अभिषेक बनर्जी के फरार सहायक सुमित रॉय पर नई एफआईआर, नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के फरार एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट सुमित रॉय के खिलाफ 21 जून को एक और एफआईआर दर्ज की गई है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा पुलिस स्टेशन में दर्ज इस नई प्राथमिकी में रॉय पर आरोप है कि उन्होंने ममता बनर्जी सरकार के दौरान राज्य सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा वादा कर कई लोगों से लाखों रुपए की ठगी की।
मुख्य घटनाक्रम
यह पहला मामला नहीं है जिसमें सुमित रॉय का नाम आया है। इससे पहले पश्चिम मेदिनीपुर जिले की एक जिला अदालत उसी जिले के साल्बोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक अलग प्रकरण में उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुकी है। उस मामले में रॉय पर गैरकानूनी तरीके से जमीन हड़पने का आरोप है। पुलिस ने उन्हें देश से बाहर जाने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस भी जारी किया हुआ है, फिर भी रॉय अब तक फरार हैं।
अभिषेक बनर्जी के घर पर रेड
इस महीने की शुरुआत में साल्बोनी पुलिस स्टेशन, कोलकाता पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की एक संयुक्त टीम ने रॉय की तलाश में दक्षिण कोलकाता के कालीघाट रोड स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर तलाशी अभियान चलाया था। अधिकारियों के अनुसार, रॉय के मोबाइल फोन का अंतिम टावर लोकेशन इसी आवास के निकट दर्ज हुआ था, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे भी हैं।
सुजॉय हाजरा के बयान से खुला मामला
तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बंगाल पुलिस ने भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया था। उनके बयानों के बाद ही सुमित रॉय का नाम जमीन हड़पने और सरकारी नौकरी का वादा कर ठगी के दोनों मामलों में सामने आया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जाँच कई एजेंसियाँ एक साथ कर रही हैं।
अभिषेक बनर्जी से पूछताछ
पिछले एक महीने में अभिषेक बनर्जी से दो अलग-अलग जाँच एजेंसियों ने तीन मामलों में कई बार पूछताछ की है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे पश्चिम बंगाल में स्कूल नौकरी घोटाले से जुड़े करोड़ों रुपए के नकद लेन-देन के मामले में पूछताछ की। वहीं, पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जाँच विभाग (CID) ने उनसे दो अलग प्रकरणों में पूछताछ की — एक, विधायकों के हस्ताक्षरों में अंतर का मामला; और दूसरा, हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले कथित तौर पर हिंसा भड़काने वाले बयानों से जुड़ा मामला।
आगे क्या होगा
सुमित रॉय के विरुद्ध अब एकाधिक पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज हैं और अदालत का गिरफ्तारी वारंट भी जारी है। जाँच एजेंसियाँ उनकी गिरफ्तारी के लिए सक्रिय हैं। आलोचकों का कहना है कि यह पूरा प्रकरण पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल के भीतर भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। आने वाले दिनों में जाँच की दिशा और न्यायिक कार्यवाही पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।