टीएनईबी हार्ड डिस्क चोरी: 34 डिस्क बरामद, मामला सीबीसीआईडी को सौंपा, दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (टीएनईबी) के मुख्यालय से 34 कंप्यूटर हार्ड डिस्क चोरी होने का मामला अब क्राइम ब्रांच-क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबीसीआईडी) के हाथों में आ गया है। चेन्नई पुलिस की सिफारिश पर तमिलनाडु सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि जांच को और व्यापक एवं निष्पक्ष रूप दिया जा सके। इस मामले ने राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है और संवेदनशील सरकारी डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
चेन्नई की अन्ना सलाई स्थित टीएनईबी मुख्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अनुभाग से 34 कंप्यूटर हार्ड डिस्क गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद चिंताद्रिपेट पुलिस ने चेन्नई पुलिस कमिश्नर ए. अमलराज के निर्देश पर मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने टीएनईबी मुख्यालय में कंप्यूटर सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत गोपीनाथ (31) को गिरफ्तार किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, गोपीनाथ ने ये हार्ड डिस्क चुराकर बेंगलुरु स्थित एक कंप्यूटर कंपनी को बेच दी थीं।
गोपीनाथ अरक्कोनम के पास वालारपुरम गांव का रहने वाला है और उसने लगभग एक वर्ष पूर्व टीएनईबी मुख्यालय में नौकरी शुरू की थी। उसे चेन्नई की एग्मोर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उसे 19 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
हार्ड डिस्क की बरामदगी और दूसरी गिरफ्तारी
गोपीनाथ की गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस की एक विशेष टीम बेंगलुरु रवाना हुई और वहाँ से सभी 34 हार्ड डिस्क बरामद कर लिए। इसके साथ ही पुलिस ने उस कंप्यूटर कंपनी के प्रेसिडेंट मुरली मनोहर को भी गिरफ्तार किया, जिसने कथित तौर पर ये चोरी की हार्ड डिस्क खरीदी थीं। जांचकर्ता उनसे पूछताछ कर रहे हैं और अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर गोपीनाथ की दोबारा कस्टडी माँगी जाएगी, ताकि उससे और विस्तृत पूछताछ की जा सके।
सीबीसीआईडी को जांच सौंपने की वजह
डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) को चेन्नई पुलिस की सिफारिश के बाद तमिलनाडु सरकार ने यह मामला सीबीसीआईडी को स्थानांतरित किया। यह ट्रांसफर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीबीसीआईडी के पास साइबर अपराध और संगठित आपराधिक गतिविधियों की जांच के लिए विशेष संसाधन एवं विशेषज्ञता उपलब्ध है। जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि क्या यह केवल सरकारी संपत्ति की चोरी थी, या टीएनईबी के पास मौजूद संवेदनशील डेटा से छेड़छाड़ करने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा।
राजनीतिक विवाद और विपक्ष की माँग
विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सत्ताधारी सरकार पर निशाना साधा है। आलोचकों का कहना है कि हार्ड डिस्क का गायब होना महज चोरी नहीं, बल्कि अहम जानकारी को नष्ट करने या छिपाने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। कई राजनीतिक नेताओं ने इस मामले की सीबीआई जांच की माँग की है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में उठा है जब सरकारी संस्थाओं में डेटा सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
सीबीसीआईडी अब यह जाँचेगी कि क्या कोई सरकारी रिकॉर्ड प्रभावित हुआ है और क्या इस कथित चोरी व बिक्री में अन्य व्यक्ति भी शामिल थे। यह घटना सरकारी आईटी अवसंरचना की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि मामला केवल आर्थिक अपराध तक सीमित है या इसके राजनीतिक आयाम भी हैं।