आषाढ़ी बीज पर CM भूपेंद्र पटेल ने अडालज और मेमनगर में दो जगन्नाथ रथ यात्राओं का किया उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार, 16 जुलाई को आषाढ़ी बीज के पावन अवसर पर अहमदाबाद और गांधीनगर जिलों में आयोजित दो अलग-अलग जगन्नाथ रथ यात्राओं में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने पहले अडालज स्थित जगन्नाथ मंदिर की पाँचवीं रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाई और बाद में मेमनगर में एसजीवी गुरुकुल द्वारा आयोजित 19वीं रथ यात्रा का औपचारिक उद्घाटन किया।
अडालज में पाँचवीं रथ यात्रा का शुभारंभ
मुख्यमंत्री पटेल सुबह अडालज स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुँचे, जहाँ मंदिर प्रशासन ने उनका पुष्पमाला और पारंपरिक पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाने से पूर्व उन्होंने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सोने की झाड़ू से पारंपरिक 'पाहिंद विधि' का पालन किया और भगवान जगन्नाथ को मंगला आरती अर्पित की।
सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना के लिए एकत्रित हुए। श्री जगन्नाथ सांस्कृतिक अकादमी और अनुसंधान केंद्र द्वारा पिछले पाँच वर्षों से आयोजित यह रथ यात्रा मंदिर से शनि मंदिर, उवरसाद पुल और अडालज सर्कल होते हुए शाम को पुनः मंदिर में लौटती है।
इस अवसर पर गांधीनगर की महापौर मीरा पटेल, पूर्व राज्यसभा सदस्य नरहरि अमीन, पूर्व सिविल सेवक, राजनीतिक व सामाजिक नेता तथा गुजरात के ओडिया समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।
मेमनगर में एसजीवी गुरुकुल की 19वीं रथ यात्रा
दिन के बाद के पहर में मुख्यमंत्री मेमनगर स्थित एसजीवी गुरुकुल पहुँचे और संस्थान की 19वीं जगन्नाथ रथ यात्रा का उद्घाटन किया। उन्होंने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथों के समक्ष प्रार्थना की, वैदिक विधि के अनुसार महा आरती की और संतों व गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से जुलूस का शुभारंभ किया।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने तीनों रथों को हरी झंडी दिखाने से पहले जनता की खुशी, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। अहमदाबाद के महापौर हितेश बरोट भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
विशेष जयंती समारोह का हिस्सा
एसजीवी गुरुकुल की यह रथ यात्रा दो महत्त्वपूर्ण उत्सवों के उपलक्ष्य में आयोजित की गई — परम पूज्य शास्त्री महाराज श्री धर्मजीवदास स्वामी की 125वीं जयंती और मेमनगर स्थित श्री स्वामीनारायण गुरुकुल की स्वर्ण जयंती। यह आयोजन धार्मिक परंपरा और संस्थागत स्मृति दोनों का संगम रहा।
आषाढ़ी बीज और जगन्नाथ परंपरा का महत्त्व
आषाढ़ी बीज को गुजरात में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है और इस दिन जगन्नाथ रथ यात्राओं का आयोजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। गौरतलब है कि पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा की परंपरा से प्रेरित ये स्थानीय आयोजन गुजरात में ओडिया समुदाय और स्थानीय भक्तों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करते हैं। मुख्यमंत्री की इन आयोजनों में सक्रिय भागीदारी राज्य सरकार की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।