'ठक-ठक' गैंग के दो सदस्य गिरफ्तार: ₹6 लाख नकद, लैपटॉप, गहने और स्कूटी बरामद
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (एएटीएस) साउथ डिस्ट्रिक्ट ने कुख्यात 'ठक-ठक' गैंग के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 30 जून 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से ₹6 लाख नकद, एक लैपटॉप, एक मैकबुक, सोने के गहने, चाँदी की वस्तुएँ और अपराध में इस्तेमाल की गई स्कूटी बरामद की गई। यह ऑपरेशन दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में दर्ज कई चोरी के मामलों से जुड़ा बताया जा रहा है।
गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण
पुलिस ने बताया कि गुप्त सूचना मिलते ही एएटीएस की टीम ने जाल बिछाया और गंगेश नायडू (40) तथा विक्रम (33) — दोनों निवासी दक्षिणपुरी, अंबेडकर नगर, नई दिल्ली — को सफलतापूर्वक पकड़ लिया। लगातार पूछताछ और तलाशी के बाद निम्नलिखित सामान बरामद किया गया: ₹6 लाख नकद, 1 लैपटॉप, 1 मैकबुक, 2 मोबाइल फोन, सोने की 5 चूड़ियाँ, सोने की 3 चेन, 1.1 किलो चाँदी की वस्तुएँ, 1 घड़ी, ईयरबड्स, चोरी के औजार और अपराध में इस्तेमाल की गई एक स्कूटी।
'ठक-ठक' तकनीक: कैसे देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी नकद और कीमती सामान ले जा रहे लोगों को निशाना बनाते थे। वे किसी न किसी बहाने पीड़ित का ध्यान भटकाते थे — इसी 'ठक-ठक' तकनीक के नाम पर इस गैंग की पहचान है — और मौका मिलते ही गाड़ी से बैग या कीमती सामान चुराकर स्कूटी पर फरार हो जाते थे। जाँचकर्ताओं के अनुसार, यह एक अंतर-राज्यीय गिरोह है जो दिल्ली और हरियाणा दोनों में सक्रिय रहा है।
आरोपियों का आपराधिक इतिहास
पुलिस के अनुसार, गंगेश नायडू के खिलाफ विभिन्न राज्यों के थानों में 34 एफआईआर दर्ज हैं। वहीं, विक्रम के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर में 42 मामले दर्ज हैं, जिनमें अधिकतर गुरुग्राम के थानों में हैं। दोनों की लंबी आपराधिक पृष्ठभूमि इस गैंग की संगठित प्रकृति को दर्शाती है।
आगे की जाँच
पुलिस ने बताया कि गैंग के अन्य सदस्यों की पहचान करने और बरामद सामान को अन्य लंबित मामलों से जोड़ने के प्रयास जारी हैं। तकनीकी विश्लेषण और पूछताछ के आधार पर दोनों आरोपियों को दिल्ली-एनसीआर के कई मामलों से जोड़ा गया है। जाँचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।