुए शाम को पुनः मंदिर में लौटती है। श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक अकादमी और अनुसंधान केंद्र पिछले पाँच वर्षों से इसका आयोजन करता आ रहा है।
आषाढ़ी बीज का गुजरात में क्या महत्त्व है?
आषाढ़ी बीज गुजरात में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है और इस दिन जगन्नाथ रथ यात्राओं का आयोजन राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का अभिन्न अंग है। यह पर्व ओडिया समुदाय और स्थानीय भक्तों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 16 घंटे पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले