टाइगर बेबी डिजिटल के दफ्तर से 66 हार्ड डिस्क चोरी, 'मेड इन हेवन' समेत कई परियोजनाओं का डेटा गायब
सारांश
मुख्य बातें
टाइगर बेबी डिजिटल एलएलपी — फिल्मकार जोया अख्तर और रीमा कागती की मुंबई स्थित प्रोडक्शन कंपनी — के बांद्रा पश्चिम कार्यालय से 66 हार्ड डिस्क कथित तौर पर चोरी हो गई हैं, जिनमें 'मेड इन हेवन', 'घोस्ट स्टोरीज' और अन्य परियोजनाओं का संवेदनशील उत्पादन डेटा संग्रहित था। बांद्रा पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद शाहिद अजीम खान और रितेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है; शाहिद को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि रितेश की तलाश जारी है।
चोरी का खुलासा कैसे हुआ
चोरी का पता 21 मई को तब चला जब कार्यालय के कर्मचारी काम के लिए एक विशेष हार्ड डिस्क ढूंढ रहे थे और वह नहीं मिली। इसके बाद भंडारण अलमारियों की जाँच की गई तो पाया गया कि कई डिवाइस गायब हैं। कर्मचारियों को मूल उपकरणों की जगह खाली और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त बक्से मिले। आग या बाहरी नुकसान के कोई संकेत नहीं थे, जिसके बाद कंपनी ने आंतरिक जाँच शुरू की।
आंतरिक जाँच में सामने आया कि प्रोडक्शन हाउस के पास कुल 119 हार्ड डिस्क थीं, जिनमें से 66 का अभी तक पता नहीं चल पाया है। ये डिवाइस 16 से 72 टेराबाइट क्षमता की थीं और फिल्मों, ओटीटी परियोजनाओं तथा व्यावसायिक शूट के भारी-भरकम डिजिटल डेटा को संग्रहित करने के काम आती थीं।
किन परियोजनाओं का डेटा प्रभावित
बांद्रा पुलिस के अनुसार, लापता हार्ड डिस्क में मेड इन हेवन, घोस्ट स्टोरीज, नायका अभियान और गांधी मनी शो सहित कई परियोजनाओं की रॉ फुटेज, संपादन टाइमलाइन, बैकअप फाइलें और उत्पादन अभिलेखागार मौजूद थे। लापता स्टोरेज डिवाइसों और डेटा हानि का अनुमानित मूल्य लगभग ₹12 से 13 लाख बताया जा रहा है। हालांकि उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि यदि कोई अप्रकाशित सामग्री ऑनलाइन लीक हुई तो वास्तविक नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुँच सकता है।
आरोपी की पहचान और स्वीकारोक्ति
गिरफ्तार आरोपी शाहिद टाइगर बेबी डिजिटल के दफ्तर में ऑफिस बॉय के रूप में काम करता था और कई वर्षों से हार्ड डिस्क की देखरेख व भंडारण की जिम्मेदारी उसके पास थी। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर पिछले 5 महीनों में कई हार्ड डिस्क चुराने की बात स्वीकार की है।
शाहिद ने यह भी बताया कि उसने बोरीवली निवासी रितेश को 24 हार्ड डिस्क लगभग ₹15,000 से ₹20,000 प्रति हार्ड डिस्क के हिसाब से बेचीं। हालांकि वह शेष लापता डिस्क के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाया, जिससे जाँचकर्ताओं को संदेह है कि इस मामले में और लोग भी शामिल हो सकते हैं।
जाँच का दायरा
कंपनी की कार्यकारी सहायक और मानव संसाधन प्रशासक मेहजबीन मुश्ताक शेख की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस एक अन्य कर्मचारी कल्पेश पवार की संभावित भूमिका की भी जाँच कर रही है; हालांकि जाँचकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।
बांद्रा पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए डेटा की प्रतियाँ बनाई गईं या नहीं, उसे बेचा गया या आगे लीक किया गया। जाँचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या डिजिटल डेटा की चोरी से जुड़ा कोई बड़ा गिरोह इस मामले के पीछे है। मुंबई के फिल्म उद्योग में यह घटना डिजिटल संपत्ति की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।